शिमला: देवानंद ने जिस स्कूल में की थी ‘लूटमार’ की शूटिंग, वहां अब चल रही लूट!

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शिमला. कोरोना महामारी ने सबसे ज्यादा देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान पहुंचाया है. अर्थव्यवस्था के बाद शिक्षा (Education) सबसे ज्यादा मुश्किल में हैं. ऐसे में जरा सोचिए किसी स्कूल में पढ़ाई के साथ साथ अन्य सभी चीजों पर ताला लगा हो, बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई (Online Study) न हो और स्कूल प्रबंधन लापता हो जाए तो क्या होगा. कुछ ऐसा ही हुआ है. हिमाचल की राजधानी शिमला (Shimla) के एक प्रतिष्ठित स्कूल में जहां ताला लटका है और स्टाफ सैलरी के लिए भटक रहा है, छात्र और अभिभावक पढ़ाई के लिए.

सुपर स्टार देवानंद से जुड़ाव
शिमला के कुफरी के समीप राष्ट्रपति निवास रिट्रिट के बिलकुल पास स्थित हिमालयन इंटरनेशल स्कूल में अब परेशानी का सबब बन गया है. 1977 में मेजर जनरल जगजीत सिंह ने इस स्कूल को शुरू किया था. इस स्कूल में पिछले 40 सालों से काम कर रहे स्टाफ के एक सदस्य तारा चंद शर्मा ने बताया कि पहले इस स्कूल का नाम कुछ और था. जब दिवंगत सुपर स्टार देवानंद इस स्कूल में अपनी फिल्म ‘लूटमार’ की शूटिंग के लिए यहां आए थे तो उन्होंने सुझाव दिया था कि इसका नाम हिमालयन इंटरनेशनल स्कूल रखा जाए.
स्टाफ बोला-अब केवल लूट हो रही हैयहां पर काम कर रहे स्टाफ का कहना है कि अब यहां स्थिति ये है कि लूटमार के अलावा कुछ नहीं चल रहा है. 9 महीने से स्टाफ को सैलरी नहीं मिली है और प्रबंधन लापता है. करीब 20 शिक्षक और 15 गैर शिक्षक कर्मचारियों की हालत खराब हो गई है. यहां तक कि सिक्योरियी गार्ड तक को सैलरी नहीं गई है, जो दिन रात यहां पर पहरेदारी कर रहे हैं.

उधार ले रहा स्टाफ

सिक्योरिटी गार्ड नरेंद्र कुमार ने बताया कि मार्च से लेकर अब तक वो गुजारे के लिए 16 हजार रू. उधार ले चुके हैं. राशन भी उधार ले रहे हैं. सफाई कर्मचारी शीला देवी ने बताया कि वो 1992 से इस स्कूल में कार्यरत हैं , पहले सब ठीक था, लेकिन कुछ सालों ने इन्हें परेशान किया जा रहा है. उन्होंने आशंका जताई कि स्कूल को बंद करने की साजिश के तहत ये सब किया जा रहा है.

प्रिंसिपल बोली-मैं इस्तीफा दे चुकी हैं
इस स्कूल का संचालन सरदार कुमेर सिंह शिक्षा सोसाइटी करती है. इस बाबत जब स्कूल की प्रिंसिपल राज काथ चौधरी से फोन पर बात की तो उन्होंने कहा कि वो तो मार्च में ही अपना इस्तीफा सौंप कर चंडीगढ़ अपने घर चली गई हैं. अक्तूबर 2019 से उन्हें वेतन नहीं मिला है. उनका कहना है कि उन्हें जानकारी नहीं है कि स्कूल का प्रबंधन कौन कर रहा है. इस संबंध में उन्हें किसी तरह की जानकारी नहीं है, लेकिन स्कूल स्टाफ का कहना है कि वो गुमराह कर रही हैं. शिक्षक योगेश कुमार का कहना है कि आरटीआई के तहत जो जानकारी मिली है,उसके मुताबिक सोसाइटी की चैयरमेन वहीं हैं, और उनकी बेटी अंबिका चौधरी सचिव हैं. स्टाफ का ये भी कहना है कि कई सालों से ये कोशिश की जा रही है कि किसी तरह से स्कूल को बंद किया जाए और यहां कुछ और शुरू किया जा सके,इसलिए स्टाफ को परेशान किया जा रहा है.

