प्लास्टिक वेस्ट का सही निपटारा नहीं करने पर फ्लिपकार्ट-पतंजलि पेय को नोटिस, काम बंद करने को कहा

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नई दिल्ली11 घंटे पहले

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प्रदूषण (प्रोटेक्शन) एक्ट 1986 के सेक्शन 5 के तहत प्रदूषण से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने पर कंपनी की बिजली और पानी की सप्लाई बंद की जा सकती है।

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दोनों कंपनियों को 8 अक्टूबर को नोटिस भेजा
  • ईपीआर से जुड़ी जिम्मेदारी नहीं निभाने पर कोका कोला-पेप्सी से जवाब मांगा

देश की दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट और पतंजलि पेय प्लास्टिक वेस्ट का नियमों के मुताबिक निपटारा नहीं कर रही हैं। इसको लेकर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने दोनों कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सीपीसीबी ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में यह जानकारी दी है।

8 अक्टूबर को जारी किया नोटिस

सीपीसीबी ने एनजीटी में कहा है कि प्रदूषण (प्रोटेक्शन) एक्ट 1986 के सेक्शन 5 के तहत फ्लिपकार्ट और पतंजलि को यह नोटिस 8 अक्टूबर को जारी किया गया है। नोटिस में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट (अमेडमेंट) रुल्स-2018 का पालन नहीं करने पर दोनों कंपनियों से ऑपरेशन बंद करने और पर्यावरण कंपनसेशन देने के लिए कहा गया है। सीपीसीबी ने कहा है कि दोनों कंपनियां उसके पास रजिस्टर्ड भी नहीं हैं। साथ ही दोनों कंपनियों ने अभी तक इस मामले में कोई कम्युनिकेशन नहीं किया है।

कोका-कोला, पेप्सी समेत चार अन्य कंपनियों को भी नोटिस

सीपीसीबी ने एनजीटी को बताया कि हिन्दुस्तान कोका-कोला बेवरेजेस, पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड, बिस्लेरी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड और मैसर्स नूरिस्को बेवरेजेस लिमिटेड उसके पास रजिस्टर्ड हैं। हालांकि, इन चारों कंपनियों ने एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पांसिबिलिटी (ईपीआर) जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए एक्शन प्लान के बारे में जानकारी नहीं दी है। इन कंपनियों की ओर से दाखिल किए गए कागजात का राज्यों के प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने समर्थन नहीं किया है। इस कारण इन चारों कंपनियों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

क्या कहता है प्रदूषण (प्रोटेक्शन) एक्ट 1986 का सेक्शन-5

प्रदूषण (प्रोटेक्शन) एक्ट 1986 के सेक्शन 5 के तहत यदि कोई कंपनी या अथॉरिटी प्रदूषण से जुड़े नियमों का उल्लंघन करता है तो केंद्र सरकार ऐसी कंपनी या अथॉरिटी को बंद करने, प्रतिबंध लगाने या ऑपरेशन को बंद करने का नोटिस जारी कर सकता है। साथ ही ऐसी कंपनी या अथॉरिटी की बिजली-पानी की सप्लाई को रोका जा सकता है। केंद्र सरकार की ओर से सीपीसीबी और राज्य सरकारों की ओर से राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यह कार्यवाही कर सकते हैं।



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