मुश्किल वक्त… और एकजुट होता सिनेमा जगत

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अभिनेता विनीत कुमार सिंह के नाम से कम लोग वाकिफ होंगे. वाराणसी, उत्तर प्रदेश से हैं और बीस साल से बॉलीवुड में सक्रिय हैं. ट्वीटर पर उनके फॉलोअर्स की संख्या बेशक न चौंकाती हो, लेकिन इन दिनों वो जो कर रहे हैं उस पर ध्यान जाता है. संकट का ऐसा समय जब हाथ को हाथ कम पड़े रहे हैं, विनीत ने सोशल मीडिया पर मोर्चा संभाला हुआ है. पिछले महीने वो खुद कोरोना से जूझ रहे थे तो जरूरी दवाओं आदि के लिए इसी मंच से लोगों से गुहार लगा रहे थे. लोगों ने उन तक मदद पहुंचाई, जिनमें एक अभिनेता पंकज त्रिपाठी भी हैं. ये बताने की जरूरत नहीं है कि पीड़ा और बेबसी के उस संकटमय समय में विनीत ने कैसा महसूस किया होगा. लेकिन उस विपदा से उबरने के बाद उन्होंने वो किया जिसकी आज सबसे ज्यादा जरूरत है.

साथी हाथ बढ़ाना, एक अकेला थक जाए तो मिल कर बोझ उठाना… इस मुश्किल वक्त में फिल्म नया दौर (1957) का ये गीत याद आता है. खासतौर से जब विनीत कुमार और उनके सरीखे फिल्म कलाकारों को सोशल मीडिया पर दूसरों के लिए मदद की गुहार लगाते देखते हैं. किसी जरूरतमंद के संदेश को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने लिखा- ‘हे दिल्ली मदद करो रे दोस्तों…’ आसिफ (चिकित्स शोध विज्ञानी) के किसी अपने को एक इंजेक्शन की जरूरत थी. इंडियन ऑयल में कार्यरत इस सीए की दो छोटी-छोटी बच्चियां हैं, की जान पर बनी थी.

एक अन्य ट्वीट में वह सतना (मध्य प्रदेश) की रहने वाली किसी 55 वर्षीय महिला के लिए वेंटिलेटर बेड तलाश रहे थे, जिसका ऑक्सीजन लेवल 74 फीसदी (15 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन पर) पर आ गया था. लेकिन यहां सिर्फ विनीत कुमार का जिक्र करना बाकियों के साथ नाइंसाफी होगी. दृष्यम फिल्म्स के मनीष मुंदड़ा द्वारा किए गए राहत कार्यों की सूची काफी लंबी है. कोरोना पीड़ितों के परिजनों की मदद के लिए अभिनेत्री भूमि पेडनेकर भी पीछे नहीं है. उनके ट्वीटर हैंडल पर सबसे ऊपर एक फॉरमेट मिलता है, जो बताता है कि आपको मदद के लिए चीजें किस क्रम में लिखनी है.

COVID WARRIOR : भूमि पेडनेडकर की पहल. (Photo Credits:bhumipednekar/Instagram)

जॉन अब्राहम ने अपना सोशल मीडिया हैंडल इन दिनों एक एनजीओ को दिया हुआ है, ताकि मदद की गुहार ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाई जा सके. फरहान अख्तर खुद से ऐसा ही करते दिख रहे हैं. रौशन अब्बास, आदिल हुसैन, वरुण ग्रोवर सहित कई अन्य फिल्म कलाकार और मल्लिका दुआ, जेनिस सेकेरा और कपिला कुश जैसे इंफ्लूएंसर्स सहित जाने कितने ही लोग हैं जो फिल्म या मीडिया इंडस्ट्री से हैं और केवल सूचनाओं को अपने मंच से उछाल देकर लोगों की सांसें बचाने के प्रयास कर रहे हैं. फिर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि किसके कितने फॉलोअर्स हैं या किसका क्या रुतबा है. सबका एक ही मकसद है कि मदद की गुहार को अपने सोशल मीडिया मंच द्वारा आगे पहुंचाना और सही एवं पुष्ट जानकारियों का अदान-प्रदान करना.

