भास्कर खास: वे मरीजों का इलाज करेंगे! जिन डाॅक्टरों ने परीक्षा पास नहीं की, उनके हाथों में मरीजों की जान कैसे सौंपी जा सकती है- सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्लीएक घंटा पहलेलेखक: पवन कुमार

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कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई 18 जून को तय की है।

  • शीर्ष कोर्ट ने देशभर में पीजी मेडिकल की फाइनल परीक्षा रद्द करने की मांग खारिज की

देशभर में पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल की फाइनल परीक्षा को रद्द करने की मांग सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा कि वे परीक्षा रद्द करने का आदेश जारी नहीं कर सकते, क्योंकि यह एक शैक्षिक नीति का मामला है। पीठ ने सुनवाई के दौरान पूछा,‘वे मरीजों का इलाज करेंगे। वैसे भी जिन डाॅक्टरों ने परीक्षा नहीं दी, उनके हाथों में मरीजों की जान कैसे सौंपी जा सकती है?

हालांकि कोर्ट ने उक्त मामले में अन्य मांगों जैसे मेडिकल छात्रों को आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर पदोन्नत करने और इस मुद्दे पर एक संयुक्त विशेषज्ञ कमेटी के गठन की मांग पर केंद्र सरकार व एम्स को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। दरअसल, पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स के फाइनल ईयर के कुछ डाॅक्टरों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।

इसमें डाक्टरों ने परीक्षा रद्द करने और आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर उनका रिजल्ट घोषित करने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने कहा कि डाॅक्टरों ने पोस्ट ग्रेजुएशन के तीन साल पूरे किए हैं। कोरोना के कारण फाइनल ईयर की परीक्षा नहीं होने के कारण वे अधर में लटके हुए हैं।

आपातकालीन स्थिति को देखते हुए बिना परीक्षा लिए उनके पिछले तीन साल के आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर रिजल्ट घोषित किया जाए। हेगड़े ने कोर्ट से कहा कि यह कोई पहली बार नहीं होगा। भारत-चीन युद्ध के दौरान भी पीजी छात्रों को परीक्षा दिए बिना स्नातकोत्तर होने की अनुमति दी गई थी।

संजय हेगड़े ने कोर्ट से अनुरोध किया कि वह राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग से पूछ लें कि इस मुद्दे पर वे कुछ कर सकते हैं या नहीं? अगर कर सकते हैं तो इसका प्रस्ताव कोर्ट में पेश करें। इस पर जस्टिस बनर्जी ने कहा कि हम समझते हैं आप क्या कहना चाह रहे हैं। मगर अहम सवाल यह है कि क्या हम यह कह सकते हैं कि परीक्षाएं नहीं होंगी। कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई 18 जून को तय की है।

हम यह कैसे कह सकते हैं कि परीक्षा नहीं होनी चाहिए: जस्टिस बनर्जी

जस्टिस बनर्जी ने कहा कि कोर्ट परीक्षा के आयोजन को लेकर मनमानी या परीक्षा टालने संबंधी मांग पर तो विचार कर सकती है,पर हम यह कैसे कह सकते हैं कि परीक्षा नहीं होनी चाहिए। यह एक नीतिगत निर्णय है। मेडिकल परीक्षा में छूट देना व्यापक हित में नहीं है। हमारी शक्ति की भी कुछ सीमाएं हैं।

हम इस बहस में नहीं जाना चाहते कि परीक्षाएं हो या नहीं? जस्टिस शाह ने कहा कि इन सभी डाॅक्टरों को सीनियर रेजीडेंट डाॅक्टर बनना है, उसके बाद ये मरीजों का इलाज करेंगे। इससे पहले उन पर मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी कैसे सौंपी जा सकती है।

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