शिमला: कोविड के बीच भारी नुकसान के चलते बंद होने की कगार पर पहुंचे सिनेमा हॉल

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हिमाचल में कोरोना महामारी के कारण सिनेमा घरों को भारी नुकसान हो रहा है.

कोरोना महामारी (Corona epidemic) आने के बाद से शिमला (Shimla) में मार्च से सिनेमा हॉल (Cinema hall) बंद हैं. ऐसे में सिनेमा हॉल मालिकों के सामने आर्थिक संकट(Economic Crisis) खड़ा हो गया है. घाटे के कारण एक सिनेमा हॉल को बेचने के लिए खरीदार खोजा जा रहा है.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    October 14, 2020, 5:30 PM IST

शिमला. राजधानी शिमला (Shimla) और सिनेमा का बहुत पुराना नाता रहा है. यहां बहुत सारी फिल्मों की शूटिंग तो होती ही है, साथ ही फिल्मों को थिएटर (Theater) में देखने का क्रेज भी यहां के लोगों का खास है. लेकिन कोरोना काल (Corona Era) के बाद से स्थिति ऐसी बन चुकी है कि शिमला के सिनेमा घर (Theater) बंद होने की कगार पर पहुंच गये हैं. जी हां, कोरोना के आने से सब बदल चुका है, क्योंकि पिछले करीब 7 महीनों से यहां के सिनेमा हॉल बंद पड़े हैं.

केंद्र सरकार की ओर से 15 अक्टूबर से सिनेमा हॉल खोलने की अनुमति मिल चुकी है, लेकिन राजधानी में मूवी थिएटर खुलने से भी अब कोई फायदा नहीं होने वाला है. शिमला में तीन सिनेमा हॉल हैं- एक रिज़ मैदान पर रिट्ज मूवी थिएटर, दूसरा करीब 55 साल पुराना शाही थिएटर और तीसरा न्यू बस स्टैंड स्थित एसआरएस सिनेमा. एसआरएस सिनेमा पहले से ही घाटे में चल रहा था, ऐसे में अभी कुछ भी स्पष्ट रूप से नहीं कहा ज सकता है कि थियेटर कोविड के नुकसान से उभर पाएंगे या नहीं. हालात को देखते हुये ये जरूर कहा जा सकता है कि थियेटर खुलेंगे इसकी संभावना बहुत ही कम है.

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अगर रिट्ज मूवी थिएटर की बात करें तो यहां इतना नुकसान हो चुका है कि ये प्रॉपर्टी सेल पर डाल दी जा चुकी है. अगर यह प्रोपर्टी बिक जाती है तो यह थियेटर हमेशा के लिए बंद हो जाएगा. यही हाल शिमला के करीब 55 साल पुराने शाही थिएटर का है. कोविड से पहले ही लोग जहां थियेटर में बड़े पर्दे पर फिल्में देखने के लिए कम ही आते थे तो वहीं अब कोविड के बाद हालात और भी ज्यादा बदल गए हैं.ऐसे में 50 फीसदी सिटिंग कैपेसिटी के साथ दोबारा से सिनेमा हॉल खोलना भी सिनेमा हॉल मालिकों को घाटे का सौदा ही नजर आ रहा है. यही वजह है कि अब इन्हें दोबारा से खोलने के लिए सिनेमा हॉल मालिकों में रुचि नहीं दिखाई दे रही है. कोविड के कारण सिनेमाहॉल मार्च माह में ही बंद कर दिए गए थे. तब से यह सिनेमाहॉल बंद पड़े हैं. नु

कई थियेटर मालिकों ने जहां कमर्चारियों की भी छुट्टी कर दी है तो वहीं कुछ एक ने आधी सैलरी पर कर्मचारियों को रखा है. थियेटर में काम करने वाले कर्मचारियों पर भी कोविड की मार पड़ी है और यह कर्मचारी अब अपनी नौकरी को लेकर चिंतित हैं. कोविड के दौरान उन्हें पहले ही आधा वेतन मिल रहा था और अब जब उनकी नौकरियां जाने की कगार पर हैं तो उन्हें अपने जीवनयापन की चिंता सता रही है. कुछ एक कर्मचारी तो ऐसे हैं जो 55 और 45 वर्षों से इन थियेटर में काम कर रहे हैं और अब उनका कहना यही है कि इतना समय जीवन का बीत चुका है तो अब वह कहां और कैसे काम करेंगे.

शाही थिएटर के मालिक साहिल ने बताया कि अभी तो प्रदेश सरकार की ओर से सिनेमा हॉल खोलने को लेकर किसी तरह की कोई आदेश जारी नहीं किए गए हैं. सरकार जब एसओपी जारी करेगी उसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी कि जो नियम तय किए गए हैं उसके तहत सिनेमा हॉल को खोलना मुनाफा देगा या घाटा. वहीं 50 फ़ीसदी सीटिंग कैपेसिटी के साथ सिनेमा हॉल को खोलने की बात केंद्र सरकार की एसओपी में की गई है जो किसी तरह से संभव नहीं है. बंद पड़े थियेटर का भी बिजली पानी और मेंटेनेंस का बिल देना पड़ रहा है. अगर खुलने के बाद भी कर्मचारियों की सैलरी, बिजली, पानी के बिल ओर मेंटेनेंस का खर्चा भी ना निकले तो फिर थियेटर खोलने का फायदा ही क्या.





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