सोने को बैंक में जमा करवाकर आप भी कर सकते हैं कमाई, SBI की रिवैम्प्ड गोल्ड डिपॉजिट स्कीम में करें निवेश

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नई दिल्ली12 घंटे पहले

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इस स्कीम के तहत डिपॉजिट किए गए सोने पर आपको प्रॉपर्टी टैक्स भी नहीं देना होता

  • इसमें निवेश करने पर आपको 2.50 फीसदी सालाना ब्याज तक दिया जाता है
  • स्कीम के तहत ग्राहक को कम से कम 30 ग्राम गोल्ड जमा करना होता है

कई लोगों के पास बहुत सारा सोना होता है इस सोने को सुरक्षित रखने के लिए लोग बैंक में लॉकर लेते हैं। इससे आपका अतिरिक्त खर्च होता है। लेकिन मान लीजिए घर में रखे सोने पर अगर ब्याज मिले तो कैसा रहेगा। गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम की खास बात यही है। इसके तहत सोने को बैंक में जमा करवाकर आप लॉकर के खर्च से बचने के साथ ही पैसा भी कमा सकते हैं। इस योजना के तहत देश का सबसे बड़ा बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) रिवैम्प्ड गोल्ड डिपॉजिट स्कीम चलाता है। आज हम आपको इस स्कीम के बारे में बता रहे हैं।

इसमें होती हैं 3 कैटेगिरी
इस स्कीम के तहत एसबीआई ने 3 कैटेगरी बनाई हैं। पहली कैटेगरी में 1-3 साल के लिए सोना जमा किया जाता है। इसे शॉर्ट टर्म बैंक डिपॉजिट (STBD) कहा जाता हैं। दूसरी कैटेगरी को मीडियम टर्म गवर्नमेंट डिपॉजिट (MTGD) कहा जाता है, जिसका मैच्योरिटी पीरियड 5-7 है। वहीं लॉन्ग टर्म गवर्नमेंट डिपॉजिट (LTGD) कैटेगरी के तहत 12-15 साल के लिए गोल्ड फिक्स्ड किया जा सकता है।

अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं
रिवैम्प्ड गोल्ड डिपॉजिट स्कीम के तहत ग्राहक को कम से कम 30 ग्राम गोल्ड जमा करना होता है। हालांकि, सोना जमा करने की कोई अधिकतम सीमा नहीं तय की गई है। मतलब आप कितना भी गोल्ड जमा करके उस पर ब्याज पा सकते हैं। इस स्कीम के तहत इसमें 995 शुद्धता वाला सोना बैंक में रखा जाता है।

सोने में भी ले सकते हैं ब्याज
एफडी की मैच्योरिटी पीरियड खत्म होने के बाद ग्राहक के पास ब्याज सहित अपने सोने को लेने के दो ऑप्शन मिलते हैं। या तो वह उसे सोने के रूप में वापस ले सकता है या फिर सोने की तत्कालिक कीमत के बराबर कैश ले सकता है। हालांकि, सोने के रूप में वापस लेने पर 0.20 फीसदी की दर से एडमिनिस्ट्रेटिव चार्ज उससे वसूला जाएगा।

रहता है लॉक-इन पीरियड
STBD कैटेगरी के तहत एक साल का लॉक-इन पीरियड होता है। इस समयावधि के बाद तय समय से पहले पैसा निकालने पर ब्याज दर में पेनाल्टी लगाई जाएगी। वहीं, MTGD कैटेगरी के तहत निवेशक 3 साल के बाद कभी भी स्कीम से बाहर हो सकते हैं। हालांकि, मैच्योरिटी पीरियड से पहले स्कीम ब्रेक करने पर ब्याज दर में पेनाल्टी लगाई जाएगी। इसके अलावा LTGD कैटेगरी के तहत 5 साल के बाद गोल्ड निकला जा सकता हैं। इसमें भी ब्याज दर पर पेनाल्टी लगाई जाएगी।

मिलता है टैक्स छूट का लाभ
इस स्कीम के तहत डिपॉजिट किए गए सोने पर आपको संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स) भी नहीं देना होता। वहीं, जरूरत पड़ने पर इस एफडी के आधार पर लोन भी लिया जा सकता है।

कौन कर सकता है निवेश?
भारतीय इंडिविजुअल, प्रोपराइटरशिप और पार्टनरशिप फर्म, हिन्दू अविभाजित परिवार (एचयूएफ), सेबी के साथ रजिस्टर्ड म्यूचुअल फंड / एक्सचेंज ट्रेडेड फंड जैसे ट्रस्ट और कंपनियां इस स्कीम के तहत निवेश कर सकती हैं।इस स्कीम के तहत फिलहाल स्टेट बैंक की कुछ चुनिंदा शाखाओं में ही सोने की फिक्स्ड डिपॉजिट की जा सकती है।

2015 में शुरू हुई थी ये योजना
सरकार ने 2015 में यह स्कीम शुरू की थी। इसका मकसद घरों और संस्थानों में रखे सोने को बाहर लाना और उसका बेहतर उपयोग करना है। गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के तहत आप भी जिस भी बैंक में आप यह जमा करेंगे, बैंक उस पर आपको एक तय दर पर ब्याज देगा।

इस योजना के तहत पिछले वित्त वर्ष में जुटाए
SBI ने इस स्कीम के जरिए मार्च 2020 तक 13,212 किलोग्राम पारिवारिक और संस्थागत गोल्ड जुटाया था। रिपोर्ट के मुताबिक कारोबारी साल 2019-20 में देश के सबसे बड़े बैंक ने 3,973 किलोग्राम गोल्ड जुटाया है।



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