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विधानसभा चुनाव क्यों नहीं लड़ते नीतीश, 35 साल पहले आखिरी बार लड़ा था


बिहार में चुनावी घोड़ा सरपट दौड़ रहा है. सारे देश की निगाहें इस समय बिहार के चुनावों पर है. और अगर इस राज्य पर हैं तो जाहिर है सारी चर्चाएं नीतीश के चारों ओर ही घूम रही हैं लेकिन हैरानी है कि नीतीश विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ते. ये सवाल इस चुनाव में पूछने वाले कम नहीं हैं. आखिरी बार 1985 यानि 35 साल पहले उन्होंने विधानसभा का चुनाव लड़ा था.

हां, ये सही है कि इसके बाद उन्होंने लोकसभा के 06 चुनाव लड़े और जीते लेकिन विधानसभा का कोई चुनाव नहीं लड़े जबकि वो इन्हीं सालों में पांच बार बिहार के मुख्यमंत्री बन चुके हैं. अबकी बार अगर जेडीयू और बीजेपी का गठबंधन यानि एनडीए की सरकार बनी तो नीतीश छठी बार सीएम होंगे.

आखिर बात क्या है. नीतीश क्यों विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ते. अगर वो ये चुनाव नहीं लड़ते तो फिर कैसे सीएम की कुर्सी पर बने रहने की पात्रता हासिल करते हैं. वैसे आपको ये भी बता दें कि बेशक नीतीश चुनाव नहीं लड़ते लेकिन अपने दल और गठबंधन के लिए चुनाव प्रचार जरूर करते हैं.

कितने चुनाव कब-कब लड़ेदेखते हैं कि नीतीश ने कितने विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव अब तक लड़े हैं.
1977 – हरनौट से विधानसभा चुनाव लड़ा और हार गए
1985 – हरनौट से विधानसभा के लिए चुने गए
1989 – पहला लोकसभा चुनाव जीता
1991 – दूसरा लोकसभा चुनाव जीता

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1996 -तीसरी लोकसभा चुनाव जीता
1998- चौथा लोकसभा चुनाव जीता
1999 – पांचवां लोकसभा चुनाव जीता
2004 – छठां लोकसभा चुनाव जीता
ये नीतीश का आखिरी लोकसभा चुनाव था, जो उन्होंने जीता.

नीतीश कुमार ने पहला विधानसभा चुनाव हरनौट से 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर लड़ा लेकिन वो हार गए. इसके बाद 1985 में वो यहीं से जीतकर विधानसभा में पहुंचे लेकिन ये उनका आखिरी एसेंबली चुनाव भी रहा. अब वो विधानसभा के चुनाव नहीं लड़ते (फाइल फोटो)

कितनी बार मुख्यमंत्री बने
– नीतीश पहली बार वर्ष 2000 में मुख्यमंत्री बने. हालांकि उनका ये कार्यकाल केवल 07 दिनों का था. वो इससे पहले केंद्र में मंत्री रह चुके थे. इसके बाद भी केंद्र में मंत्री बन गए.
– वर्ष 2005 में वो पहली बार मुख्यमंत्री बने. इस बार उन्होंने पांच साल का कार्यकाल मुख्यमंत्री के रूप में पूरा किया.
– वर्ष 2010 में तीसरी बार मुख्यमंत्री बने

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– वर्ष 2015 में वो लालू के साथ मिलकर बिहार विधानसभा के चुनाव मैदान में उतरे. खुद चुनाव नहीं लड़े लेकिन गठबंधन की जीत के बाद मुख्यमंत्री बने
– वर्ष 2017 लालू के साथ गठबंधन टूटा. अबकी बार नीतीश बीजेपी के साथ हाथ मिलाकर पांचवीं बार मुख्यमंत्री बने

विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ते तो फिर कैसे कुर्सी पर बने रहते हैं
नीतीश मानते हैं कि अगर वो विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे तो पार्टी के प्रचार पर तरीके से समय नहीं दे पाएंगे. उनका ध्यान अपने एसेंबली क्षेत्र पर रहेगा. लिहाजा विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ते.

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संवैधानिक तौर पर मुख्यमंत्री को राज्य की विधायिका का सदस्य होना जरूरी है.लिहाजा वो बिहार विधान परिषद के जरिए विधायिका का सदस्य बनते हैं.

वर्ष 2005 में जब वो दूसरी बार बिहार के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने अगले साल वर्ष 2006 में बिहार विधान परिषद में चुने गए. इसके बाद से वो अब तक तीन बार विधान परिषद के रास्ते विधान भवन में पहुंचे हैं. और सीएम की कुर्सी पर बने हुए हैं. मौजूदा विधान परिषद में उनका कार्यकाल वर्ष 2024 तक है.





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