COVID-19: कोरोना वैक्‍सीन लगने के बाद अगर परेशानी हुई तो क्या आपको मिलेगा मुआवजा?

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नई दिल्‍ली. देश में इन दिनों कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus) की दूसरी लहर के बाद नए केस में कमी आई है. हालांकि अभी भी कुछ विशेषज्ञ कह रहे हैं कि कोरोना की दूसरी लहर गई नहीं है, लेकिन अब कोरोना केस कम होने का एक कारण बड़े स्‍तर पर टीकाकरण भी है. केंद्र और राज्‍य सरकार बड़ी संख्‍या में टीका लगा रही हैं.

सीरम इंस्‍टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) की कोविशील्‍ड, भारत बायोटेक की कोवैक्सिन और रूस की स्‍पूतनिक वैक्‍सीन का देश में टीकाकरण चल रहा है. इन वैक्‍सीन को सरकार की ओर से हरी झंडी दी गई है. अब तक देश में 32 करोड़ से अधिक डोज लगाई जा चुकी हैं.

इसके साथ ही सीरम इंस्‍टीट्यूट ऑफ इंडिया अब नोवावैक्‍स वैक्‍सीन का उत्‍पादन भी कर रहा है. यह कोवोवैक्‍स का स्‍थानीय संस्‍करण है. इसके तहत एसआईआई के सीईओ अदार पूनावाला ने ट्वीट करके कहा, ‘इस हफ्ते पुणे में स्थित फैसिलिटी में कोवोवैक्‍स के पहले बैच का उत्‍पादन होगा. इसे लेकर हम उत्‍साहित हैं. यह वैक्‍सीन में हमारी 18 साल की उम्र से नीचे की आबादी को सुरक्षित रखने की क्षमता है.

देश में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए अधिक से अधिक लोगों को टीका लगाया जा रहा है. वहीं सवाल यह भी है कि जिन लोगों को कोरोना वैक्‍सीन लगने के बाद परेशानी का सामना करना पड़ेगा तो उन्‍हें मुआवजा कैसे मिलेगा?

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ड्रग्‍स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) की ओर से मंजूर की गई तीनों वैक्‍सीन के निर्माता किसी भी प्रकार का हर्जाना मुहैया नहीं कराते. नियम बताते हैं कि अगर किसी को टेस्‍ट के दौरान चोट लगती है या उसकी मृत्यु हो जाती है, तो टेस्‍ट को करने वाली फर्म ही मुआवजा देंगी. इसका मतलब यह है कि इसकी जिम्‍मेदार कंपनियां नहीं होंगी और उनके उत्पादों की इस्‍तेमाल के बाद अगर मौत होती है या रिएक्‍शन होता है तो इसका मुआवजा देने के लिए वे बाध्‍य नहीं होंगी.

हालांकि व्यावसायिक इस्‍तेमाल के लिए टीकों को मंजूरी मिलने के बाद मुआवजे की मांग करने वाले उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज करा सकते हैं या होईकोर्ट में अपील कर सकते हैं. अगर डीसीजीआई को लगता है कि पंजीकरण सर्टिफिकेट में नियमों का उल्‍लंघन हुआ है तो वो उन फर्म पर भी कार्रवाई कर सकता है.



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