पुलिस-जेल अधिकारियों पर दो हाईकोर्ट सख्त: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा आप कैदी को पीटें, इसका मतलब है हम पीट रहे हैं; तिहाड़ जेल के अफसरों से कहा-आप हमारे एजेंट, कैदी हमारी अभिरक्षा में

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नई दिल्ली6 घंटे पहले

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कोर्ट ने कहा कि जेल परिसर कोर्ट और जजों का बैकरूम है।

जेल के अधिकारियों और पुलिस की कथित ‘कार्रवाई’ पर देश के दो हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। जेलों के भीतर कैदियों के साथ होने वाली मारपीट और बर्बरता को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने तिहाड़ जेल के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई है।

तिहाड़ जेल में बंद एक कैदी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अनूप जयराम भंभानी और जसमीत सिंह की अवकाश बेंच ने कहा कि हमें जेल विभाग को यह बताते हुए बड़ा दुख है कि जेल में होने वाली मारपीट की वजह से लोग भारत में प्रत्यर्पण का विरोध करते हैं। वे जाकर कहते हैं देखो, भारतीय जेलों में क्या हो रहा है। वहां कैदियों की पिटाई होती है, हमें वहां मत भेजो। कोर्ट ने कहा कि समस्या यह है कि जेल प्रशासन इस बात को मानता ही नहीं कि वे लोगों की पिटाई करके कुछ गलत कर रहे हैं।

कोर्ट ने कहा- ‘क्या आप किसी व्यक्ति के मेरे चैंबर में लाकर पीटेंगे, तो क्या हम उसे सही कहेंगे। व्यक्ति हमारी यानी कोर्ट की अभिरक्षा में है, आप सिर्फ हमारे एजेंट हैं। यदि आप किसी कैदी की पिटाई करते हैं तो इसका अर्थ है कि हम यानी जज उनकी पिटाई कर रहे हैं।’ कोर्ट ने कहा कि जेल परिसर कोर्ट और जजों का बैकरूम है।

दिल्ली के स्टेंडिंग काउंसिल संजय लाओ ने जेल अधिकारियों का पक्ष रखते हुए कहा कि बचाव पक्ष के वकील अपने पक्षकार को संत और जेल अधिकारियो के अपराधी के रूप में पेश कर रहे हैं। लाओ ने कहा कि अमेरिकी जेलों में इससे भी बुरा हो रहा है, तो कोर्ट ने कहा कि क्या हम किसी दूसरे देश से रेस लगा रहे हैं?

दिल्ली हाईकोर्ट में उक्त याचिका लगाने वाले कैदी ने स्वयं को तिहाड़ से अन्य जेल में भेजे जाने की मांग की है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता कैदी की शिकायत का 5 दिनों में समाधान करने और उसे किसी अन्य जेल में शिफ्ट करने पर विचार करने के लिए डीजी जेल को निर्देश दिए हैं।
क्या हम लोगों को पहले मारें, फिर पैसे फेंककर कह सकते हैं कि हमारा काम पूरा हो गयाः मद्रास हाईकोर्ट
इधर, मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै खंडपीठ ने पुलिस अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि क्या हम लोगों को मारकर और उनपर पैसे फेंककर कह सकते हैं कि हमारा काम पूरा हो गया? क्या हम इसी तरह का समाज बनाना चाहते हैं? चीफ जस्टिस संजीव बनर्जी ने वेदांता कॉपर के विरोध के दौरान पुलिस फायरिंग में मारे गए लोगों के परिजनों को अनुग्रह राशि देने का जिक्र करते हुए यह बात कही। तूतीकोरन में मई 2018 में पुलिस फायरिंग में 13 लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले पर एक एक्टिविस्ट ने जनहित याचिका लगाई थी।

चीफ जस्टिस की कानून मंत्री को चिट्ठी-कनेक्टिविटी सुधारें

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमना ने कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को चिट्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने गांवों, आदिवासी, दूरदराज और पहाड़ी इलाकों में खराब डिजिटल कनेक्टिविटी सुधारने के लिए कदम उठाने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस आरवी रवींद्रन द्वारा लिखित पुस्तक ‘एनोमलीज इन लॉ एंड जस्टिस’ के विमोचन पर सीजेआई ने कहा, ‘कनेक्टिविटी बेहतर न होने से न्याय वितरण की गति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

तकनीकी असमानता के कारण वकीलों की एक पूरी पीढ़ी को व्यवस्था से बाहर किया जा रहा है।’ उन्होंने बताया कि उन्होंने सरकार से उन वकीलों की मदद करने का अनुरोध किया है जो कोरोना में अपनी आजीविका खो चुके हैं और उन्हें वित्तीय सहायता की सख्त जरूरत है।

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