PU स्टूडेंट्स में असमंजस बरकरार: एडमिशन के लिए अप्लाई करेंगे, जाने का फैसला हालात देखकर

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चंडीगढ़21 मिनट पहले

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हरनीत सिंह का इस बार 12वीं के बाद DU से BA करने का इरादा था।

कोरोना की वजह से इन दिनाें में पेरेंट्स बहुत ज्यादा कंफ्यूज हैं। प्लानिंग काे साइडलाइन कर दिया है। काेराना के कारण लाेगाें की दिक्कत ये है कि वे स्टूडेंट काे बाहर भेजें या नहीं। पिछले साल काॅमर्स और अन्य स्ट्रीम के कुछ टाॅपर्स ने शहर में ही रहना ठीक समझा।हर साल सेंट्रलाइज्ड एडमिशन के समय जाे सेंट्रलाइज्ड मैरिट लिस्ट बनती है, उसमें ये माना जाता है कि पहले 25 में से पांच स्टूडेंट ही ऐसे हाेंगे, जाे शहर में रहेंगे।

यही ट्रेंड लगभग हर साल रहता है। बीते साल कुछ लाेग शहर के ही काॅलेजाें में रुके ताे कुछेक ने कुछ महीने पढ़ने के बाद में दिल्ली का रुख कर लिया। वहां पर क्लासेज ज्यादा रेगुलर थीं और एग्जामिनेशन का सिस्टम भी बेहतर रहा। 12वीं के एक स्टूडेंट के पिता कहते हैं कि पासआउट ताे अब इसे माना ही जाएगा, लेकिन प्राॅब्लम ये है कि वे एडमिशन कहां पर दिलाएं।

शहर के ही कॉलेज में कार्यरत स्टाफ मेंबर का मानना है कि यहां पर सिस्टम काफी खराब रहा। क्लासेज काे लेकर ट्रैकिंग नहीं है। काेई टीचर बिल्कुल रेगुलर है ताे काेई क्लास ले ही नहीं रहा। एग्जाम का सिस्टम भी इवैल्यूवेशन के बजाय माॅकरी है। यदि क्लासेज रेगुलर ली हाेतीं ताे ओपन बुक एग्जाम लेते लेकिन एेसा कुछ भी नहीं हुआ है। इसलिए दिल्ली बेहतर है।

बहरहाल वे दिल्ली में अप्लाई जरूर करेंगे, इसके बाद काेराेना के हालात बताएंगे कि क्या हाेता है। DU ने स्पष्ट कर दिया है कि एडमिशन मैरिट पर हैं, इसलिए दिक्कत नहीं हाेगी। कुछ एैसा ही जवाब इंजीनियरिंग की तैयारी करवा रहे एक परिवार का भी है। उनका कहना है कि वैक्सीन आने के बाद हालात बदल गए हैं। छह महीने बाद उनके बच्चे काे भी वैक्सीन लग जाएगी, इससे पहले ताे कॉलेज या यूनिवर्सिटीज खुलने की संभावना नहीं है।

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पाेखरियाल निशंक से मीटिंग के दाैरान सभी IIT ने कहा है कि कैंपस खाेले जा सकते हैं। सभी स्टूडेंट्स के लिए वेक्सीनेशन का इंतजाम हाे। दाेनाे वैक्सीन के 18 दिन बाद उन्हें बुलाया जाए। क्वारेंटाइन करने के बाद रेगुलर कैंपस शुरू करें और बाद में स्टूडेंट्स काे बाहर जाने की परमिशन नहीं हाेगी। हालांकि अभी तक इस बारे में काेई गाइडलाइंस तैयार नहीं हुई हैं। ऐसे ही एक पेरेंट का कहना है कि उनकी बेटी का लंदन और बेटे का सिंगापुर में एडमिशन हो गया है। अगर हालात ठीक होंगे ताे वे जरूर भेजेंगे।

छोटी बहन के लिए कंफ्यूजन

अक्षिमा काे पिछले साल ही पिता ने दिल्ली के कॉलेज से निकालकर शहर के ही एक कॉलेज में एडमिशन दिला दिया था। कुछ एक्स्ट्रा पढ़ाई करके ही कॉमर्स पूरी की। अब छोटी बहन की बारी है ताे फिर से कंफ्यूजन है, क्याेंकि मास काॅम और PR की ग्रेजुएशन ताे यहां है नहीं। काेविड के कारण क्या यहां पर किसी दूसरे कॉलेज में एडमिशन दिलाया जाए।

DU जाने का इरादा था, लेकिन मां भेजने के लिए तैयार नहीं हैं

हरनीत सिंह का इस बार 12वीं के बाद DU से BA ऑनर्स इकनॉमिक्स करने का इरादा था। पिछले अंको के आधार पर उन्हें उम्मीद है कि मैरिट में आ जाएगा। पापा तैयार हैं लेकिन मां बाहर भेजने के लिए तैयार नहीं।

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