ये सच है कि दूसरी लहर के सामने जब तमाम सरकारी व्यवस्थाएं कम पड़ गयी या कुप्रबंधन का शिकार मिलीं, तब सोशल मीडिया की ताकत का एक नया रूप देखने को मिला. अनजान लोग एक-दूसरे के ट्वीट को रीट्वीट करने लगे या किसी नामी सितारे को टैग करके आगे भेजते दिखे. हालांकि, कई सितारे सोशल मीडिया का सहारा लेने की बजाय दूसरे तरीकों से मदद करते नजर आए. जैसे, शाहरुख खान की मीर फाउंडेशन कई अलग-अलग तरह से कोविड-19 के प्रति जागरुकता और मदद कार्यों में सक्रिय रही है, साथ ही बीते साल अप्रैल माह में उन्होंने अपने ऑफिस की चार मंजिला इमारत कोविड केयर सेंटर के लिए बीएमसी को दी भी थी. अमिर खान जो कि सोशल मीडिया छोड़ चुके हैं और अक्सर अपनी मदद गुपचुप ही करते हैं. इससे पहले भी पीएम केयर्स फंड या कहीं अन्य डोनेट करते हुए उन्होंने राशि कभी नहीं बताई.

उम्मीद की जा सकती है कि सबसे अमीर एक्ट्रेस होने का दावा करने वाली कंगना रनोट ने भी गुपचुप ढंग से लोगों की मदद की होगी. हालांकि, हर बात पर मुखर हो जाने वाली कंगना ने मदद के बारे में सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहा है. सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाली कंगना कोरोना के खिलाफ लोगों को जागरुक करती नजर नहीं आतीं, जबकि इस मामले में करीना कपूर की सक्रियता सहजता से दिखती है.

(फोटो साभार : anupampkher/Instagram)

वहीं, परेश रावल, उर्मिला मातोडंकर, संजय दत्त, सनी देओल, बाबुल सुप्रियो, मिथुन चक्रवर्ती सहित न जाने कितने नाम है जो बॉलीवुड से राजनीति में जनता की सेवा के नाम पर गए, लेकिन कोरोनाकाल में जब मदद की बात आयी तो जनता के बीच से ही नदारद दिखे. हालांकि अनुपम खेर मदद के लिए सामने आए, लेकिन बहुत देर बाद. दो सप्ताह पहले जब कोरोना अपने चरम पर था और देश में ऑक्सीजन, इंजेक्शन और दवाओं के लिए त्राहिमाम मचा हुआ था, तब अनुपम खेर अपने गैर जरूरी संदेशों की वजह से लोगों की खरी-खोटी सुन रहे थे. अच्छा है अब वह प्रोजेक्ट हील इंडिया, मुहिम के जरिये देशभर में चिकित्सा उपकरणों की मदद पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं.

बिग बी को क्यों पड़ा बताना
शायद ये समय की मांग है कि आप अगर कुछ करते हैं, तो उसकी जानकारी लोगों को होनी चाहिये. कई बार ऐसा ना करके लोगों के कोप का भाजन बनना पड़ सकता है. वरना डोनेशन को लेकर बच्चन साहब को इतना लंबा पोस्ट ना लिखना पड़ता. बीते दिनों खबर आयी कि दिल्ली में बनाए गए एक कोविड केयर सेंटर के लिए अमिताभ बच्चन ने 2 करोड़ रुपये दान किए हैं, जिसके बाद उन पर मंडरा रहे सवालिया निशानों के बादल एकदम से छंट गये. अपने ब्लॉग में वह पूरा-लेखा देते हैं. फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए पीपीई किट्स, किसानों की कर्ज माफी, पलायन कर रहे मजदूरों के लिए जूते-चप्पल, महीनेभर तक 4 लाख लोगों के भोजन की व्यवस्था, कोविड के कारण अनाथ हुए दो बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा (10वीं तक) आदि की जानकारी उन्होंने दी. यह सब बताते हुए उन्होंने भारी शब्दों का इस्तेमाल किया है. ये कहते हुए कि उनके द्वारा मदद कार्यों का उल्लेख उन्हें कितना नागवार गुजर रहा है. पर ये सब उन्हें इसलिए करना पड़ा क्योंकि रोजाना उन्हें भद्दी और अशोभनीय टिप्पणियों का सामना करना पड़ रहा था, जो अब जाकर उनके लिए पीड़ादायी हो गया था.

amitabh bachchan

(photo credit: instagram/@amitabhbachchan)

