सेबी की बड़ी कार्रवाई: केयर्न इंडिया पर 5.25 करोड़ का जुर्माना, 3 लोगों पर 45 लाख की पेनाल्टी

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मुंबई20 मिनट पहले

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सेबी ने जांच में पाया कि कंपनी ने जो भी काम किया उससे निवेशकों का घाटा हुआ। इस वजह से बुधवार को इस संबंध में सेबी ने ऑर्डर जारी कर दिया और पेनाल्टी लगा दी

  • केयर्न इंडिया ने 2014 में बायबैक ऑफर लाया था
  • इस ऑफर में केयर्न ने जरूरी नियमों का पालन नहीं किया

शेयर बाजार रेगुलेटर सेबी ने केयर्न इंडिया पर 5.25 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। इसी मामले में 3 और लोगों पर 45 लाख रुपए की पेनाल्टी लगाई है। इसमें पी एलांगो, अमन मेहता और नीरज शर्मा पर 15-15 लाख रुपए की पेनाल्टी लगी है। केयर्न इंडिया का बाद में वेदांता में विलय हो गया था।

41 पेज के ऑर्डर में दी जानकारी

सेबी ने इस संबंध में बुधवार को 41 पेज का ऑर्डर जारी किया। सेबी के मुताबिक, केयर्न ने 14 जनवरी 2014 को 17.08 करोड़ शेयरों के बायबैक की घोषणा की। यह अधिकतम 335 रुपए के मूल्य पर किया गया था। इसकी कुल रकम 5,725 करोड़ रुपए थी। बायबैक ऑफर 23 जनवरी 2014 को खुला था और 22 जुलाई 2014 को बंद हुआ था। केयर्न ने इस मामले में 30 जून 2014 को एक लेटर सबमिट किया और कहा कि 27 जून 2014 तक कुल 3.67 करोड़ शेयरों का बायबैक हुआ। यह कुल बायबैक की तुलना में 21.48 पर्सेंट था। इस पर 1,225 करोड़ रुपए खर्च किए गए।

50 पर्सेंट की रकम का उपयोग नहीं किया

सेबी ने पाया कि केयर्न ने बायबैक की कम से कम 50 पर्सेंट की रकम का उपयोग नहीं किया, जो कि नियम के तहत करना था। जो रकम का उपयोग हुआ वह कुल रकम का 28.59 पर्सेंट था। केयर्न ने 30 जून 2014 को एक लेटर दिया और उसने बायबैक को बढ़ाने की मंजूरी मांगी। हालांकि सेबी ने इसके लिए मंजूरी नहीं दी। केयर्न ने इसके बाद सेबी को पत्र लिख कर कहा कि वह जो अलग खाते में 143 करोड़ रुपए है, उसे वापस करे।

बिक्री के ऑर्डर की जांच की गई

सेबी ने इसी दौरान एनएसई और बीएसई पर बिक्री के ऑर्डर की जब जांच की तो पता चला कि 123 कारोबारी दिनों में केयर्न द्वारा खरीदने का जो ऑर्डर था वह एनएसई पर 82 दिनों तक ही डाला गया। हालांकि बीएसई में 123 दिनों तक डाला गया। जांच में पता चला कि केयर्न ने 24 दिनों में एनएसई पर कोई खरीदारी का ऑर्डर नहीं दिया। जबकि 14 दिनों तक उसने 5 हजार से भी कम शेयरों के लिए ऑर्डर डाला। केयर्न इस वजह से कम से कम जो बायबैक साइज का हिस्सा प्राप्त करना था, वह प्राप्त करने में फेल रही।

गुमराह करने वाली घोषणा थी

सेबी ने जांच में पाया कि केयर्न ने जो भी बायबैक की घोषणा की वह निवेशकों को एक गुमराह करने वाली घोषणा की थी। साथ ही यह भी पाया गया कि सीईओ पी एलांगो और डायरेक्टर अमन मेहता ने अखबारों में जिस विज्ञापन पर साइन किया वह भी गुमराह करने वाला था। इस वजह से इन लोगों ने सेबी के तमाम नियमों का उल्लंघन किया। सेबी ने इस संबंध में नोटिस भेजा। इसके बाद वेदांता ने 25 जुलाई 2017 को यह जानकारी दी कि केयर्न इंडिया का उसके साथ विलय हो गया है। यह विलय स्कीम अरेंजमेंट के तहत किया गया जो एनसीएलटी ने मंजूर किया था।

इसी बीच एलांगो ने यह जानकारी दी कि वे कंपनी के सीईओ नहीं हैं और समय पूरा होने से 6 महीने पहले ही इस्तीफा दे दिए हैं। ​​​​​​​सेबी ने जांच में पाया कि कंपनी ने जो भी काम किया उससे निवेशकों का घाटा हुआ। इस वजह से बुधवार को इस संबंध में सेबी ने ऑर्डर जारी कर दिया और पेनाल्टी लगा दी।

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