राजस्थान में महिला अत्याचारों के खिलाफ ‘आवाज’ का आगाज, जानिये क्या है पूरा प्लान

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पुलिस मुख्यालय की ओर से ‘एक्शन अगेंस्ट वूमन रिलेटेड क्राइम एंड अवेयनेस फॉर जस्टीस’ अभियान का आगाज किया गया है.

राजस्थान में महिला अत्याचारों (Women’s atrocities) के खिलाफ आज से एक नई मुहिम ‘आवाज’ की शुरुआत की गई है. इस मुहिम के तहत महिलाओं में सुरक्षा संबंधी कानूनी जागरुकता (Legal awareness) पैदा की जायेगी.

जयपुर. महिलाओं के खिलाफ (Women’s atrocities) बढ़ते अत्याचारों के मामलों ने उनकी सुरक्षा पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं. महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर हुई राज्य सरकार की ओर से प्रदेश में आज से विशेष अभियान ‘आवाज’ (Awaaz) का आगाज किया जा रहा है. इस अभियान के दौरान एक ओर जहां महिलाओं और बालिकाओं को अपने अधिकारों और कानूनों के प्रति सजग किया जाएगा. वहीं युवाओं में महिला सुरक्षा और सम्मान (Safety and respect) की भावना जागृत करने के प्रयास किये जायेंगे.

दिल्ली में निर्भया मामले के बाद हाथरस की घटना ने महिला सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है. देशभर में महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर आवाज उठ रही है. ऐसे में सीएम अशोक गहलोत भी महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों और बलात्कार की घटनाओं को लेकर काफी गंभीर हैं. सीएम के निर्देशों के बाद अब पुलिस मुख्यालय की ओर से ‘एक्शन अगेंस्ट वूमन रिलेटेड क्राइम एंड अवेयनेस फॉर जस्टीस’ अभियान का आगाज किया जा रहा है. इसे लेकर एडीजी रवि प्रकाश मेहरड़ा ने प्रदेशभर के सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को आदेश जारी कर दिए हैं.

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महिलाओं में सुरक्षा संबंधी कानूनी जागरुकता पैदा की जायेगीएडीजी रविप्रकाश मेहरड़ा ने बताया कि आवाज अभियान के तहत महिलाओं में सुरक्षा संबंधी कानूनी जागरुकता पैदा की जायेगी. इसके लिये पुलिस के साथ मिलकर कई विभागों को प्रचार प्रसार के निर्देश दिए गए हैं. इसके लिए जागरुकता के पोस्टर, बैनर और अन्य प्रचार सामग्री को हर आंगनबाडी केन्द्र, पंचायत भवन, स्कूल, पीएचसी, अस्पताल, बस स्टेण्ड, मुख्य मार्ग और पुलिस थानों पर लगाये जाएंगे.

अपनी बात बैठक का आयोजन किया जायेगा
अभियान में पुलिसकर्मी-आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और एएनएम आपस में संपर्क में रहेंगे. वे अपने नंबर के साथ हैल्पलाइन नंबर आपस में एक्सचेंज करेंगे. कंट्रोल रूम और गरिमा हेल्पलाइन के नंबरों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जायेगा. महिलाओं को थाने में स्थित महिला-बाल डेस्क के बारे में जागरुक किया जायेगा. पंचायत स्तर पर अपनी बात बैठक का आयोजन किया जायेगा. एसपी को इन बैठकों में शिरकत करनी होगी.

महिला सुरक्षा और सम्मान को लेकर जागरुक किया जाएगा

सभी थाना स्तर पर 15 से 30 साल के युवाओं को महिला सुरक्षा और सम्मान को लेकर जागरुक किया जाएगा. इसमें 15 से 30 साल के युवाओं से भी अपनी बात होगी. इसमें एसएचओ, आशा एएनएम और जिला बाल अधिकारी को मौजूद रहना होगा. उन्हें महिला अत्याचार से संबंधित कानून की जानकारी देनी होगी. एएसपी को भी महीने में चार बार अपनी बात कार्यक्रम में मौजूद रहना होगा. इसके अलावा स्थानीय स्तर पर नुक्कड़ नाटक और कठपुतली नाटक के आयोजन भी किए जाएंगे. उन्होंने बताया कि कोरोना के कारण बच्चों की ऑनलाइन क्लासेज चल रही है. ऐसे में थानाधिकारी अपने क्षेत्र के स्कूली बच्चों को ऑनलाइन भी इस बारे में जानकारी दे सकते हैं.





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