मशीनरी ही तो सब कुछ नहीं
बिहार की पृष्ठभूमि से आए मनीष मुंदड़ा बॉलीवुड में 6-7 वर्षों से ही सक्रिय है, ने विदेश से ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर की खेप जुटाने में ऐड़ी चोटी का जोर लगा दिया है. वह योजनाबद्ध ढंग से चीजों का बंदोबस्त करते हैं और एक्सपर्ट की सलाह के लिए तैयार रहते हैं. पहली नजर में ऐसा लगता है कि उनके साथ कोई बहुत बड़ी मशीनगीर काम कर रही होगी. ऐसा हो भी सकता है और नहीं भी और शायद कई बार उन्हें निराशा भी हाथ लगती होगी. लेकिन उनमें इच्छाशक्ति की कमी कहीं से नहीं दिखती. हो सकता है कि यह भी एक वजह हो कि वह गलाकाट प्रतिस्पर्धी मायानगरी में आंखों देखी, रामप्रसाद की तेहरवीं, मसान, न्यूटन, कड़वी हवा, आधार, कामयाब और धनक जैसी अर्थपूर्ण फिल्में बना पाए हैं.

सच यह है कि इच्छाशक्ति हो तो मशीनरी का संचालन कुशलता से किया जा सकता है. उधर, विदेश में प्रियंका चोपड़ा सोशल मीडिया के जरिये लगातार भारत को मदद देने की गुहार लगा रही हैं और गिव इंडिया के साथ मिलकर मदद के प्रयासों में तेजी ला रही हैं. प्रियंका चोपड़ा जोनास फॉउंडेशन के जरिए टुगेदर फॉर इंडिया हैशटैग के साथ राहत कार्यों की मुहिम चला रही है. और अभिनेता सोनू सूद जो कर रहे हैं उसे नए सिरे से क्या बयां किया जाए. हाल में उन्होंने केन्द्र एवं राज्य सरकारों से अपील की कि कोविड के चलते पैसों की तंगी कारण जिन छात्रों (स्कूल, कॉलेज या उच्च शिक्षा) की पढ़ाई-लिखाई प्रभावित हुई है हमें उनकी मदद करनी चाहिये. उनकी इस मुहिम के प्रति समर्थन जताते हुए प्रियंका चोपड़ा लिखती हैं- ये अपने आप में एक कमाल का आईडिया है और ये सोनू के स्टाइल से मैच करता है.

कुछ यूं बढ़े मदद को हाथ
एक तरफ जहां कई नामचीन सितारों का अता पता नहीं है, वहीं कईयों के प्रयास सुर्खियों में हैं. सलमान खान के आग्रह पर फेडरेशन आफ वेस्टर्न इंडियन सिने इम्पलायज, (एफडब्ल्यूआईसीई) द्वारा करीब 25 हजार जरूरतमंद वर्कर्स की एक सूची भेजी गई है, जिन्हें 1500 रुपये की मदद दी जाएगी. इनमें टेक्नीशियंस, मेक-अप आर्टिस्ट, स्टंटमैन और स्पाटब्वाय आदि शामिल हैं. एफडब्ल्यूआईसीई द्वारा यश राज फिल्म्स को भेजी गई करीब 35 हजार वर्कर्स की लिस्ट की जांच के बाद राहत प्रदान की जाएगी. बैनर की ओर से हर वर्कर को 5 हजार रुपये महीना राशन, स्कूल फीस, मेडिकल खर्च और घर के किराए के लिए वित्तीय सहायता राशि के रूप में दिया जाएगा तथा और चार सदस्यों वाले परिवार को एक महीने का राशन भी मुहैया कराया जाएगा. बैनर द्वारा पूरी फिल्म इंडस्ट्री के वकर्स को फ्री वैक्सीन लगवाने की पहल भी की गयी है तथा सरकार से 60 हजार वैक्सीन के डोज मुहैया कराने की मांग की गई है.

sonu sood, salman khan

ये वाकई एक बड़ा सराहनीय कदम है, लेकिन क्या इससे सिने एंड टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन (सिंटा) के सदस्य भी लाभांवित होंगे? ये भी एक मुद्दा है. क्योंकि द्वारा सिने वर्कर्स को आर्थिक राहत प्रदान किए जाने हेतु राशि जुटाने के प्रयास अलग से किए जा रहे हैं, जिन पर कोई ठोस पहल सामने नहीं आयी है. इसके अलावा सिंटा लगातार मांग कर रहा है कि प्रोडक्शन के दौरान निर्माता-बैनर, स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) को लेकर ज्यादा ध्यान दें और वर्कर्स की सुरक्षा के बारे में गंभीरता से सोचें. पिछले दिनों संगठन द्वारा बाकायदा बयान जारी कर बताया गया कि कैसे अलग-अलग जगह शूटिंग स्थलों पर कोविड के प्रति बरती गयी लापरवाही के कारण वर्कर्स की जानें गईं. दि इंडियन परफॉर्मिंग राईट्स सोसाइटी (आईपीआरएस), ने भी कोरोना महामारी के मद्देनजर आपातकालीन फंड जारी करने का ऐलान किया है, जिससे 3 हजार से अधिक लेखक, कंपोजर्स, गीतकार आदि को सहायता मिलेगी.

