सेमिनार में डाॅक्टर्स ने किया सचेत: डेल्टा प्लस वायरस का खतरा हार्ट के मरीजों पर अधिक हो सकता है, इसलिए ऐसे मरीजों को अलर्ट रहने की जरूरत

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फरीदाबाद6 घंटे पहले

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फरीदाबाद। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज जैन ने कहा कि हार्ट को काम करने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है।

डेल्टा प्लस वायरस का खतरा हार्ट के मरीजों पर अधिक हो सकता है। इसलिए हार्ट के मरीजों को अलर्ट रहना चाहिए। विशेषज्ञ व वैज्ञानिक पहले ही कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के साथ इससे होने वाले नुकसान के बारे में साफ कर चुके हैं। यह लहर पहले से कहीं अधिक संक्रामक और घातक होगी। कोरोना की पहली व दूसरी लहर में पहले से ही दूसरी बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। इनमें डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, लिवर, किडनी व हार्ट के मरीज शामिल रहे हैं। ऐसे में डॉक्टरों ने लोगों को अलर्ट रहने की सलाह दी है। मेट्रो अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ एवं मेडिकल डायरेक्टर डॉ. नीरज जैन ने शुक्रवार को आयोजित जागरुकता सेमिनार में कहा कि हार्ट को काम करने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। ऑक्सीजन युक्त खून को शरीर के दूसरे अंगों में पहुंचाने में हार्ट की भूमिका होती है। यह ऑक्सीजन हार्ट को लंग्स यानी फेफड़ों से ही मिलता है। कोरोना वायरस का संक्रमण सीधे फेफड़ों पर असर करता है। कई मरीजों में ऑक्सीजन लेवल कम होने लगता है।

ऑक्सीजन की कमी कुछ मरीजों में दिल पर भी असर कर सकती है। ऐसा होने पर दिल की मांसपेशियों को ऑक्सीजन युक्त खून पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। जिसका सीधा असर हार्ट के टिश्यू पर पड़ता है। इसके जवाब में शरीर में इंफ्लेमेशन पैदा होती है, लेकिन कभी-कभी ज्यादा इंफ्लेमेशन की वजह से हार्ट मसल पर बुरा असर पड़ता है। हार्ट बीट तेज हो सकती है। इससे हार्ट के खून पंप करने की क्षमता कम हो सकती है। जिन्हें ऐसी कोई बीमारी पहले से है, उनमें दिक्कत बढ़ सकती है।

ब्लड प्रेशर के मरीज, शुगर और ज्यादा मोटे लोगों में कोरोना बीमारी के दौरान दिल की बीमारी का रिस्क ज्यादा होता है। कई मरीज को हार्ट संबंधी दिक्कतों के बारे में अस्पताल में रहते हुए पता चल जाता है। कई को अस्पताल से घर लौटने के तुरंत बाद और कई में एक से तीन महीने या उसके बाद देखने को मिल सकता है। जितना सीवियर कोरोना का मरीज होता है, हार्ट पर असर की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है।

वैरिएंट के संक्रमण से बचाव को बरतें सावधानी

कोरोना वायरस के किसी वैरिएंट के संक्रमण से बचाव के लिए मास्क का प्रयोग करना, भीड़भाड़ वाली जगह जाने से बचना व वैक्सीनेशन के जरिए इम्यूनिटी हासिल करना जरूरी है। इससे वायरस के संक्रमण की आशंका बहुत कम हो जाएगी। वायरस मुख्य रूप से नाक, मुंह और आंखों के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं। यदि वायरस के संक्रमण के लिए जगह नहीं मिलेगी तो वह धीरे-धीरे निष्क्रिय हो जाएगा। ऐसे में अधिक से अधिक वैक्सीनेशन और कोविड गाइड लाइंस के अनुरूप व्यवहार से ही संक्रमण से बचा जा सकता।

कोरोना का हार्ट पर असर हुआ या नहीं कैसे पता लगाएं

सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द की शिकायत, अचानक से दिल की धड़कन रह-रहकर तेज होना, बैठे हुए या फिर 40 से 50 कदम चलने पर भी सांस फूल जाना, धड़कन बहुत तेज यानि सामान्य 70-90 से बढ़कर 115 से ऊपर होना, पल्स बीच-बीच में छूटने का अहसास होना, चक्कर या बेहोशी आए, पैर सुन्न होना, बार-बार आंखों के सामने अंधेरा आ जाना।
इससे बचाव के लिए हमें क्या करना चाहिए:
अपनी दिनचर्या को बदलें। सुबह और शाम टहलने के लिए निकलें। यदि सर्दी, बुखार या खांसी जैसे लक्षण दिखें तो डॉक्टर को दिखलाए। फाइबर एवं प्रोटीन युक्त भोजन करें। पानी ज्यादा से ज्यादा पिए। फल एवं सब्जियों का सेवन करें।

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