Bhojpuri में पढ़ीं, बंगाल में खजूर से आखिर कइसे बनेला गुर

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खजूर के गुर के सवाद के कौनो तुलना नइखे. एह गुर के रसगुल्ला, संदेश आ तरह- तरह के मिठाई बनेली सन. एइजा सवाद के उच्चता के वर्णन कइल मुश्किल बा. खाली अतने लिखल जा सकेला कि एह गुर के मिठाई खइला पर रउरा आनंद में डूबि जाइब. बाकिर ई गुर साल में खाली तीन महीना मिलेला आ ऊहो जाड़ा का दिन में. खजूर ताड़ प्रजाति के एगो पेड़/फेड़ ह जौना में कौनो डाल भा शाखा ना होला. आ सुरुकिए चलि जाला आ तना का सबसे ऊपरी भाग पर पतई आ फल होला. संस्कृत में एकर नांव ह खर्जुरम्, वैज्ञानिक नांव ह- (फीनिक्स डेक्टाइलेफेरा) अंग्रेजी नांव ह- डेट्स. खजूर के पेड़ औसतन 15 से 25 फीट तक बढ़ि सकेला. कहीं- कहीं एकरा से लमहर पेड़ भी मिल जाला. रउरा जानते होखब कि एकर तना शाखाविहीन कठोर, गोलाकार आ खुरदरा होला. एकर उपज रेगीस्तान में, कम पानी आ गर्म मौसम के जगह पर होला. नारियल नियर एकर पेड़ के ऊपरी भाग में पतई के नीचे, झोंप में खजूर फरेला. बंगालो में खजूर के पेड़ बहुतायत में बाड़न स. आयुर्वेद कहेला कि खजूर मधुर,पौष्टिक,बलवर्धक,श्रमहारक, संतोष देबे वाला, पित्तनाशक, वीर्यवर्धक आ शीतल गुण वाला फल ह. खजूर में विटामिन, प्रोटीन, रेशा, कार्बोहाइड्रेट आ शर्करा रहेला, एही से एकरा के बहुत विद्वान पूर्ण आहार कहेला लोग. उपवास/उपास आ परब- तिवहार में शरीर के पुष्ट राखे खातिर एकरा के खाइल जाला. ताजा खजूर के ढेर लोग रायता बनावेला बाकिर आज रायता ना गुर बनावे के विधि पर चर्चा होई . खजूर के चटनियो बनेला. केक आ पुडिंग में खजूर जान डाल देला . खजूर के पतई से घर के छप्पर, झाडू, ब्रश वगैरह बनेला. एकर तना इमारतन के आधार के तौर पर इस्तेमाल कइल जाला. खजूर के रेशा से रस्सी बनावल जाला. अनेक ग्रंथन में एकरा के दवाई कहल गइल बा आ रक्तक्षय, खून के कमी, गठिया, औरत लोगन के पैर दर्द, कमर दर्द आ सबका कब्ज, पाचन विकार, अल्सर, एसिडिटी वगैरह खातिर कारगर कहल बा. खजूर के धातु वर्धक आ कफ नाशक कहल गइल बा. ढेर लोग ना जाने कि खजूर के गुर केतरे बनेला. त आईं ई रहस्य जानल जाउ. त राउर पहिला सवाल हो सकेला कि खजूर के रस काहां से आवेला? जेनुइन सवाल बा. हम बंगाल में रहेनी त ओहिजा जेतरे गुर बनेला, रउरा के बता रहल बानी. त सरकार, खजूर के तना में रस रहेला. ओकरा में छेद कके एगो काठ के नरी फिट क दिहल जाला आ नरी के बाहरी मुंह का लगे एगो मेटा (गगरी के बहुते छोट रूप) लगा दिहल जाला. ओही मेटा में कुल रस आके गिरत रहेला. त मान लीं कि रउरा खजूर के पेड़ में आजु सबेरे मेटा लगा के आ गइनीं त अगिला दिन भोर में तीन बजे ले मेटा भरि जाई. ओकरा के अधिकतर लोग भोरे में उतार लेला. एही तरे कई गो पेड़ पर कई गो मेटा उतारि के आ एगो बड़का कराही भा कराह में डाल दिहल जाला आ चूल्हा पर तीन घंटा रस पकावल जाला. जब रस पाकेला त उबले लागेला. तीन घंटा का बाद ऊ रस लिक्विड (द्रव) गुर में बदल जाला. अब देखीं एगो अउरी रोचक क्रिया एकरा बाद होला. कराह का लगहीं जमीन पर बालू बिछावल रहेला. बालू पर एगो महीन कपड़ा बिछाके ओकरा में तनी- तनी दूरी पर छोट कटोरी के साइज के छोटे- छोटे गड़हा क दिहल जाला. ओही गड़हन में लिक्विड गुर के डाल दियाला. आधा घंटा का बाद ऊ लिक्विड गुर सूखि के ठोस छोट कटोरी के साइज के हो जाई. अब ई बाजार में जाए लायक तेयार हो जाला. अब आईं एगो अउरी सवाल पर. ढेर लोग पूछेला कि एक दिन में ज्यादा से ज्यादा क गो खजूर के फल खाए के चाहीं. त सरकार, एक दिन में पांचि गो से अधिका खजूर खाइब त नोकसान करी. एही से बड़- बुजुरुग कहले बा लोग कि रात खान दूध का संगे तीन गो खजूर खाईं त कब्ज के बेमारी खतम हो जाई आ पाचन शक्ति बढ़ि जाई. जेकरा वजन बढ़ावे के रहेला ऊ दूध का संगे छोहारा खाला. बाकिर आजकाल त लोग वजन घटावे के फेर में ढेर रहतारे. तबो दूबर- पातर लोगन खातिर छोहारा आ खजूर ढेर फायदा करी. जानकार लोग कहले बा कि खजूर में विटामिन ए आ बी भरपूर मात्रा में मिलेला. ग्लूकोज आ फ्रुक्टोज एकरा में भरल रहेला. ताजा पाकल खजूर बड़ा स्वादिष्ट होला. बाकिर ई तीन महीना से बेसी ना टिके. त एकरा खातिर एकरा के धूप में सुखा दिहल जाला. विकसित टेक्नालाजी के सुविधा आ गइला के वजह से अब त मशीनो में सुखावल जाता. सुखा के आ फेर एकरा के एकरे गुर के चाशनी से मिठास के टच दे दिहल जाला. त बाजार में जौन गुर मिलेला ओकरा में ऊपर से मिठास डालल रहेला. बाकिर तबो एक हद तक फायदा करबे करेला. लोग व्रत- उपवास में एकर खूब सेवन करेला. मध्य पूर्व एशिया आ उत्तरी अफ्रीका आ रेगिस्तानी इलाकन के ई मुख्य खाद्य पदार्थ ह.दुनिया में सबसे ढेर पौष्टिक फल में खजूरो आवेला. बाकिर जेकरा हाई सुगर के बेमारी बा, इंसुलीन लेता ऊ बाजार के खजूर से परहेज करेला. तबो कलकत्ता के बाजार में खजूर के फल के बिक्री खूब होला. खजूर के खेती हमनी का देश में पंजाब, हरियाणा, गुजरात, राजस्थान- चुरू, बीकानेर, बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, श्रीगंगानगर वगैरह जिलन में प्राचीन काल से होत आइल बा. बड़- बुजुरुग लोग कहेला कि सबेरे- सबेरे खाली पेट खजूर खइला के फायदा बहुत होला. ताकत त बढ़बे करेला, भरपूर प्रोटीन, विटामिन आ मिनरल मिलेला. पुरान बैद जी लोग कहत रहल ह कि खजूर के बीया (बीज) के पेस्ट बना के ओकरा के पान का पतई संगे खइला पर मलेरिया नियर बेमारी ठीक हो जाई. बाकिर बैद जी लोग खजूर के बीया का संगे एगो चूर्ण भी देत रहल ह लोग. अब त मलेरिया के एक से एक दवाई आ गइल बाड़ी सन. पुरान बैद जी लोग फेड़े- रूख से दवाई बना लेत रहल ह. आज भी कई इलाकन में ई धारणा प्रचलित बा कि हाई ब्लड प्रेसर में दवाई भले खाईं बाकिर दू गो खजूर खा लेब त दवाई के असर बढ़ि जाई. (लेखक विनय बिहारी सिंह वरिष्ठ स्तंभकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)



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