Shayari: ‘वक़्त हमसे रूठ जाने की अदा तक ले गया’, शायरों के दिल की बात कुछ इस तरह…

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Shayari: उर्दू शायरी (Urdu Shayari) जज्‍़बातों की दुनिया है. वैसे तो शायरी में हर जज्‍़बात (Emotion) को जगह दी गई है. इसी तरह वक्‍त के बारे में भी शायरों ने ख़ूबसूरत अंदाज़ में अपना नज़रिया पेश किया है. फिर बात चाहे जवानी की उम्र और इसमें उमंगों, आरज़ुओं की रवानी की हो या फिर गुज़रते वक्‍़त के साथ दिलों के बीच आते फ़ासलों का जिक्र है. शायरों से इससे जुड़े हर जज्‍़बात को बहुत ही दिलकश अंदाज़ में क़लमबंद किया है. यही वजह है कि जगह जगह शायरी में इश्‍क़ की बात है, तो वक्‍़त का भी जिक्र मिल ही जाता है. आज शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए पेश हैं. आज शायरी में ‘वक्‍़त’ की बात, जज्‍़बात का जिक्र और शायरों के कलाम के चंद रंग. आप भी इनका लुत्‍फ़ उठाइए.

सदा ऐश दौरां दिखाता नहीं
गया वक़्त फिर हाथ आता नहीं
मीर हसन

सुबह होती है शाम होती है
उम्र यूं ही तमाम होती है
मुंशी अमीरुल्लाह तस्लीम

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या वो थे ख़फ़ा हम से या हम हैं ख़फ़ा उन से
कल उन का ज़माना था आज अपना ज़माना है
जिगर मुरादाबादी

गुज़रने ही न दी वो रात मैं ने
घड़ी पर रख दिया था हाथ मैं ने
शहज़ाद अहमद

उम्र भर मिलने नहीं देती हैं अब तो रंजिशें
वक़्त हमसे रूठ जाने की अदा तक ले गया
फ़सीह अकमल

ये पानी ख़ामुशी से बह रहा है
इसे देखें कि इस में डूब जाएं
अहमद मुश्ताक़

सफ़र पीछे की जानिब है क़दम आगे है मेरा
मैं बूढ़ा होता जाता हूं जवां होने की ख़ातिर
ज़फ़र इक़बाल

चेहरा ओ नाम एक साथ आज न याद आ सके
वक़्त ने किस शबीह को ख़्वाब ओ ख़याल कर दिया
परवीन शाकिर

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हज़ारों साल सफ़र कर के फिर वहीं पहुंचे
बहुत ज़माना हुआ था हमें ज़मीं से चले
वहीद अख़्तर

(साभार/रेख्‍़ता)



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