ICMR के पूर्व वैज्ञानिक ने बताया, शरीर के लिए कितना घातक है डेल्टा प्लस; कहा- इसे ‘वेरिएंट ऑफ कंसर्न’ की तरह ही समझें

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नई दिल्ली. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) में महामारी एवं संक्रामक रोग (Epidemiology & Communicable Diseases) के प्रमुख वैज्ञानिक रहे रमण गंगाखेड़कर ने शनिवार को एक वर्चुअल बातचीत में कोरोना वायरस के डेल्टा प्लस को भी ‘चिंता का विषय’ (Variant of Concern) बताया है. उन्होंने कहा, ‘डेल्टा वेरिएंट का संक्रमण बहुत तेजी से फैला है और क्योंकि यह ‘वेरिएंट ऑफ कंसर्न’ है, इसी वजह से डेल्टा प्लस को भी ‘वेरिएंट ऑफ कंसर्न’की तरह ही मानना होगा.’

डेल्टा वेरिएंट को शरीर के लिए बेहत घातक बताते हुए आईसीएमआर के पूर्व वैज्ञानिक ने कहा कि वायरस की आक्रामकता इस बात पर टिकी है कि वह किस अंग पर चोट कर रहा है. उन्होंने कहा, ‘यह इस बात पर निर्भर करता है कि मैं किस अंग के बारे में बात कर रहा हूं, अगल डेल्टा वेरिएंट प्रमुख पैथोफिजियोलॉजिकल परिवर्तन का कारण बन रहा है और विभिन्न अंगों को प्रभावित कर रहा है, तो यह शायद उन विशिष्ट अंगों को अधिक नुकसान पहुंचाएगा जो शरीर के लिए बेहद अहम हैं.’

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रमण गंगाखेड़कर ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए यह भी बताया कि डेल्टा वेरिएंट शरीर की एक कोशिश से दूसरी कोशिश में जा सकता है और इसके नतीजे बेहत घातक हो सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘जब मैं यह कहता हूं कि डेल्टा वेरिएंट एक कोशिश से दूसरी कोशिश में बड़ी आसानी से जा सकता है, तो आखिर शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाने के संदर्भ में इसका क्या मतलब है? अगर यह हमारे दिमाग में चला जाता है, तो क्या होगा? ऐसी स्थिति में यह तंत्रिका संबंधी लक्षणों (Neurological Symptoms) को भी एक सामान्य रूप में जाहिर कर सकता है.’

कोविड-19 का डेल्टा स्वरूप ‘सबसे अधिक संक्रामक’, तेजी से फैल रहा है: डब्ल्यूएचओ

दूसरी ओर, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) प्रमुख टेद्रोस अदहानम गेब्रेयेसस ने आगाह किया कि कम से कम 85 देशों में पाया गया कोविड-19 का डेल्टा स्वरूप अभी तक सामने आए सभी स्वरूपों में ‘सबसे अधिक संक्रामक’ है और यह उन लोगों में तेजी से फैल रहा है जिन्होंने टीका नहीं लगवाया है. डब्ल्यूएचओ महानिदेशक ने शुक्रवार को जिनेवा में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘मैं जानता हूं कि अभी विश्वभर में डेल्टा स्वरूप को लेकर काफी चिंता है और डब्ल्यूएचओ भी इसे लेकर चिंतित है.’





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