4 हजार से ज्यादा घरों में पानी संकट: ट्यूबवेल चलाने वाले 10 ठेकेदारों का निगम पर 6 करोड़ बकाया, इसलिए हड़ताल पर गए; सैनिक कॉलोनी और अरावली विहार के लोग बूंद-बूद को तरसे

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फरीदाबाद3 घंटे पहले

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सैनिक कॉलोनी और अरावली विहार की आक्रोशित महिलाएं।

नगर निगम के 1600 ट्यूबवेलों को संभालने वाले ठेकेदारों के हड़ताल पर जाने का असर दिखाई देने लगा है। बुधवार को सैनिक कॉलोनी और अरावली विहार में लोगों को पानी नहीं मिला। इससे नाराज लोगों ने प्रदर्शन किया और निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। लोगों का आरोप है कि सैनिक कॉलोनी और अरावली विहार के कई इलाको में ट्यूबवेल खराब हो चुके हैं। इन्हें ठीक करने वाला कोई नहीं है। ददसिया रेनीवेल से आने वाला पानी भी पर्याप्त मात्रा में नहीं आ रहा है, जिससे बूस्टर खाली रहते हैं। लोगों को पानी नहीं मिलता। लोगों को प्राइवेट टैंकरों से पानी मंगाकर काम चलाना पड़ रहा है। नगर निगम की तरफ से पानी उपलब्ध कराने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।

ठेकेदारों के कंधे पर जिम्मेदारी

नगर निगम ने शहर के करीब 1600 ट्यूबवेल को ठेके पर दे रखा है। ट्यूबवेल के मेंटीनेंस की जिम्मेदारी ठेकेदारों की है। 10 ठेकेदार 1600 ट्यूबवेल की देखभाल कर रहे हैं। बताया जाता है कि छह महीने से उन्हें बकाया नहीं मिला है। 10 ठेकेदारों का करीब 6 करोड़ रुपए निगम पर बकाया है। अब उनके पास पैसे नहीं हैं, जिससे वह टयूबवेल चला सकें।

रोज 80 एमएलडी उपलब्ध होता है

शहरी क्षेत्र में करीब 20 लाख की आबादी वाले इस शहर में रोज करीब 300 एमएलडी पानी की जरूरत है। निगम महज 240 एमएलडी पानी ही उपलब्ध करा पा रहा है। बाकी 60 एमएलडी पानी सप्लाई टैंकरोंं से हो रही है। इस 240 एमएलडी पानी में 80 एमएलडी पानी ट्यूबवेल से आता है। चूंकि ठेकेदार हड़ताल पर हैं तो शहर में पानी का संकट गहराना लाजिमी है। आने वाले दिनों में और भी संकट पैदा हो सकता है।

पानी के लिए उतरना पड़ा सड़कों पर

ठेकेदारों की हड़ताल का असर बुधवार को दिखाई दिया। सैनिक कॉलोनी और अरावली विहार में पानी का संकट पैदा हो गया। यहां करीब चार हजार मकान बने हैं। समस्या से नाराज लोग सड़क पर उतर आए और निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। स्थानीय निगम पार्षद राकेश भड़ाना का कहना है कि सैनिक कॉलोनी के जे ब्लॉक, एच ब्लॉक और सी ब्लॉक में लगे हुए कई ट्यूबवेल काफी समय से खराब पड़े हैं। उसे ठीक कराने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा। दूसरी तरफ रेनीवेल का पानी बूस्टर तक आ नहीं रहा। आखिर पब्लिक जाए कहां।

800 रुपये प्रति टैंकर मंगाना पड़ रहा पानी

स्थानीय रोहित, अल्पना, किरन, धर्मपाल कालड़ा आदि का कहना है कि उन्हें काफी समय से पानी किल्लत से जूझना पड़ रहा है। टैक्स देने के बाद भी निगम पानी तक उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। लोगों को मजबूरी में प्राइवेट टैंकरों से 800 रुपये में पानी मंगाना पड़ा रहा है। लोगों का कहना है कि प्राइवेट टैंकर वाले पैसे लेकर पानी उपलब्ध करा रहे हैं तो निगम क्यों नहीं अपने सिस्टम से पानी दे पाता। पब्लिक कब तक पानी के लिए संघर्ष करती रहेगी। उधर चीफ इंजीनियर रामजीलाल का कहना है कि हड़ताल खत्म कराने का प्रयास किया जा रहा है।

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