पुरानी दिल्ली में 70 सालों से जिंदा है स्वाद का ये कारोबार, दम आलू और कचौड़ी खाकर मुंह से निकलेगा- वाह

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(डॉ. रामेश्वर दयाल)

Yummy Dum Aloo, Kachori At Sanjay Kachori Wala In Old Delhi: घर पर मम्मी के हाथों से बने दम आलू तो आपने खाए ही होंगे. रेस्तरां भी गए होंगे तो एकाध बार दम आलू डिश टेस्ट कर ली होगी. लेकिन आज हम आपको ऐसे दम आलू का मजा चखाते हैं जो आपका ‘दम ही निकाल’ देगा. लेकिन स्वाद इतना लाजवाब है कि खाते वक्त चेहरा तमतमाने लगे या आंख से आंसू निकल आए, लेकिन खाए बिना मन नहीं मानेगा. इस दम आलू को बनाने का तरीका भी निराला है, जो इसे स्वादिस्ट बनाता है. दुकान पर कचौड़ी भी मिलती है, लेकिन लोग दम आलू के लिए ही जुटते हैं. इलाके में दुकान का इतना नाम है कि तीन घंटे में ही सब कुछ निपट जाता है.

साबुत आलूओं को सबसे पहले भाड़ में भूना जाता है

पुरानी दिल्ली की ज्यूलरी मार्केट दरीबा कलां में जब आप प्रवेश करेंगे तो किनारी बाजार के एन्ट्रेन्स के पास लगता है यह संजय कचौड़ी वाले का ठीया. याद रखिए कि यह शाम ढलने के बाद लगता है, जब दरीबा बाजार की दुकानें बंद होने लगती हैं. सबसे पहले दम आलू की बात करें जिसकी डिश ‘विलक्षण’ तरीके से बनाई जाती है. साबुत आलू को पहले भाड़ (देसी तंदूर) में भूना जाता है. फिर आलूओं को छीलकर साबुत ही वनस्पति में डीप फ्राई किया जाता है. दम आलू के लिए अलग से स्पेशल करी बनाई जाती है जिसका स्वाद अजब-गजब है. इसमें काली मिर्च, जावित्री, छोटी व बड़ी इलायची, दालचीनी और अन्य खड़े मसाले कूटकर मिलाए जाते हैं.

7 बजे ठीया सजता है और रात 10 बजे सारा माल खत्म हो जाता है.

इसलिए ‘दम’ सा निकालते प्रतीत होता है यह दम आलू

इन दम आलू के पेश होने का तरीका देखिए. दोने में एक साबुत आलू और करी डाली जाती है. ऊपर से तीखी कटी हरी मिर्च, हरा धनिया व नींबू का छिड़काव किया जाता है. आप समझ ही गए ही होंगे कि खाते वक्त दम आलू ‘दम’ सा क्यों निकालते प्रतीत होते हैं. लोग आते हैं, गरमा-गरम दम आलू खाते हैं. खाते वक्त उनको देखो तो ऐसा लगेगा कि वह अजीब सा मुंह बना रहे हैं, आंख से आंसू बह रहे हैं लेकिन उनका खाना नहीं रुकता. इलाके के कई बुजुर्ग भी इस दम आलू के दीवाने हैं लेकिन दुकानदार उन्हें खिलाते वक्त हरी मिर्च, नींबू आदि पर हाथ रोक-के रखता है. एक दम आलू-करी का दोना 30 रुपये में उपलब्ध है.

कचौड़ी की पिट्ठी में भी भरे जाते हैं तीखे मसाले

इस ठीए पर कचौड़ी का स्वाद भी लाजवाब है. कचौड़ी समेत सारा सामान घर में ही तैयार किया जाता है. कचौड़ी में दाल की पिट्ठी और तीखे मसाले मिलाए जाते हैं. खास बात यह है कि कचौड़ियों के साथ छोले परोसे जाते हैं लेकिन ऊपर से दम आलू की करी भी डाली जाती है तो छोलों का स्वाद उभर आता है. साथ में कटी तीखी हरी मिर्च, हरा धनिया व नींबू इसके स्वाद में और तड़का लगा देते हैं. दो कचौड़ी की कीमत 30 रुपये है. खाने वाले लोगों से बात करो तो वे बताते हैं कि इनकी डिश खासी तीखी तो है, लेकिन वह पेट पर भारी नहीं पड़ती.

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जब दरीबा बाजार बंद हो जाता है तब रौनक फैलाता है ठीया

इस ठीए को करीब 70 साल पहले नौबतराम शर्मा व उनके भाई मुंशीराम शर्मा ने लगाना शुरू किया. फिर उनके बेटे ललिता प्रसाद ने ठीया संभाला. आज उनके दोनों बेटे संजय शर्मा व नितिन शर्मा बागडोर संभाल रहे हैं. यह परिवार पुरानी दिल्ली का ही निवासी है. परिवार के अन्य रिश्तेदार भी अन्य इलाकों में यही इसी तरह की दुकान चलाते हैं. जब दरीबा बाजार बंद हो जाता है, तब रात 7 बजे इनका ठीया सजता है और रात 10 बजे सारा माल खत्म हो जाता है. रविवार के दिन चूंकि बाजार बंद होता है, इसलिए दोपहर एक बजे काम शुरू हो जाता है.

नजदीकी मेट्रो स्टेशन: लाल किला



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