मॉडर्न सिटी का हेल्थ सिस्टम: प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों के पास फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं; सेक्टर-48 के एक अस्पताल को छोड़ किसी अस्पताल के पास नहीं है फायर सेफ्टी की NOC

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चंडीगढ़7 घंटे पहले

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सेक्टर 32 के स्टेशन फायर ऑफिसर लाल बहादुर का कहना है कि GMCH 32 में अब तक NOC के लिए अप्लाई नहीं किया था। पिछले साल सर्वे के दौरान ही इक्विपमेंट चेक किए गए और नोटिस दिया गया। इसके बाद अब GMCH से आवेदन किया है।

शहर में प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों के पास फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं हैं। सभी ने अपने स्तर पर फार्मेल्टी पूरी करने के लिए कुछ इक्विपमेंट लगवाए हुए हैं। अगर प्रॉपर फायर इक्विपमेंट लगवाए होते तो सभी अस्पतालों के पास फायर सेफ्टी का फायर एंड इमरजेंसी विभाग से लिया नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट होता। न ही निगम के फायर अफसर्स ने भी अस्पतालों को चेक करने की कोशिश ही की है। जिसकी वजह से अस्पतालों में दाखिल मरीज खासकर कोरोना सुरक्षित नहीं है।

इसकी सबसे बड़ी वजह फायर विभाग में ऑपरेशनल एंड टेक्निकल का चार्ज 2005 से नॉन टेक्निकल के पास रहा है। जिसकी वजह से फायर सेफ्टी नॉर्म को नजर अंदाज किया गया है। अगर ऑपरेशनल एंड टेक्निकल का काम सीनियर मोस्ट स्टेशन फायर अफसर के पास होता तो शहर की सभी बिल्डिंग में प्रॉपर फायर इक्विपमेंट लगते। चेकिंग की जाती तो अस्पतालों में फायर इक्विपमेंट नहीं लगाए जाने पर बिल्डिंग सील की होती। ऑपरेशनल एंड टेक्निकल का जिम्मा सालों से MC में नॉन टेक्निकल ऑफिसर देखता आया है। उसको फायर इक्विपमेंट की चेकिंग करने और इंप्लीमेंट करवाने की जानकारी नहीं होती है।

सेक्टर-32 GMCH 1991 में बना था। लेकिन अस्पताल में इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की ओर से लगवाए गए फायर सेफ्टी इक्विपमेंट को फायर विभाग के अफसरों ने चेक तक नहीं किया। नोटिस देना तो दूर की बात है। पिछले साल सर्वे दौरान पता चला कि अस्पताल में फायर सेफ्टी इक्विपमेंट प्रॉपर ढंग से लगे नहीं हैं। इनमें से ज्यादातर वर्किंग नहीं हैं। न ही 11 केवीए सब स्टेशन की एनओसी हुई है। इस तरह से अस्पताल में फायर सेफ्टी नहीं है।

सर्वे के बाद ही GMCH प्रबंधन ने फायर इक्विपमेंट लगाने के लिए फायर स्टेशन में आवेदन दिया है। इसी अस्पताल में कोरोना के मरीज काफी संख्या में दाखिल रहते हैं। सेक्टर 16 GMSH अस्पताल में बनने से आज तक फायर इक्विपमेंट की चेकिंग तक नहीं की गई। अस्पताल प्रबंधन को नोटिस देना तो दूर की बात है। इस अस्पताल में भी कोरोना पेशेंट काफी संख्या में दाखिल होते रहते हैं। अस्पताल में नई OPD और एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक में भी फायर सेफ्टी का इंतजाम नहीं है।

क्योंकि इसकी NOC के लिए अभी तक एप्लीकेशन तक नहीं दी गई।यहीं तक नहीं मनीमाजरा अस्पताल, सेक्टर 22 अस्पताल और सेक्टर 44 अस्पताल में फायर सेफ्टी नॉर्म फॉलो नहीं हो रहे। न ही निगम का फायर डिपार्टमेंट इन्हें चेक करवाकर नोटिस ही भिजवा रहा है। कोरोना के मरीजों की अस्पतालों में सेफ्टी को देखते हुए मिनिस्टरी ऑफ होम अफेयर्स की ओर से साफ डायरेक्शन दी गई हैं। बावजूद इसके फायर एंड इमरजेंसी विभाग की ओर से अस्पतालों की चेकिंग नहीं करवाई गई।

PGI में दिया 50 साल बाद फायर NOC का नोटिस

फायर विभाग के अफसरों ने PGI को भी 50 साल बाद नोटिस दिया है। नोटिस में भी कहा गया था कि फायर सेफ्टी इक्विपमेंट लगाकर NOC नहीं लिया तो एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक को सील किया जाएगा। इसके बाद एप्रोच लगने लगी। स्टेशन फायर ऑफिसर ने सेफ्टी नॉर्म को देखते हुए अपने बोस की एप्रोच को भी नजर अंदाज कर दिया। नोटिस के बाद PGI ने बिल्डिंग सेफ्टी नाॅर्म को दुरुस्त करना शुरू कर दिया और NOC के आवेदन के साथ ही 34 लाख रुपए भी जमा करवा दिए।

सेक्टर 32 के स्टेशन फायर ऑफिसर लाल बहादुर का कहना है कि GMCH 32 में अब तक NOC के लिए अप्लाई नहीं किया था। पिछले साल सर्वे के दौरान ही इक्विपमेंट चेक किए गए और नोटिस दिया गया। इसके बाद अब GMCH से आवेदन किया है। सेक्टर 17 और मनीमाजरा के स्टेशन फायर ऑफिसर जगतार सिंह का कहना है कि सेक्टर 16 GMSH और मनीमाजरा अस्पताल में अभी तक कोई फायर का नोटिस नहीं दिया गया। न ही अस्पताल की ओर से फायर सेफ्टी की NOC के आवेदन ही किया है।

सेक्टर 11 के स्टेशन फायर ऑफिसर अनिल शर्मा का कहना है कि PGI में फायर सेफ्टी इक्विपमेंट का नोटिस दिया गया। इसे इंप्लीमेंट नहीं करने पर एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक सील करने को कहा गया। इसके बाद ही PGI की ओर से NOC के लिए आवेदन के साथ 34 लाख रुपए जमा करवाए गए। प्रशासन के चीफ इंजीनियर कम स्पेशल सेक्रेटरी सीबी ओझा का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में फायर इक्विपमेंट तो लगे हुए हैं। फायर सेफ्टी की एनओसी अस्पताल की ओर से एप्लाई की जानी है। जो कमियां हैं उन्हें इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट पूरा करवा देगा।

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