‘वो रंग है ही नहीं जो तेरे बदन में नहीं’, आज पेश हैं रंग पर अशआर

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रंग ज़िंदगी में हों या शायरी में खूबसूरती में इज़ाफ़ा करते हैं.

उर्दू शायरी (Urdu Shayari) में मुहब्‍बत (Love) की बात की गई है. जहां इसमें दर्दे-जुदाई से लबरेज़ जज्‍़बात (Emotion) को जगह दी गई है, इसी तरह शायरी में रंगों की भी बात की गई है…

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    September 15, 2020, 12:55 PM IST

शेरो-सुख़न (Shayari) की दुनिया में हर जज्‍़बात (Emotion) को बेहद ख़ूबसूरती के साथ काग़ज़ पर उकेरा गया है. इसी तरह शायरी में रंगों की बात की गई है. रंग ज़िंदगी में हो या शायरी में खूबसूरती में इज़ाफ़ा करते हैं. शायरी में भी इनको खास तवज्‍जो दी गई है और शायरों के कलाम में इनका असर नज़र आता है. आज हम शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए ‘रेख्‍़ता’ के साभार से लेकर हाजिर हुए हैं. शायरों के ऐसे अशआर जिसमें बात ‘रंगों की हो और मुहब्‍बत का जिक्र हो, तो आप भी इसका लुत्‍फ़ उठाइए…

किसी कली किसी गुल में किसी चमन में नहीं
वो रंग है ही नहीं जो तेरे बदन में नहीं
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लब-ए-नाज़ुक के बोसे लूं तो मिस्सी मुंह बनाती है
कफ़-ए-पा को अगर चूमूं तो मेहंदी रंग लाती है
आसी ग़ाज़ीपुरी

अब की होली में रहा बेकार रंग
और ही लाया फ़िराक़-ए-यार रंग
इमाम बख़्श नासिख़

तमाम रात नहाया था शहर बारिश में
वो रंग उतर ही गए जो उतरने वाले थे
जमाल एहसानी

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किस की होली जश्न-ए-नौ-रोज़ी है आज
सुर्ख़ मय से साक़िया दस्तार रंग
इमाम बख़्श नासिख़

दश्त-ए-वफ़ा में जल के न रह जाएं अपने दिल
वो धूप है कि रंग हैं काले पड़े हुए
होश तिर्मिज़ी

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अजब बहार दिखाई लहू के छींटों ने
ख़िज़ां का रंग भी रंग-ए-बहार जैसा था
जुनैद हज़ीं लारी

मुझ को एहसास-ए-रंग-ओ-बू न हुआ
यूँ भी अक्सर बहार आई है
हबीब अहमद सिद्दीक़ी





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