तल्ख टिप्पणी कर फोरम ने दिया फैसला: प्रीमियम इकट्‌ठा कर बहाने से क्लेम रिजेक्ट करती हैं इंश्योरेंस कंपनियां, ब्याज समेत इलाज खर्च व 10 हजार हर्जाना दे कंपनी

0
2


  • Hindi News
  • Local
  • Punjab
  • Jalandhar
  • Insurance Companies Reject Claims On The Pretext Of Collecting Premium, Paying Treatment Expenses Including Interest And 10 Thousand Damages.

जालंधरएक घंटा पहले

  • कॉपी लिंक

कंपनी ने अपने ऊपर के आरोप नकारे थे लेकिन फोरम उससे सहमत नहीं हुआ। – प्रतीकात्मक फोटो

इंश्योरेंस कंपनियों को प्रीमियम इकट्‌ठा करने से मतलब है, फिर वो क्लेम रिजेक्ट करने के लिए बहाने ढूंढ लेती हैं, यह तल्ख टिप्पणी करते हुए जिला कंज्यूमर फोरम ने अपोलो म्यूनिख इंश्योरेंस कंपनी को 6% ब्याज के साथ 1.64 लाख की क्लेम राशि देने को कहा। इसके अलावा 10 हजार का हर्जाना भी लगाया गया है।

महिला ने दी थी शिकायत

न्यू घई नगर मॉडल टाउन की गुरप्रीत कौर ने बताया कि उन्होंने अपाेलो म्यूनिख हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। 2 लाख की इस पॉलिसी में दावा किया गया था कि बीमारी की सूरत में हॉस्पिटल चार्जेस, डॉक्टर फीस व दवाईयों की कीमत भी कंपनी देगी। इसी दौरान बीमार होने पर वो अस्पताल में भर्ती हुए। करीब 5 दिन रहने के बाद उन्होंने कंपनी को 1.64 लाख का क्लेम भेजा। इसके लिए पूरी औपचारिकताएं भी कर दी गई लेकिन उन्हें क्लेम नहीं मिला। इस मामले में इंश्योरेंस कंपनी ने पॉलिसी होने व उसका प्रीमियम लेने की बात तो कबूल की लेकिन पॉलिसी की शर्तों का हवाला देते हुए क्लेम न देने के आरोप नकार दिए।

पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले का दिया हवाला

इस मामले में जिला कंज्यूमर फोरम के प्रेजिडेंट कुलजीत सिंह व मेंबर ज्योत्सना ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के ऊषा यादव Vs न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के केस में दिए फैसले में की टिप्पणी का हवाला दिया। जिसमें कहा गया कि इंश्योरेंस कपनियों को सिर्फ प्रीमियम इकट्‌ठा करने से मतलब है और उसके बाद क्लेम खारिज करने के लिए वो बहाना ढूंढ लेती हैं। उन्होंने अपोलो म्यूनिख को आदेश दिए कि वो ब्याज समेत क्लेम की राशि चुकाए। इसके अलावा 7 हजार रुपए मानसिक परेशानी व 3 हजार का केस खर्च भी दे।

खबरें और भी हैं…



Source link

Advertisement

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here