रेलवे भूमि अधिग्रहण घोटाला: गड़बड़ करने वाले सात पटवारी व रीडर के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज; SDM पहले से निलंबित, अन्य अफसर भी जांच की जद में

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पलवल9 घंटे पहले

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पलवल। कैंप थाना पुलिस ने दर्ज किया केस।

  • पुलिस ने डीसी की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण मामले में 7 पटवारियों समेत 8 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इसके अलावा जिन अधिकारियों ने स्वयं या अपने रिश्तेदारों के माध्यम से धोखाधड़ी कर परियोजना में अर्जित भूमि का एक हिस्सा खरीदा है उनकी जांच की जा रही है। कैंप थाना प्रभारी विनोद कुमार के अनुसार डीसी ने शिकायत में कहा है कि पटवारी सुरेश, कुलबीर, बाबूलाल, विकास, बलबीर, वरुण देव, राजेश व एसडीओ के रीडर सुनील कुमार ने धोखाधड़ी की है। पुलिस ने डीसी की शिकायत पर उक्त आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

एसडीएम पहले ही निलंबित

भूमि अधिग्रहण के दौरान अनियमितताओं के चलते तीन एचसीएस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पूर्व में आदेश आए थे। इनमें पलवल के एसडीएम कंवर सिंह को निलंबित किया जा चुका है। जबकि एचसीएस जितेंद्र कुमार व डॉ. नरेश के खिलाफ स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए गए थे। जबकि अन्य के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए कहा गया था। इस मामले में अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों में तहसीलदार, रजिस्ट्री क्लर्क व पटवारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के अलावा FIR दर्ज करने के आदेश दिए गए। इसके तहत डीसी ने सात पटवारियों सहित एक रीडर के खिलाफ FIR दर्ज कराई है।

क्या है पूरा मामला

भूमि घोटाले की जांच रिपोर्ट जिले के अधिकारियों ने सरकार को सौंपी थी। इसमें वर्ष 2018 से वर्ष 2021 तक रहे अधिकारियों की लापरवाही को शामिल किया गया था। रिपोर्ट में तीन एसडीएम, पांच तहसीलदार, छह रजिस्ट्री क्लर्क, पटवारी और दो उच्चाधिकारियों के नाम शामिल थे। रिहेबिलेशन एंड रिसेटलमेंट पॉलिसी के दुरुपयोग की बात रिपोर्ट में थी। इससे जांच को लेकर पलवल के एसडीएम कार्यालय को सील कर दिया गया था। क्योंकि एसडीएम ने रेलवे के लिए अधिग्रहित जमीन के हिस्सेदारों को लाभ पहुंचाने की नीयत से अवार्ड सुनाते समय रिहेबिलेशन एंड रिसेटलमेंट पॉलिसी का प्रयोग किया था। मामला उजागर होने पर डीसी नरेश नरवाल ने एडीसी सतेंद्र की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया। इसमें जिला परिषद के सीईओ अमित कुमार और डीआरओ रामफल कटारिया को शामिल किया गया था। समिति ने जांच रिपोर्ट डीसी को सौंप दी थी। इसके बाद डीसी ने रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। इसमें वर्ष 2018 के दौरान तीन एसडीएम, पांच तहसीलदार, छह रजिस्ट्री क्लर्क और पटवारियों को लापरवाही का जिम्मेदार माना गया था।

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