मसीहा की स्मृति शेष: चले गए सैकड़ों गरीबों के बच्चों को मुकाम दिलाने वाले DD भारद्वाज, 86 की उम्र में देहरादून में ली रिटायर्ड IAS ने अंतिम सांस

0
2


Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

फरीदाबाद/बटाला15 मिनट पहलेलेखक: बलराज सिंह

  • कॉपी लिंक

पंजाब के बटाला इलाके के गांव मिर्जा जान से ताल्लुक रखते रिटायर्ड IAS DD भारद्वाज। इन दिनों वह फरीदाबाद में रह रहे थे और बीते दिन देहरादून में अंतिम सांस ली। -फाइल फोटो

गुरदासपुर जिले के गांव मिर्जा जान की मिट्‌टी के लाल और रिटायर्ड IAS अधिकारी DD भारद्वाज का निधन हो गया। 86 वर्ष की उम्र में शुक्रवार को उन्होंने उत्तराखंड के देहरादून में अपनी अंतिम सांस ली। इस खबर के फैलते ही न सिर्फ पैतृक गांव मिर्जा जान में, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों के गरीब मजदूर और किसानों के मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई। कारण, बरसों से इन मोहल्लों में रहते जरूरतमंद परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चे भारद्वाज को अपने मुकद्दर का मसीहा मानते आ रहे थे। उन्हें सब प्यार से वीर जी कहते थे।

DD भारद्वाज के परिजनों ने बताया कि पंडित प्रकाशचंद के बड़े बेटे के रूप में जन्मे यह शख्स गांव मिर्जा जान की पहली पंचायत के 10 साल तक सर्वसम्मति से सरपंच रहे। गांव के ही सरकारी स्कूल से पढ़कर देश के बड़े IAS अधिकारी बने। उनका बेटा लवकेश भारद्वाज, बेटी सुनीता गंगोपाध्याय, चित्रा और डेजी विदेशों में उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद दुनिया की बड़ी जानी-मानी कंपनियों में पिछले बीस-तीस साल से प्रतिष्ठित पदों पर अपनी सेवाए दे रहे हैं।

अपने सरकारी कार्यकाल के दौरान DD भारद्वाज ईमानदार रहे। देश के करोड़ों लोगों के जीवन में बेहतर बदलाव लाने के लिए अलग-अलग सरकारों में शुरू की गई अरबों की योजनाओं के लागू होने के बाद उनमें खुलने वाले सरकारी और राजनीति भ्रष्टाचार के दरवाजे पूरी सख्ती से बंद करने वाले देशभक्त अधिकारी के तौर पर जाने जाते रहे हैं।

मुंबई में ऑडिट विभाग में मजिस्ट्रेट के अलावा दिल्ली में टैलीकॉम विभाग में DGM भी रहे और कुछ राज्यों में डिप्टी कमिश्नर की सेवाएं भी निभाते रहे। वह गांव के जिस स्कूल से पढ़े, उसमें हर साल 9वीं-10वीं में पहले तीन रैंक पर आने वाले विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप देते आ रहे थे।

अब लंबे अर्से से हरियाणा के फरीदाबाद में रह रहे थे। वहां रिटायर्ड IAS और अन्य रिटायर्ड गजटेड अधिकारियों का क्लब बनाकर गांव-देहात की गरीब प्रतिभाओं को ऊंचा मुकाम दिलाने के मिशन में जुटे हुए थे, वह भी बिना सुर्खियों में आए। कुछ दिन पहले ही गर्मियों का मौसम बिताने के लिए पत्नी के साथ उत्तराखंड में लिए अपने दूसरे घर में गए थे। वहींं शुक्रवार को अंतिम सांस ली।

उनके निधन पर विभिन्न राजनैतिक, धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी दुख प्रकट किया है। वहीं ब्राह्म्ण सभा पंजाब के बटाला प्रधान राजेश शर्मा ने कहा कि DD भारद्वाज ब्राहम्ण कुल का गौरव थे। कोरोना काल खत्म होने के बाद बटाला ब्राह्मण सभा की ओर से इस ब्राह्मणरत्न की आत्मा की शांति के लिए 101 हवन कुंडों में अग्नि प्रज्ज्वलित करके हवन किया जाएगा।

एक किस्सा, भारद्वाज के बनाए इंजीनियर की जुबानी
भारद्वाज की स्कॉलरशिप से अपना मुकद्दर संवार चुके बटाला के ही एक नजदीकी गांव के सरकारी स्कूल से पढ़े गुरजोत ने बताया कि उसके पिता एक गरीब मजदूर परिवार ताल्लुक रखते थे। घर का रोटी-पानी भी मुश्किल से चलता था। वह पढ़ाई में बहुत होशियार था। दसवीं कक्षा में फर्स्ट आया। स्कूल वालों कहा कि 11वीं-12वीं नॉन मेडिकल से पढ़ाई करके इंजीनियर बनने की सलाह दी। जब दुकान पर जाकर पता किया जो किताबें पिता की जेब की औकात से बाहर थी। दुकानदार ने कहा कि किताबों के लिए पैसे नहीं हैं तो कल को महंगे ट्यूशन के लिए कहां से आएंगे। इंजीनियर बनने का ख्वाब सिर्फ अमीरों के बच्चे ही देख सकते हैं। गुरजोत बेबस होकर आंसू बहा ही रहा था कि तभी घर में फोन पर घंटी बजी। सामने वाले ने पहले तो क्लास में फर्स्ट आने पर मुबारकबाद दी और भविष्य की योजना के बारे में पूछा तो न चाहते हुए समस्या बताई। जवाब मिला, ‘तुम सिर्फ पढ़ने की चिंता करो, किताबों और ट्यूशन की चिंता मुझ पर छोड़ो’। भरोसे का यह नाम ही DD भारद्वाज था। उन्होंने गुरजोत को 5 हजार रुपए स्कॉलरशिप देनी शुरू कर दी। गुरजोत ने सरकारी इंजीनियर कॉलेज से इंजीनियरिंग की। अब वह एक मल्टी नेशन कंपनी में IT मैनेजर है। पिता की भी मजदूरी छुड़वा दी है, शादी कर ली है। बच्चे भी कॉन्वेंट स्कूलों मे पढ़ रहे हैं।
बकौल गुरजोत, मैंने DD भारद्वाज को पूछा कि आपका कर्ज कैसे उतारूंगा तो उन्होंने हंसते हुए कहा कि अब तुम अफसर बन गए हो। जब तुम अपनी जिंदगी में किसी गांव-देहात के सरकारी स्कूल में पढ़ते कम से कम 5 प्रतिभाशाली गरीब बच्चों की अफसर बनने में मदद कर सको, उस दिन समझ लेना मेरा कर्ज उतर गया।

खबरें और भी हैं…



Source link

Advertisement

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here