भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट: जोशीले नारों से शीतलहर को चीर रहे किसान; पुलिस का फोकस- वे दिल्ली में न घुसें

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गाजीपुर (दिल्ली) बॉर्डर से37 मिनट पहलेलेखक: एम. रियाज हाशमी

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गाजीपुर बॉर्डर पर डटे युवा स्थानीय भाषा में गा-गाकर जोश भर रहे हैं।

दिल्ली का गाजीपुर अब किसान आंदोलन में किसी भी तरह हरियाणा से लगे सिंघु और टिकरी बॉर्डर से कम नजर नहीं आ रहा है। रविवार को शीतलहर के प्रकोप का पहला दिन है। लेकिन उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के किसानों के जोश के आगे यह ठंड नाकाफी महसूस हो रही है। एक तरफ किसान यूनियन तो दूसरी तरफ अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के कार्यकर्ता किसानों में जोश भर रहे हैं।

भाषण देते और स्थानीय भाषा में राग सुनाते किसानों के इस रेले को किसी भी तरह दिल्ली में न घुसने देने पर ही पुलिस फोर्स का पूरा फोकस है। किसान अब केंद्र सरकार की मंशा भांपकर मीडिया और नेताओं को उतना ही बता रहे हैं, जिससे सरकार को लगे कि किसान दिग्भ्रमित हैं या इनमें फूट पड़ चुकी है। लेकिन रणनीतिक बातें सिर्फ शामियानों या कारों के भीतर बैठकर ही की जा रही हैं।

बीते तीन दिनों में यहां किसानों का जमावड़ा बेतहाशा बढ़ा है। किसान नेता सरदार वीएम सिंह कह रहे हैं- ‘पंजाब वाले चले भी जाएं, लेकिन हम नहीं जाने वाले हैं। हमें एमएसपी की गारंटी देने वाला ऐसा कानून चाहिए, जिसमें एमएसपी से कम खरीद पर कड़ी सजा का प्रावधान हो।’ केंद्र सरकार द्वारा एमएसपी की सहमति के सवाल पर वे कहते हैं- ‘केंद्र सरकार किसानों को भ्रमित न करे, बल्कि एमएसपी की गारंटी वाला कानून लाए। कितना समय लगता है?’

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत स्थानीय भाषा में अपने समर्थकों से बतिया रहे हैं। कह रहे हैं- ‘यू सरकार इक्कर ना मान्नेगी, इब तो लगे लट्ठ ही ठाना पड़ैगा। अरे हम तो 24 घंटों बात करणे कू तैयार हैं, हमन कब ना करी।’ उधर, शनिवार को टोल फ्री कराने के बाद अब किसान नेता अपने समर्थकों के साथ भाजपा के सांसदों, मंत्रियों और विधायकों के आवासों का घेराव करने की रणनीति बना रहे हैं।

गाजीपुर बॉर्डर और यूपी से दिल्ली की ओर आने वाले रास्तों पर अब टेंट लग चुके हैं। घर का चूल्हा-चौका छोड़कर शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद और बरेली के किसान परिवारों की महिलाएं भी अब आंदोलन स्थल पर आ डटी हैं। ठेठ देहाती भाषा में इनके संवाद हर किसी की समझ में नहीं आते हैं।

बागपत के सूजरा गांव की वृद्धा किसान सुमित्रा तोमर एक रिपोर्टर से पूछ रही हैं, जिसका सार यह है कि गांव में 10 किलो मूली दस रुपए में बिक रही है तो यह तुम्हारे शहर में कितने की बिकती है? इस बीच यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ शनिवार को पहले मुरादाबाद और फिर गाजियाबाद और रविवार को मेरठ पहुंचे। वे किसान आंदोलन की नब्ज टटोलने की कोशिश कर रहे हैं।



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