Kota News: तीन अस्पतालों के 900 ठेका कर्मचारियों ने 2 घंटे काम ठप रखा, प्रभावित रहीं मेडिकल सेवाएं

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मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध शहर के तीन बड़े अस्पतालों में कार्यरत ठेका श्रमिक इन दिनों आंदोलन पर हैं.

कोटा में काम बंद हड़ताल में अस्पताल में कैस काउंटर, पर्ची काउंटर, वार्ड बॉय, सफाई कर्मी, ट्रॉलीकर्मी, दवा काउंटर, लेखा शाखा, एक्सरे विभाग, सहित अस्पताल के कई वार्डों में कार्यरत ठेका शामिल हैं, इससे अस्पताल की मेडिकल सेवाएं प्रभावित हो रही हैं.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    January 23, 2021, 5:02 PM IST

कोटा. कोटा में मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध शहर के तीनों बड़े अस्पताल में काम करने वाले ठेका कर्मचारी इन दिनों दो घंटे की काम बंद हड़ताल (Strike Off Work) पर हैं. वह ठेका प्रथा समाप्त करने की मांग कर रहे हैं. इसे लेकर नए अस्पताल, एमबीएस, जेके लोन सहित जिला रामपुरा अस्पताल के करीब 900 ठेका श्रमिक शुक्रवार से 2 घंटे के कार्य बहिष्कार पर हैं. शनिवार को दूसरे दिन भी ठेका श्रमिकों ने 2 घंटे काम बंद रखकर गुस्सा जाहिर किया.

इस काम बंद हड़ताल में अस्पताल में कैस काउंटर, पर्ची काउंटर, वार्ड बॉय, सफाई कर्मी, ट्रॉलीकर्मी, दवा  काउंटर, लेखा शाखा, एक्सरे विभाग, सहित अस्पताल के कई वार्डों में कार्यरत ठेका कर्मचारियों ने अस्पताल के गेट पर इकट्ठा होकर नारेबाजी की. इस कार्य बहिष्कार से एमबीएस व जेके लोन अस्पताल मेडिकल सेवाओं पर असर पड़ा. वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अस्पताल प्रशासन ने नर्सिंग स्टूडेंट्स को लगाया.

ठेका कर्मचारियों का आरोप है कि ठेका प्रथा के तहत कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है. कोरोना काल में कोरोना वॉरियर्स के रूप में फ्रंट लाइन पर रहकर ठेका कर्मचारियों ने काम किया है. उसके बाद भी ठेका श्रमिकों को प्रतिमाह 3 से 4 हजार रुपये वेतन दिया जा रहा है. ठेका श्रमिकों के पीएफ में भी गड़बड़ी की जा रही है. कई बार धरना प्रदर्शन करने के बावजूद सरकार का हमारी ओर ध्यान नहीं है. उनका कहना है कि भ्रष्टाचार तभी खत्म खत्म होगा, जब ठेका प्रथा समाप्त होगी. ठेका श्रमिकों ने मांगे नहीं मानने पर अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी है.

बता दें कि कर्मचारियों की हड़ताल शुक्रवार से चल रही है, इसमें अस्पताल से लेकर कैस काउंटर, पर्ची काउंटर, वार्ड बॉय, सफाई कर्मी, ट्रॉलीकर्मी, दवा  काउंटर, लेखा शाखा, एक्सरे विभाग, सहित अस्पताल के कई वार्डों में कार्यरत ठेका कर्मचारी शामिल हैं. इस कार्य बहिष्कार से एमबीएस और जेके लोन अस्पताल में मेडिकल सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, इसके बाद भी अस्पताल प्रशासन कर्मचारियों की मांग सुनने के लिए राजी नहीं है.








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