टाउते: 49 अभी भी लापता, ओएनजीसी के SOP पर सवाल, जांच का आदेश

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मुंबई. बजरा (बार्ज) पी-305 पर मौजूद लोगों में से कम से कम 26 की मौत हो चुकी है और 49 लोग अब भी लापता हैं. उल्लेखनीय है कि यह बजरा चक्रवात ‘टाउते’ के कारण मुंबई के तट से कुछ दूर सागर में फंसने के बाद डूब गया था. नौसेना के एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी. नौसेना की ओर से बुधवार को बताया गया कि बेहद खराब मौसम से जूझते हुए उसके जवानों ने बजरा पी-305 पर मौजूद 261 लोगों में से अब तक 186 को बचा लिया है, दो लोगों को ‘टगबोट’ वारप्रदा से बचाया गया है. अभी तक 26 शवों को बरामद किया गया है और बजरा पी-305 पर मौजूद 49 लोग अब भी लापता हैं जो सोमवार को डूब गया था. नौसेना ने अभी तक बताया था कि बजरे पर 273 लोग मौजूद थे लेकिन बुधवार की शाम को एक अधिकारी ने इसका संचालन करने वाली कंपनी के हवाले से बताया कि बजरे पर 261 थे. मुंबई पुलिस जांच करेगी कि चक्रवात टाउते के बारे में चेतावनी जारी करने के बावजूद बजरा पी-305 उस क्षेत्र में क्यों रूका रहा. यह जानकारी एक अधिकारी ने दी. दक्षिण मुंबई में येलो गेट पुलिस ने बजरे पर मौजूद लोगों में से जिनका शव बरामद हुआ है, उस सिलसिले में एक दुर्घटनावश मृत्यु रिपोर्ट (एडीआर) दर्ज की है. नौसेना के एक प्रवक्ता ने बताया कि दो अन्य बजरों तथा एक ऑयल रिग पर मौजूद सभी लोग सुरक्षित हैं. तीसरे दिन भी जारी रहा रेस्‍क्‍यू ऑपरेशनप्रवक्ता ने बताया, ‘मुंबई और गुजरात में तीसरे दिन भी तलाश एवं बचाव अभियान अभी जारी है और लोगों को तट तक सुरक्षित लाने की उम्मीद हमने अब तक नहीं छोड़ी है.’ उन्होंने कहा कि हालांकि लोगों के सुरक्षित मिलने की उम्मीद समय बीतने के साथ क्षीण पड़ती जा रही है. उल्लेखनीय है कि ये बजरे चक्रवात ताउते के गुजरात तट से टकराने से कुछ घंटे पहले मुंबई के पास अरब सागर में फंस गए थे. इस बीच नौसेना का युद्धपोत आईएनएस कोच्चि पी-305 से बचाए गए 186 लोगों में से 125 को लेकर बुधवार सुबह मुंबई पहुंचा. प्रवक्ता ने बताया कि इनके साथ ही 22 शवों को भी लाया गया. पी-305 पर मौजूद 186 कर्मियों को बचाया गया
नौसेना के एक प्रवक्ता ने बताया, ‘बुधवार सुबह तक, पी-305 पर मौजूद 186 कर्मियों को बचा लिया गया है. आईएनएस तेग, आईएनएस बेतवा, आईएनएस ब्यास, पी-81 विमान और हेलीकॉप्टरों की मदद से तलाश एवं बचाव अभियान जारी है.’ नौसेना और तटरक्षक बल ने बजरे ‘जीएएल कन्स्ट्रक्टर’ में मौजूद 137 लोगों को मंगलवार तक बचा लिया था. अधिकारियों ने बताया कि बजरे एसएस-3 पर मौजूद 196 लोग और ऑयल रिग सागर भूषण पर मौजूद 101 लोग सुरक्षित हैं. ओएनजीसी तथा एससीआई के पोतों के जरिए इन्हें तट तक सुरक्षित लाया जा रहा है. बचाव एवं राहत कार्यों में मदद के लिए क्षेत्र में पोत आईएनएस तलवार भी तैनात है. नौसेना के एक अधिकारी ने बताया कि 707 कर्मियों के साथ तीन बजरे और एक ऑयल रिग सोमवार को समुद्र में फंस गए थे. इनमें 273 लोगों के साथ ‘पी305’ बजरा, 137 कर्मियों के साथ ‘जीएएल कंस्ट्रक्टर’ और एसएस-3 बजरा शामिल है, जिसमें 196 कर्मी मौजूद थे. साथ ही ‘सागर भूषण’ ऑयल रिग भी समुद्र में फंस गया था, जिसमें 101 कर्मी मौजूद थे. ये भी पढ़ें: चक्रवात ‘टाउते’ में देवदूत बने नौसेना के जवान, समुद्र में यूं किया बचाव, देखें तस्वीरें नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल मुरलीधर सदाशिव पवार ने कहा कि यह बीते चार दशक में सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण तलाश एवं बचाव अभियान है. बजरों के समुद्र में फंसने के घटनाक्रम की जांच करेगी उच्चस्तरीय समिति पेट्रोलियम मंत्रालय ने चक्रवाती तूफान ताउते के दौरान ओएनजीसी के लिए काम करने वाली एक ठेकेदार कंपनी के तीन बजरे समुद्र में फंस जाने से जुड़े घटनाक्रम के मामले में पड़ताल के लिए बुधवार को एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया. ओएनजीसी के लिए पश्चिमी तटीय क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी एफकॉन्स के तीन बजरे भीषण तूफान के दौरान समुद्र में फंस गये थे. इन पर 600 से ज्यादा लोग सवार थे. ये भी पढ़ें: टाउते तूफान: बॉम्बे हाई से निकाले गए 22 शव, गुजरात में 45 हुआ मौतों का आंकड़ा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इनके फंसने और बाद के घटनाक्रम में कई लोगों की जान चली गयी. घटनाक्रम की जांच करने के लिए गठित समिति में पोत परिवहन महानिदेशक अमिताभ कुमार, हाइड्रोकार्बन्स के महानिदेशक एससीएल दास और रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव एन जाफरी शायिन शामिल हैं. समिति में अन्य किसी सदस्य को भी शामिल किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर अन्य लोगों की मदद ली जा सकती है.

मंत्रालय ने अधिक ब्योरा नहीं दिया और कहा, ‘समिति एक महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.’ मंत्रालय के अनुसार समिति से इन बजरों के समुद्र में फंसने से जुड़े घटनाक्रम के मामले में पड़ताल करने को कहा गया है. बयान के अनुसार समिति इस बारे में भी पता लगाएगी कि ‘क्या मौसम विज्ञान विभाग और अन्य प्राधिकारों की चेतावनियों पर समुचित तरीके से ध्यान दिया गया और कार्रवाई की गयी या नहीं.’ समिति यह भी पता लगाएगी कि क्या बजरों को सुरक्षित रखने तथा आपदा प्रबंधन से संबंधित मानक परिचालन प्रक्रियाओं का सही तरह से पालन किया गया था या नहीं.





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