अभिभावक परेशान
कोरोना के चलते कमाई के साधन सीमित हो गए हैं. ऐसे में स्टाफ को न केवल चिंता अपने परिवार के पालन-पोषण की है बल्कि छात्रों की पढ़ाई की भी है. ऑनलाइन पढ़ाई का कोई पता नहीं है,जिससे अभिभावक परेशान हैं. बच्चे पढ़ नहीं रहे हैं क्योंकि स्कूल का ही अता-पता नहीं है,शिक्षकों को कई निर्देश मिले नहीं हैं. यहां पर प्री-नर्सरी से लेकर 12वीं तक के बच्चों को शिक्षा दी जाती है. अभिभावकों को कहना है मार्च के बाद कुछ समय बाद केवल फीस के लिए संदेश आया था. जुलाई महीने में फीस जमा करवाई है. स्टाफ ने सरकार के तंत्र के हर दरवाजे पर गुहार लगाई लेकिन कोई मदद नहीं मिली. लेबर कोर्ट में भी पेशियां ही चल रही हैं और कुछ मामले कोर्ट में चल रहे हैं. शिक्षा मंत्री,शिक्षा निदेशालय और डीसी के पास भी शिकायत की है. अब विधायक राकेश सिंघा से भी गुहार लगाई गई है.सिंघा का कहना है कि सरकार को इस मामले में तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए,इस संबंध में वो डीसी से भी मिल चुके हैं.

हिमालयन स्कूल शिमला.

डीसी ने दिया कार्रवाई का भरोसा
इस बाबत शिमला के उपायुक्त अमित कश्यप ने भरोसा दिया है कि मामले पर जल्द कार्रवाई अमल में लाई जाएगी. उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा. साथ ही कहा कि स्कूल स्टाफ उनके पास शिकायत लेकर आया था. मामले पर नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.

बेनामी घोषित हो चुकी है जमीन,सांसद केडी सिंह से भी जुड़ाव
बता दें कि इस स्कूल की जमीन को लेकर भी कई विवाद हो चुके हैं. साल 2015 में उपायुक्त शिमला की कोर्ट ने जमीन को बेनामी घोषित किया था और प्रदेश सरकार में निहित करने के आदेश दिए थे, लेकिन अब तक सरकार ने कब्जा नहीं किया है. स्कूल की पूर्व प्रिंसिपल राज काथ चौधरी के मुताबिक 32 बीघा यह जमीन मौजूदा समय में सोलन के एक व्यक्ति संदीप सेठी के नाम पर है. इसकी लीज 2025 तक है, लेकिन जानकारी के मुबातिक, वर्ष 2010 में जब इस जमीन का सौदा 6 करोड़ रू. में हुआ था. पैसे का भुगतान अलकेमिस्ट इंफ्रा रियलिटी लिमिटेड कंपनी ने किया था और उस वक्त मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ये कंपनी टीएमसी के राज्यसभा सांसद केडी सिंह के परिवार से जुड़ी हुई है.

शिमला का हिमालयन इंटरनेशनल स्कूल.

कोटी रिसासत की थी जमीन
जानकारी के अनुसार मामले की जांच में पता चला था कि रेवेन्यू रिकार्ड के अनुसार ये जमीन कोटी रियासत की थी. ब्रिटिशकाल में इस जमीन को पट्टे पर अंग्रेज अधिकारी सर एडवर्ड बक को दिया गया. साल 1955 में अंग्रेज अफसर की बेटी लोरना ने इसे दरभंगा की एक रानी को आगे पट्टे पर दे दिया. इसके बाद वर्ष 1977 में जगजीत सिंह ने एग्रीमेंट कर जमीन ली थी.





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