दो धड़ों में बंटा शिमला व्यापार मंडल, नाराज धड़े ने चुनाव कमेटी से दिया इस्तीफा

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शिमला. (सांकेतिक तस्वीर)

कंवलजीत और पूर्व चुनाव कमेटी अध्यक्ष अश्वनी मिनोचा ने कहा कि नगर निगम (Municipal Corporation) द्वारा व्यापारियों के लिए बढ़ाए गए कूड़े के बिलों और किराया बढ़ाने के विरोध में व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने कोई आवाज नहीं उठाई और न ही इतने सालों में कोई ऑडिट करवाया.

शिमला. हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में व्यापार मंडल के चुनाव टलने के फैसले से शहर के व्यापारियों में घमासान मच गया है. मौजूदा व्यापार मंडल के फैसले से शहर के कारोबारी दोफाड़ हो गए हैं. नाराज कारोबारियों के एक धड़े ने अपने पदों से इस्तीफा देते हुए एडोहक कमेटी का गठन कर दिया है. मंगलवार को व्यापारियों के एक वर्ग ने मौजूदा व्यापार मंडल पर आरोप लगाते हुए व्यापारियों के हितों से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है और साथ ही छह माह के लिए एक एडहोक कमेटी का गठन कर दिया हैं.

क्या बोले अध्यक्ष
चुनाव कमेटी अध्यक्ष अश्वनी मिनोचा ने प्रेसवार्ता के माध्यम से कमेटी के पदों से इस्तीफा देकर नई कमेटी का गठन किया है, जिसका अध्यक्ष कंवलजीत को बनाया अध्यक्ष और अजय शर्मा को महासचिव बनाया गया है. इसके अलावा उप प्रधान, सचिव और सह सचिव भी बनाए गए हैं, जिन्हें छ माह के लिए चुना गया है.उन्होंने बताया कि एडोहक कमेटी ने छह माह के भीतर व्यापार मंडल के सभी कार्य देखेगी और चुनावि प्रक्रिया भी तैयार करेगी.

दूसरे धड़े पर आरोपों की झड़ीनवनियुक्त एडोहक कमेटी ने कार्यभार सम्भालते ही मौजूदा व्यापार मंडल यानी दूसरे धड़े पर आरोपों की झड़ी लगा दी. एडोहक कमेटी के नवनियुक्त अध्यक्ष कंवलजीत सिंह ने कहा की साल 2013 में व्यापार मंडल शिमला का चुनाव करवाया गया था, जिसका कार्यकाल चार साल का था मार्च 2017 में दोबारा चुनाव होना था, लेकिन नगर निगम शिमला के चुनाव के चलते इनके कार्काल का समय बढ़ाया गया. लेकिन इसके बाद कई बार इन्हें चुनाव करवाने के लिए कहा गया, इन्होंने कोई भी चुनाव नहीं करवाया.उन्होंने कहा कि सात साल के कार्यकाल में मौजूदा व्यापार मंडल ने व्यापारियों से जुडी समस्यायों का समाधान नहीं किया बल्कि उल्टा कारोबारियों को परेशान किया.

हमारी आवाज नहीं उठाई
कंवलजीत और पूर्व चुनाव कमेटी अध्यक्ष अश्वनी मिनोचा ने कहा कि नगर निगम द्वारा व्यापारियों के लिए बढ़ाए गए कूड़े के बिलों और किराया बढ़ाने के विरोध में व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने कोई आवाज नहीं उठाई और न ही इतने सालों में कोई ऑडिट करवाया. उन्होंने आरोप लगाया कि सदस्यता शुल्क के नाम पर पैसा वसूला गया है. उसका भी कोई हिसाब किताब नहीं है. उन्होंने कहा कि उन्होंने और उनकी टीम ने अपने पदों से आज इस्तीफा सौंपा है और आगामी कार्यभार के लिए एडोहक कमेटी का गठन किया है, जो अगले छह माह तक व्यापार मंडल का कार्यभार संभालेगी.





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