दूसरी तरफ करण जौहर की धर्माटिक एंटरटेन्मेंट, युवा (संगठन) के साथ मिल कर वैक्सीनेशन और मानसिक स्वास्थ्य पर जागरुकता अभियान चला तो रहे हैं. अक्षय कुमार ने गौतम गंभीर की संस्था को एक करोड़ की राशि डोनेट की है. उनकी पत्नी ट्विंकल खन्ना ने दिल्ली, पंजाब और मुंबई के लिए 250 ऑक्सीजन कन्संट्रेटरों (ओसी) का इंतजाम किया है, जिसका वितरण उदय फॉउंडेशन, खालसा ऐड इंडिया, हेमकुंत फॉउंडेशन द्वारा किया जा रहा है. इस मुहिम के लिए ट्विंकल खन्ना, दैविक फॉउंडेशन और आनंदा के साथ जुड़ी हैं. और उन्हें ये सब जुटाने में शायद 10-12 दिन का समय लगा होगा. यानी साधन, संसाधन संपन्न इंसान अगर इच्छाशक्ति के साथ जरा सा दिमाग लगाए और हाथ-पैर मारे तो क्या नहीं हो सकता. और जो करता है उसका काम जमीन पर दिखता भी है. इस समय दिखाने और बताने की जरूरत इसलिए भी है, ताकि बाकी लोग प्रेरित हों और आगे आएं.

अब अजय देवगन को ही लीजिए, जिन्होंने निर्माता आनंद पंडित के साथ मिलकर मुंबई में तीन अलग-अलग स्थानों पर कोविड केयर सेंटर (कुल 75 बेड़्स) स्थापित करने में जुटे हैं. पिछले दिनों विराट कोहली और अनुष्का शर्मा ने 2 करोड़ की सहायता राशि देने का ऐलान किया, कैटो (फंड जुटाने वाला एक मंच) के जरिये 7 करोड़ की राशि जुटाने का लक्ष्य भी रखा. हालांकि 24 घंटों के भीतर ही 3 करोड़ से अधिक राशि जुटा ली गई और करीब एक हफ्ते से भी कम समय में इस जोड़ी ने अपने लक्ष्य से ज्यादा राशि जुटा ली है.

Ajay Devgn

 (फोटो साभार- @ajaydevgn/Instagram)

कई बड़ी कोशिशों के बीच कुछ छोटे-छोटे प्रयास भी किए जा रहे हैं. अभिनेता हर्षवर्धन राणे ने अपनी मोटरबाइक बेचकर तीन ऑक्सीजन कन्संट्रेटरों का इंतजाम करके हैदराबाद के एक अस्पताल में भिजवाया. अभिनेत्री उर्वशी रौतेला ने अपनी फाउंडेशन के जरिये उत्तराखंड में ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर दिए हैं. वरुण धवन मिशन ऑक्सीजन को सपोर्ट कर रहे हैं और टाटा ट्रस्ट के साथ मिलकर बेघर लोगों तथा कोविड के कारण बेरोजगार हुए लोगों के भोजन की व्यवस्था करा रहे हैं. सारा अली खान ने ऑक्सीजन सिलेंडरों के लिए सोनू सूद की फॉउंडेशन को सहायता राशि दान की है. उधर, रवीना टंडन ने भी रुद्र फाउंडेशन के साथ मिलकर दिल्ली के लिए 100 ऑक्सीजन सिलेंडर भेजे हैं और 400 सिलेंडर का उनका लक्ष्य है. हुमा कुरेशी दिल्ली में ऑक्सीजन से लैस बेड्स के इंतजाम को लेकर राशि जुटा रही हैं. आई ब्रीद फॉर इंडिया के तहत लारा दत्ता भी सहायता राशि जुटा रही हैं. इस मुहिम से जिसमें अमिताभ बच्चन, अनुपम खेर, अनिल कपूर, कृति सैनन, करण जौहर, राणा दग्गूबती, शेखर कपूर, रितेश और जेनेलिया देशमुख आदि भी जुड़े हैं.

(नोट- ये लेखक के न‍िजी व‍िचार हैं.)



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