Bihar Elections: एक तरफ बाहुबल तो दूसरी ओर नारी शक्ति, इसलिए हॉटसीट है दानापुर

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दानापुर सीट पर इसबार मुकाबला कड़ा होने वाला है.

Bihar Elections: दानापुर सीट पर महागठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर बाहुबली रीतलाल यादव मैदान में हैं. वहीं एनडीए की प्रत्याशी के रूप में आशा सिन्हा मुकाबले में हैं. बता दें कि आशा सिन्हा के पति की हत्या का आरोप रीतलाल यादव पर लगा था.

पटना. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Elections) में दानापुर हॉटसीट माना जा रहा है. इस बार यहां मुकाबला महागठबंधन के उम्मीदवार बाहुबली रीतलाल यादव (Reetlal Yadav) और एनडीए की उम्मीदवार आशा सिन्हा (Asha Sinha) के बीच है. बता दें कि आशा सिन्हा के पति की हत्या का आरोप रीतलाल यादव पर लगा था. इस बार दोनों के बीच मुकाबला बेहद कड़ा माना जा रहा है. दोनों अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं. लेकिन दिलचस्प बात ये है कि रीतलाल अपने ऊपर लग रहे बाहुबली ठप्पा को सही मान रहे. वहीं दूसरी तरफ आशा सिन्हा कहती हैं कि इस बार दानापुर की जनता सब बाहुबल छुड़ा देगी.

क्या कहना है दोनों उम्मीदवारों का?

दानापुर विधानसभा से महागठबंधन के उम्मीदवार रीतलाल यादव से जब न्यूज-18 की टीम ने बात की और सवाल किया कि लोग आपको बाहुबली क्यों कहते हैं. इस पर रीतलाल यादव ने कहा कि अगर लोग मुझे बाहुबली कहते हैं, तो हां मैं बाहुबली हूं. अगर लोग मुझे रॉबिन हुड कहते हैं तो कहे, मुझे कोई दिक्कत नहीं है. मुझ पर जो भी आरोप लगे हैं उसका मामला अदालत में चल रहा है. मुझे अदालत पर भरोसा है. मुझ पर मेरे विरोधी कुछ भी आरोप लगा ले, लेकिन दानापुर का विकास ही मेरा मुख्य एजेंडा है. और अगर जनता मुझे मौका देती है तो दियारा इलाके का विकास, स्वास्थ्य, सड़क, शिक्षा और लालू यादव का सपना पूरा करूंगा.

वहीं, दूसरी तरफ भाजपा की सीटिंग विधायक आशा सिन्हा का कहना है कि वह रीतलाल के मैदान में उतरने को कोई ख़ास तवज्जो नहीं देती हैं. बाहुबली है तो क्या हुआ, भगवान चार हाथ दिए हुए हैं. गोली किसी को पहचानती नहीं है. कोई बाहुबल नही चलेगा इस बार. दानापुर की जनता अब डर का माहौल फिर से वापस नहीं चाहती है. जिसने मेरे पति की हत्या की उसे जनता सजा देगी.बेल पर जेल से बाहर है रीतलाल यादव

दानापुर विधानसभा सीट के दोनों उम्मीदवार की बातों को सुन आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि इस बार दानापुर क्यों हॉट सीट बना हुआ है. दबंग रीतलाल यादव पर कई मामले चल रहे हैं जिसमें सबसे गम्भीर आरोप लगा है भाजपा उम्मीदवार आशा सिन्हा के पति की हत्या का, जिसका मामला अभी भी चल रहा है. इसके अलावे मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी चल रहा है. लेकिन फ़िलहाल रीतलाल यादव बेल पर है और चुनाव लड़ रहे हैं. वही दूसरी तरफ़ भाजपा उम्मीदवार आशा सिन्हा अपने पति की हत्या के बाद राजनीति की बागडोर सम्भाल रही हैं और तीन बार से दानापुर का प्रतिनिधित्व कर रही हैं. लेकिन इस बार मुकाबला कड़ा बताया जा रहा है. दोनों नेता अपने-अपने समीकरण के लिहाज़ से चुनाव प्रचार कर रहे हैं.

दोनों उम्मीदवार यादव जाति से हैं, लेकिन दोनों के प्रचार का रंग अलग दिख रहा है. एक तरफ आशा सिन्हा भाजपा के हिंदुत्व वोट पर नज़रें टिका कर मंदिर से आशीर्वाद लेकर जनता के बीच शांति से चुनाव प्रचार कर रही हैं, तो वहीं दूसरी तरफ रीतलाल यादव माय समीकरण पर नजर गड़ा जनता से वोट मांग रहे हैं. एक को महागठबंधन के समीकरण पर भरोसा है तो दूसरे को एनडीए के समीकरण पर. दानापुर यादव और मुस्लिम बाहुल्य इलाका है. और यह पटना जिला का हिस्सा है.





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