भारत ने 2016 से 2019 के बीच विदेशी रिश्वत को लेकर कोई जांच नहीं की, इन 4 साल में अमेरिका समेत 4 देशों ने सख्त कदम उठाए

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  • India Did Not Launch A Single Investigation Into Cases Of Foreign Bribery Between 2016 And 2019.

नई दिल्ली23 मिनट पहले

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ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार के केसों की जटिलता को दूर करने के लिए कानूनों को सख्त करने और उनको लागू करने का आग्रह किया है।

  • ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने विदेशी रिश्वत पर कार्रवाई की रिपोर्ट जारी की
  • भारत, चीन, जापान समेत कई देशों का ट्रैक रिकॉर्ड काफी खराब

देश में भ्रष्टाचार पर सख्ती बरतने वाली केंद्र की मोदी सरकार विदेशी रिश्वत पर शिकंजा कसने में विफल रही है। भ्रष्टाचार के बढ़ते खतरे के बावजूद भारत ने 2016 से 2019 के बीच विदेशी रिश्वत को लेकर कोई जांच नहीं की है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। ‘एक्सपोर्टिंग करप्शन 2020’ नाम की इस रिपोर्ट में कहा गया है ओईसीडी के 47 में से केवल 4 देशों ने विदेशी रिश्वत के खिलाफ सक्रिय रूप से कानून लागू किया है। इन 4 देशों की ग्लोबल एक्सपोर्ट में 16.5 फीसदी हिस्सेदारी है।

2018 के बाद से रिश्वत-मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में गिरावट

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2018 से दुनियाभर में रिश्वत और मनी लॉन्ड्रिंग घोटालों से जुड़ी जांच में गिरावट आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े वैश्विक निर्यातक देशों चीन, जापान, नीदरलैंड, दक्षिण कोरिया, हॉन्गकॉन्ग, कनाडा, भारत और मैक्सिको का ट्रैक रिकॉर्ड विदेशी रिश्वत की जांच के मामले में काफी खराब है।

चीन में भी भारत जैसे हालात

रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी रिश्वत की जांच को लेकर चीन में भी भारत जैसे हालात हैं। चीन ने भी 2016 से 2019 के बीच विदेशी रिश्वत को लेकर कोई जांच नहीं की है। जबकि दूसरे देशों में कई घोटालों में चीन की कंपनियों का नाम शामिल रहा है। ओईसीडी से अलग दो प्रमुख देशों हॉन्गकॉन्ग और भारत ने भी इस अवधि में विदेशी रिश्वत को लेकर एक भी जांच नहीं की है। इन चार सालों में केवल सालों में सिंगापुर ने केवल एक जांच की है और एक केस का निपटारा किया है।

केवल इन चार देशों ने की रिश्वत की जांच

रिपोर्ट के मुताबिक, केवल अमेरिका, ब्रिटेन, स्विटजरलैंड और इजराइल ने बीते चार सालों में विदेशी रिश्वत के खिलाफ जांच की है। ग्लोबल एक्सपोर्ट में 3.5 फीसदी और 2 फीसदी हिस्सेदारी वाले फ्रांस और स्पेन की स्थिति में भी सुधार आया है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के सीनियर एडवाइजर और इस रिपोर्ट के प्रमुख लेखक गिलियन डैल का कहना है कि भ्रष्टाचार के एयरबस, एडॉबरेचट और अन्य मामलों के बावजूद कई देशों ने विदेशी रिश्वत के मामलों की जांच नहीं की है।

कंपनी ओनरशिप की गोपनीयता खत्म हो

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कंपनी ओनरशिप की गोपनीयता खत्म होनी चाहिए। यह जांच में बाधा बनती है। साथ ही विदेशी रिश्वत को पीड़ित रहित अपराध के तौर पर देखना बंद करना चाहिए। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार के केसों की जटिलता को दूर करने के लिए कानूनों को सख्त करने और उनको लागू करने का आग्रह किया है।



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