सेव दी सेवियर: चंडीगढ़ के आईएमए सदस्यों ने डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा के लिए देशव्यापी विरोध में हिस्सा लिया और कहा-कोई प्रभावी कानून बनाया जाए

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चंडीगढ़19 मिनट पहले

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शहर में आज डॉक्टरों ने उपद्रव करने वालों के खिलाफ कड़ा कानून बनाने की मांग की।

  • डॉक्टरों ने कहा कि अगर इसी तरह हमले जारी रहे तो आगे कोई युवा डॉक्टर बनने के लिए आगे नहीं आएगा

शहर के डॉक्टरों की ओर से आज सेक्टर-35 आईएमए भवन के सामने डॉक्टरों पर हो रहे हमलों के विरोध में प्रदर्शन किया गया। इसमें महिला डॉक्टरों ने भी हिस्सा लिया, विरोध दर्ज करते डॉक्टरों ने अपने हाथों में बैनर लिए हुए थे जिस पर उन पर हमले करने वालों के खिलाफ कड़ा कानून बनाने के लिए लिखा हुआ था। डॉक्टरों पर मरीजों और उनके रिश्तेदारों द्वारा शारीरिक, मानसिक और मनो-वैज्ञानिक हमले तेजी से हो रहे हैं जिससे उनमें अत्यधिक तनाव पैदा हो रहा है। हिंसा के डर से युवा डॉक्टर आपात स्थिति और गंभीर रोगियों का इलाज करने से हिचक रहे हैं।

शहर के डॉक्टरों ने हाथ में बैनर लेकर विरोध जताया

शहर के डॉक्टरों ने हाथ में बैनर लेकर विरोध जताया

डॉक्टरों ने कोरोना संक्रमण की दूसरा लहर में देश में मारे गए 700 डॉक्टरों को श्रद्धांजलि दी गई और कहा गया कि संक्रमण में जिस तरह से इन डॉक्टरों ने काम किया वह काबिले तारीफ है।

विरोध करने वाले डॉक्टरों ने रामदेव के बयानों की निंदा की और कहा कि देश महामारी के दौर में गुजर रहा है और ऐसे में लोगों को गुमराह करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। डॉक्टरों का कहना था कि रामदेव की ओर से जिस तरह से मेडिकल साइंस के प्रति बयानबाजी की गई है वह गलत है।

शहर के आईएमए प्रेसिडेंट डॉ. वी. कप्पल ने कहा कि हमने माननीय प्रधानमंत्री को एक मेमोरेंडम भेजा है, जिसमें डॉक्टरों पर हो रही हिंसा को रोकने के लिए कड़े कानून बनाने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि जब डॉक्टर इलाज करता है तो वह अपनी तरफ से मरीज को ठीक करने की भरपूर कोशिश करता है।

आईएमए के सेक्रेटरी डॉ. नितिन माथुर ने कहा कि उपद्रवियों को रोकने के लिए गैर जमानती कानून बनाया जाए। कथित लापरवाही से निपटने के लिए पर्याप्त कानून हैं, हिंसा कोई समाधान नहीं है। पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. आर.एस. बेदी ने कहा कि भारत में डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं दुनियां में सबसे ज्यादा होती हैं।

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