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राम’ नाम जब भी साथ जुड़ा है मेरा भला ही हुआ है: रजा अली मुराद


चंडीगढ़21 मिनट पहले

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रजा ने कहा- संजय लीला भंसाली की फिल्म रामलीला की, वहां भी राम जुड़ा था। देखा जाए तो जहां राम हैं वो ही चीजें हिट रहती हैं। इसलिए मैं यह समझता हूं कि मेरी जिंदगी में जब भी ‘राम’ नाम साथ जुड़ा है वहां भला ही हुआ है।

  • शहर पहुंचे बॉलीवुड एक्टर रज़ा अली मुराद से मुलाकात, रामलीला, शहर से लगाव व मौजूदा लाइफ पर बात की

(मधुप यादव). एक पर्सनल विजिट पर एक्टर रजा अली मुराद चंडीगढ़ पहुंचे। बोले, करनाल में एक इवेंट के लिए बुलाया गया था। मेरे पास ऑप्शन था कि दिल्ली से करनाल जाऊं या फिर चंडीगढ़ से चूंकि यहां से खास प्यार है इसलिए यहीं से आना-जाना स्वीकारा। इसके बाद बांध दिए चंडीगढ़ की तारीफ में पुल। बोले, चंडीगढ़ में क्या अच्छा नहीं है? हर चीज बेहतरीन है। लोग, फूड, उनकी आवभागत से लेकर हर चीज। शहर की सड़कें चौड़ी हैं। एक तरीके का प्लॉन्ड सिटी है।मैट्रो शहरों जैसा इतना ट्रैफिक नहीं है।

अयोध्या में होने वाली रामलीला में किरदार के बारे में उनसे पूछा तो बोले, बेहद एक्साइटमेंट है मन में। पहला ऐसा मौका है जब रामचंद्र की नगरी में रामलीला बॉलीवुड की एंट्री हो रही है। मैं तो पिछले नौ साल से लगातार रामलीला का हिस्सा बन रहा हूं। इस बार अहिरावण बनंगूा। इसकी कोई तैयारी नहीं की। अब तक राजा जनक, कुंभकरण और अहिरावण नामक विभिन्न किरदार किए हैं। कहीं न कहीं जिंदगी की कड़ी में रामचंद्र से जुड़ा हुआ हूं। मेरा वतन रामपुर है, इसमें भी ‘राम’ है। नाम रज़ा अली मुराद है, मेरे सर्टिफिकेट में भी राम है। पहला प्रोजेक्ट बाबू राम के साथ रहा उसमें भी राम था।

करियर की हिट फिल्म राम तेरी गंगा मैली हो गई रही उसमें भी राम था। सर जॉन बना राम लखन में, उसमें भी राम था। संजय लीला भंसाली की फिल्म रामलीला की, वहां भी राम जुड़ा था। देखा जाए तो जहां राम हैं वो ही चीजें हिट रहती हैं। इसलिए मैं यह समझता हूं कि मेरी जिंदगी में जब भी ‘राम’ नाम साथ जुड़ा है वहां भला ही हुआ है।

कोरोनाकाल में लाइफ

रजा ने कहा- सभी बिजनेस ठप्प पड़े हुए हैं। ज्यादा कुछ करने को नहीं। पढ़ने का शौक है, इसलिए किताबें पढ़ता हूं। पुरानी फिल्में देखता हूं, अपनी उन फिल्मों को देखता हूं जिन्हें मैं देख नहीं पाया था। टीवी देखता हूं और वॉक करने जाता हूं। पहली बार पूरी दुनिया किसी मर्ज के लपेटे में है। नुकसान पूरी दुनिया में हुआ है। किसी के लिए पॉजिटिव नहीं है। लोग काम नहीं कर रहे। पैसा भी नहीं है। आदमी अपने घर में ही कैदी बना हुआ है। हालात ही कुछ ऐसे बने हैंं।

इंडस्ट्री में बदलाव पर बोले

एक तरह से यह अच्छा ही हुआ है। हर तरीके से बदलाव बेहतर है। कॉरपोरेट हाउस हो रहे है। अब प्लैन करके फिल्में बनती हैं। बॉयोपिक बनी हैं, जो पहले बनी नहीं है। डिफरेंट टाइप के सब्जेक्ट पर फिल्में बन रही हैं। जिसका मैं तहे दिल से स्वागत करता हूं।



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sabhijankari:
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