लॉकडाउन में घरेलू कामों से गिरा मरीजों का शुगर लेवल

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चंडीगढ़एक घंटा पहले

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  • 3 महीने के डायबिटीज के टेस्ट एबीए1सी के सर्वे में शुगर लेवल गिरने या सामान्य होने का हुआ खुलासा
  • सिटी में 100 में 14 लोग हैं डायबिटीज के शिकार

(मनोज अपरेजा) लॉकडाउन में बेशक लोग घरों में रहे। ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी भी नहीं हुई। घरों में रहकर खाना ज्यादा हुआ। लेकिन उसके बावजूद लोगों का शुगर लेवल कंट्रोल मिला। यह बात इंडिया डायबिटीज केयर इंडेक्स (आईडीसीआई) के सबसे नए निष्कर्षों सामने आई है।

चंडीगढ़ में पिछली क्वार्टर की तुलना में अप्रैल से जून 2020 की अवधि में ग्लायकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन या एचबीए1सी लेवल 8.16 फीसदी से गिरकर 7.85 फीसदी रह गया है। इससे जाहिर होता है कि लॉक डाउन में लोगों ने अपने लाइफ स्टाल को सुधारा और समय पर खाना खाकर ज्यादा शुगर को मैनेज किया।

समय पर सोने और उठने से उनका शुगर लेवल सामान्य होने लगा। यह संस्था विभिन्न शहरों, राज्यों और देश में डायबिटीज के मरीजों की देखभाल और उनकी स्थिति के आंकलन का काम करती है। किसी भी व्यक्ति में एचबीए1सी की वेल्यू तीन महीनों से ज्यादा के समय में खून में ग्लूकोज के औसत स्तर के बारे में जानकारी देती है और इसे लंबी अवधि में खून में ग्लूकोज के नियंत्रण के बारे में बताता है। 60 साल की औसत आयु के साथ करीब 1100 लोगों पर लॉकडाउन के दौरान किए गए सर्वे के मुताबिक लोगों का शुगर लेवल कम हुआ। सर्वे में 68 फीसदी पुरूष और 22 फीसदी महिलाओं को शामिल किया।

इसके अलावा इस तिमाही में पोस्ट प्रैंन्डियल (भोजन के बाद) ब्लड में ग्लूकोज का लेवल 224 एमजी/ डेसी लीटर था। जबकि खाली पेट यानी फास्टिंग में ग्लूकोज का लेवल 162 एमजी, डेसी लीटर था। चंडीगढ़ में एचबीए1सी के लेवल में गिरावट से साफ हो गया है कि अगर लोग घर पर रहकर भी अगर अपनी सेहत पर ज्यादा ध्यान दें और इंडोर फिजिकल एक्टिविटीज करते रहें तो वे स्वस्थ रह सकते हैं। सर्वे के नतीजे भी यही बताते हैं। जिसके परिणामस्वरुप महामारी के दौरान एचबीए1सी की स्थिति में संपूर्ण रूप से गिरावट के नतीजे सामने आए हैं।

इससे यह भी जाहिर होता है कि घर में ही डायबिटीज की देखभाल करना संभव है। एचबीए1सी स्तर में सुधार का ट्रेंड एक राहत का संकेत है क्योंकि कोविड-19 या कोरोना वायरस से गंभीर जटिलताएं विकसित होने का बड़ा खतरा डायबिटीज से पीड़ित लोगों को है।

यह बदलाव क्यों आया…पीजीआई के एंडोक्राइनोलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी प्रो. अनिल भंसाली ने बताया कि लोगों ने इंडोर एक्टिविटी को बढ़ाया जैसे कि योग, मेडिटेशन किया। लोगों ने अपने स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान दिया। जबकि भागदौड़ की जिंदगी में लोग अपने ऊपर ध्यान नहीं दे पाते।

मेड न आने की वजह से लोगों ने अपने घर का स्वयं किया। इससे उनकी फिजिकल एक्टिविटी बढ़ी। जब उन्होंने अपने घर का काम खुद किया तो उन्हें एक तरह की संतुष्टि का आभास हुआ, जिससे उनके मन में खुशी संचार हुआ और यही कारण हैं कि जो मरीज थे उनका डायबिटीज लेवल कंट्रोल में रहा।

संकेतों को अनदेखा न करें…

कोविड-19 के दौरान डायबिटीज से पीड़ित मरीजों को घर में ही खून में ग्लूकोज़ की निगरानी के लिए दवाइयों और आपूर्ति का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना चाहिए। किसी भी तरह की चेतावनी के संकेत जैसे सांस लेने में तकलीफ या सांस फूलना, बुखार, सूखी खंसी, थकान, दर्द, गले में खराश-परेशानी, सिरदर्द, स्वाद और गंध का पता न लगना आदि को अनदेखा नहीं करना चाहिए और तुरंत मेडिकल जांच की व्यवस्था करनी चाहिए।

ज्यादा उम्र के लोग जो पहले से मौजूद चिकित्सकीय स्थितियों जैसे हाई ब्लड प्रेशर, ह्रदय रोग और फेफड़ों संबंधी बीमारियों और मोटापे से पीड़ित हैं, उन्हें कोविड-19 में ज्यादा खतरा है। क्योंकि ऐसे मरीजों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है।



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