पश्चिम बंगाल विस चुनाव 2021: 5 क्षेत्रीय पार्टियों ने मिलाया बीजेपी से हाथ, ममता के लिए बदलेंगे समीकरण!

0
2


गोरखा जन्मुक्ति मोर्चा के नेता गुरुंग ने तृणमूल कांग्रेस को अपना समर्थन देने का फ़ैसला किया है. (फाइल फोटो)

West Bengal Assembly Election 2021: पिछले साल बीजेपी ने दार्जिलिंग लोकसभा और विधानसभा दोनों सीट पर जीत हासिल की थी पर कई लोगों का मानना है कि अगर बीजेपी इस क्षेत्र के लोगों के लिए कोई ठोस उपलब्धि हासिल नहीं कर पायी तो उसको इस क्षेत्र में अपनी साख बचानी मुश्किल हो जाएगी.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    December 24, 2020, 12:15 AM IST

पार्थ प्रतिम सरकार

पहले इस बारे में अटकलें लगायी जा रही थी कि पहाड़ की तीन सीटों पर 2021 में किसका क़ब्ज़ा होगा. पर अब अचानक इस प्रश्न का उत्तर बदल गया है क्योंकि गोरखा जन्मुक्ति मोर्चा के नेता गुरुंग ने तृणमूल कांग्रेस को अपना समर्थन देने का फ़ैसला किया है. अब तृणमूल का आंकलन है कि गोरखा जन्मुक्ति मोर्चा के दो नेताओं का समर्थन पाने के बाद अब उसकी स्थिति इस क्षेत्र में बेहतर है. लेकिन बीजेपी ने पांच क्षेत्रीय पार्टियों को अपने गठबंधन में शामिल कर लिया है. ये पांच पार्टियां हैं –जीएनएलएफ, सीपीरएम, अखिल भारतीय गोरखा लीग, गोरखालैंड राज्य निर्माण मोर्चा और सुमेती मुक्ति मोर्चा. 2021 में होनेवाले राज्य विधानसभा चुनावों में अलग गोरखालैंड अब मुख्य मुद्दा नहीं रहा. अगली बार का चुनाव दो मांगों पर लड़ा जाएगा. पहला, हिल-तराई क्षेत्र के लिए कोई स्थायी राजनीतिक समाधान और दूसरा, 13 पहाड़ी समुदायों को आदिवासी का दर्जा देना. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों को आश्वासन दिया है कि उनकी ये मांगे बीजेपी पूरा करेगी.

इन सीटों पर बीजेपी के लिए साख बचाना मुश्किल
पिछले साल बीजेपी ने दार्जिलिंग लोकसभा और विधानसभा दोनों सीट पर जीत हासिल की थी पर कई लोगों का मानना है कि अगर बीजेपी इस क्षेत्र के लोगों के लिए कोई ठोस उपलब्धि हासिल नहीं कर पायी तो उसको इस क्षेत्र में अपनी साख बचानी मुश्किल हो जाएगी. दार्जिलिंग लोकसभा सीट ( Darjeeling Lok Sabha Constituency) पर बीजेपी को 2009 के बाद तीन बार विजय मिली है और उसको जीजेएम एवं अन्य दलों का साथ मिला था.जानिए दार्जिलिंग हिल्ज़ का समीकरण

दार्जिलिंग हिल्ज़ में विधानसभा की छह सीटें हैं और इनमें से टीएमसी के पास एक सीट है जबकि बीजेपी के पास कोई सीट नहीं है. सीपीआईएम के पास एक, जीजेएम के पास दो जबकि शेष सीट पर कांग्रेस का क़ब्ज़ा है. गोरखा समुदाय का आसपास के मैदानी क्षेत्र में भी प्रभाव है. जीएजएम के दार्जिलिंग से दो विधायकों ने 2016 के बाद बीजेपी को अपना समर्थन दिया पर अब गुरुंग ने अपना समर्थन वापस ले लिया है. गुरुंग 2017 में भूमिगत हो गया था क्योंकि उस पर आतंकवाद विरोधी क़ानून के तहत ममता सरकार ने हिंसक गोरखालैंड आंदोलन के सिलसिले में मुक़दमा दर्ज किया था. वह अक्टूबर में कोलकाता में मीडिया के समक्ष हाज़िर हुआ और घोषणा की कि अब वह ममता बनर्जी को अपना समर्थन देगा. तब से गुरुंग और बिनॉय तमांग के बीच तनातनी बढ़ गयी है. बिनॉय तमांग उसका पूर्व सहयोगी है जो 2017 से जीजेएम के टीएमसी-समर्थक धड़े का नेतृत्व कर रहा था.

बिमल गुरुंग ने घोषणा की है कि वह अगले साल होने वाले राज्य विधानसभा के चुनावों में उत्तरी बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को कम से कम 18 सीटों पर जीत दिलाएगा. “मैंने ममता बनर्जी से हाथ मिलाया है. हम उत्तर बंगाल में 17-18 सीट जीतेंगे. बीजेपी ने गोरखों को धोखा दिया है और उनका 12 साल बर्बाद किया है”, गुरुंग ने मीटिंग में कहा. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने उनको आश्वासन दिया है कि वह गोरखालैंड मुद्दे का राजनीतिक हल निकालेगी. दार्जिलिंग से बीजेपी के गठबंधन के साझीदारों का एक शिष्टमंडल बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव और बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय के साथ दिल्ली में केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी से मिला.





Source link

Advertisement

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here