स्वास्थ्य मंत्री की आवभगत में लगा रहा NMCH प्रशासन और मरीज ने एम्बुलेंस में ही तोड़ दिया दम, अब आई सफाई

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पटना के एनएमसीएच में कोरोना पीड़ित ने एंबुलेंस में ही तोड़ा दम

Covid 19: कोरोना पीड़ित रिटायर जवान की मौत के बाद एनएमसीएच प्रशासन पर लगे आरोप को अधीक्षक डॉ विनोद सिंह ने साफ तौर से गलत बताया और कहा कि अस्पताल आने से पहले ही मरीज की मृत्यु हो चुकी थी.

पटना. कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच आम मरीजों के इलाज के इंतजाम के लिए सरकार तमाम दावे कर रही है. लेकिन जमीन पर भी दावों के अनुरूप ही हालात हों, ऐसी हकीकत नहीं है.पटना के एनएमसीएच में एक ऐसी ही हृदय विदारक घटना सामने आई जिसमें भर्ती करने में हुई लापरवाही के कारण एक साठ साल के बुजुर्ग की जान अस्पताल के बाहर एंबुलेंस में ही चली गई. कोरोना पीड़ित लखीसराय निवासी 60 वर्षीय रिटायर्ड फौजी विनोद कुमार सिंह की मौत के बाद परिजनों ने आरोप लगाया कि एनएमसीएच के कोविड वार्ड परिसर के बाहर खड़ी एम्बुलेंस में ही इलाज के इंतजार में दम तोड़ दिया. परिजनों का कहना है कि चूंकि अस्पताल में मंत्री जी थे इसलिए उनके मरीज को भर्ती लेने से इनकार कर दिया गया था.

मृतक के बेटा अभिमन्यु के अनुसार वह अपने पिता को गंभीर स्थिति में लखीसराय से एम्बुलेंस में लेकर सोमवार की शाम पटना एम्स पहुंचा था, जहां डॉक्टरों ने भर्ती लेने से इंकार कर दिया. स्थिति बिगड़ती देख एक निजी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने गंभीर स्थिति का हवाला देते हुए एनएमसीएच ले जाने की सलाह दी. मंगलवार की सुबह वह एनएमसीएच पहुंचा, परंतु यहां कर्मियों ने यह कहते हुए भर्ती करने से इनकार कर दिया कि अभी स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय यहां आने वाले हैं. उनके जाने के बाद ही मरीज को भर्ती लिया जाएगा

मृतक के परिजनों के अनुसार इस दौरान उन्होंने कर्मियों से कम से कम बरामदे में ही अपने पिता को रखने की बात कही ,लेकिन स्वास्थ्य कर्मियों ने मना कर दिया. इसके बाद उनके पिता ने एम्बुलेंस में ही दम तोड़ दिया. हालांकि जब इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय से एनएमसीएच की लापरवाही की ओर ध्यान दिलाया तो वे अस्पताल में अच्छी स्वास्थ्य सुविधा का हवाला देते हुए चुप हो गए और इस लापरवाही पर कोई बात नहीं कही.

हालांकि कोरोना पीड़ित रिटायर जवान की मौत के बाद एनएमसीएच पर लगे आरोप को अधीक्षक डॉ विनोद सिंह ने साफ तौर से गलत बताया और कहा कि अस्पताल आने से पहले ही मरीज की मृत्यु हो चुकी थी. अधीक्षक ने वीआईपी कल्चर और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के स्वागत में लगे रहने के आरोप से भी इंकार किया. उन्होंने कहा मंत्री के साथ मात्र 3 अधिकारी थे और मंत्री जी अस्पताल की व्यवस्था देखने आए थे इसीलिये ऐसा आरोप लगाना कहीं से सही नहीं है. यहां सभी को भर्ती लिया जाता है.







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