हिमाचल में महंगाई की मार: 6 माह में पेट्रोल 9.32 रुपये और डीजल के दाम 10.31 रुपये बढ़े

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हिमाचल में पेट्रोल के दाम.

Petrol-Diesel Price in Himachal: कोरोना दौर के इन 6 महीनों को देखें तो साफ नजर आ रहा है कि किस तरह से एक सुनियोजित तरीके से पेट्रोल-डीजल की कीमतों को बढ़ाया गया.

शिमला. कोरोना संकट (Corona Virus) के बीच जनता को उम्मीद थी कि महंगाई को लेकर सरकार की ओर से राहत मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. महंगाई का मीटर लगातार दौड़ता जा रहा है और उसमें आग लगाने का काम किया है पेट्रोल और डीजल की कीमतों (Rates) ने. पेट्रोल-डीजल (Petrol Diesel) के दाम दिन प्रतिदिन इतिहास बनाते जा रहे हैं. अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी के बावजूद प्रदेश में बीते 6 महीनों के भीतर पेट्रोल की कीमतों में 9 रुपये 32 पैसे और डीजल के दामों में 10 रुपये 31 पैसे प्रति लीटर (Litre) की बढ़ौतरी हुई.

इस तरह बढ़े दाम
1 अप्रैल 2020 को शिमला में पेट्रोल की कीमत 70 रुपये 91 पैसे और डीजल के दाम 62 रुपये 47 पैसे प्रति लीटर थे. 1 मई को कोई बदलाव नहीं हुआ तो 1 जून को पेट्रोल के दाम 71 रुपये 91 पैसे और डीजल की कीमत 63 रुपये 47 पैसे तक पहुंच गई. 1 जुलाई को एकाएक पेट्रोल के दाम 79 रुपये 02 पैसे और डीजल की कीमत 72 रुपये 12 पैसे तक पहुंच गई. मौजूदा समय में शिमला में पेट्रोल की कीमत है 80 रुपये 23 पैसे और डीजल के दाम 73 रुपये 32 पैसे प्रति लीटर पहुंच गए हैं.

बस ऑपरेटरों की बढ़ी मुश्किलेंशिमला में प्राइवेट बस चलाने वाले सुभाष शर्मा का कहना है कि कोरोना के इस दौर में सरकार से राहत की उम्मीद थी, लेकिन सरकार की ओर से एक रुपये की भी मदद नहीं की गई. सुभाष के पास तीन बसें थी, जिनमें 2 बसें 6 महीने से खड़ी हैं. एक बस चल रही है, लेकिन सवारियां कम होने की वजह से खर्चा ज्यादा हो रहा है और कमाई कम. सरकार ने बस किराये में बढ़ौतरी कर दी. उसके चलते भी कम लोग बसों में सफर कर रहे हैं. 6 महीने पहले एक दिन में 3 हजार से 3500 रुपये का डीजल एक बस में लगता था, लेकिन दाम बढ़ने से अब 4500 से 5 हजार रुपये लग जाते हैं. स्टाफ को घर भेज दिया है. बस कंडक्टर कहीं पर दिहाड़ी-मजदूरी कर गुजारा कर रहे हैं. बस ऑपरेटरों की मदद करने के लिए अधिकारियों से लेकर सीएम तक मुलाकात की, लेकिन कोई राहत नहीं मिली. यही हाल माल ढोने वाली गाड़ी चलाने वाले प्रकाश कुमार का है.

पेट्रोल पंप मालिकों की हालत भी पतली
पेट्रोल पंप मालिकों की हालत भी खराब है. पेट्रोल-डीजल की मांग कम हो गई है और कीमतों में लगातार हो रही बढ़ौतरी से बिक्री और कम हो गई है. बैरियर के पास स्थित पेट्रोल पंप के मैनेजर देवेंद्र कुमार ने बताया कि कोरोना के बीच में एक समय सेल 70 से 80 फीसदी तक गिर गई थी. अब डीजल की बिक्री 60 फीसदी और पेट्रोल की बिक्री में 30 फीसदी तक की गिरावट है. 6 महीने पहले एक दिन में 18 लाख रुपये तक की सेल हो जाती थी लेकिन अब बमुश्किल 13 लाख रूपए तक की सेल हो पाती है.

कम आमदनी कम हुई और महंगाई बढ़ी
कोरोना दौर के इन 6 महीनों को देखें तो साफ नजर आ रहा है कि किस तरह से एक सुनियोजित तरीके से पेट्रोल-डीजल की कीमतों को बढ़ाया गया. जैसे-जैसे लॉकडाउन से अनलॉक करने की प्रकिया शुरू की गई और जनता को छूट मिलनी शुरू हई. आना-जाना आसान होता गया, वैसे ही कीमतों को एकदम बढ़ा दिया गया. पेट्रोल-डीजल की कीमतों के बढ़ने का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है, महंगाई बढ़ गई है. एक तरफ रोजगार कम हुए, लोगों की नौकरियां चली गईं, आमदनी कम हो गई, वहीं दूसरी तरफ लोगों को राहत देने के बजाए महंगाई का हथौड़ा चला दिया.





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