LJP Dispute: चिराग की याचिका पर स्पीकर के वकील ने दिल्ली HC को बताया- वह इस मामले को देख रहे हैं

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नई दिल्ली. लोकसभा अध्यक्ष की तरफ से लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के सदस्य के तौर पर पशुपति पारस (Pashupati Paras) को मंत्री पद की शपथ लेने के खिलाफ दाखिल चिराग पासवान (Chirag Paswan) की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में सुनवाई जारी है. हाईकोर्ट ने लोकसभा स्पीकर के वकील से कहा कि वह 10 मिनट के भीतर कोर्ट यह बताएं कि पार्टी विवाद को लेकर चिराग पासवान की तरफ से जो अर्जी लोकसभा स्पीकर के पास लगाई गई है उस पर फैसला ले रहे हैं या नहीं. स्पीकर के वकील ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने इस मामले में स्पीकर से बात की है. उनकी तरफ से जानकारी दी गई है कि इस प्रकरण को वो देख रहे हैं. वकील ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया है.

कोर्ट ने कहा कि हम इस मामले (LJP Dispute) में अभी कोई आदेश नहीं दे सकते क्योंकि स्पीकर इस मामले को देख रहे हैं. लोकसभा अध्यक्ष के वकील ने कहा कि इस याचिका पर सुनवाई का कोई आधार नहीं है. जब लोकसभा स्पीकर खुद इस मामले को देख रहे हैंं. चिराग के वकील ने स्पीकर के इस बात का कोई विरोध नहीं किया है.

चिराग ने स्पीकर के फैसले को दी थी चुनौती

आपको बता दें कि लोकसभा स्पीकर के पास चिराग पासवान ने लोक जनशक्ति पार्टी के सदन के नेता के तौर पर खुद को चुनने के लिए कहा था. स्पीकर के वकील ने कहा कि आप स्पीकर से ये पूछ कर आए कि पार्टी विवाद को लेकर जो चिराग पासवान की तरफ से अर्जी दी है उसपर स्पीकर फैसला ले रहे हैं या नहीं. कोर्ट ने स्पीकर के वकील को दस मिनट में बताने को कहा है. चिराग के वकील ने कहा कि चिराग पासवान अध्यक्ष के तौर पर लोकसभा अध्यक्ष को जानकारी दे चुके थे कि पशुपति पारस समेत पांच सांसदों को पार्टी से निकाला जा चुका है.

कोर्ट की टिप्पणी

पशुपति पारस की तरफ से पेश वकील ने कहा कि जो लेटर पारस ने लोकसभा अध्यक्ष को दिया था उस समय पशुपति पारस पार्टी के चीफ व्हिप थे और बाद में पार्टी के लीडर चुने गए थे. कोर्ट ने कहा कि आपको चुनाव आयोग जाना चाहिए. यहां नहीं आना चाहिए था. कोर्ट ने कहा कि ये याचिका यहां पर मेंटिनेबल नहीं है. दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में चिराग पासवान ने कहा है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों और शीर्ष नेतृत्‍व को धेाखा देने की वजह से राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष होने के नाते पशुपति कुमार पारस को पार्टी से निकाला जा चुका है. इस वजह से वे लोजपा के सदस्‍य नहीं हैं. चिराग ने लोकसभा अध्‍यक्ष ओम बिड़ला के उस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी थी जिसमें उनके चाचा केंद्रीय खाद्य प्रसंस्‍करण मंत्री पशुपति कुमार पारस के गुट को मान्‍यता दी है.



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