जानिए कौन है भारत का किसान, जो ट्रंप को देवता मान कर उनकी पूजा करता था, ट्रंप की कोरोना बीमारी पर हार्ट अटैक से हो गई मौत

0
1


मुंबई21 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

इस साल फरवरी में ट्रंप की भारत यात्रा से पहले कृष्णा नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास गए थे ताकि वे ट्रंप से मिलने की इजाजत पा सकें। परंतु ऐसा ना हो सका। वे बिना अपने भगवान से मिले ही इस दुनिया से चल बसे

  • कृष्णा को सपने में ट्रंप आए और बोले पाकिस्तान से भारत क्रिकेट मैच जीतेगा और अगले दिन मैच में यही हुआ
  • इसी के बाद से कृष्णा ट्रंप के बहुत बड़े भक्त बन गए। उन्हें अंग्रेजी नहीं आती थी, पर ट्रंप का भाषण वे जरूर सुनते थे

उनके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक भगवान थे। उनके घर में ट्रंप की एक विशाल मूर्ति थी। हर सुबह अपने आँगन में ट्रम्प की बड़ी प्रतिमा की प्रार्थना करते हुए उन्हें एक भगवान की तरह वे पूजा करते थे। हाल में जब ट्रंप को कोरोना हुआ और इसका पता किसान बुस्सा कृष्णा को लगा तो वे इसे सहन नहीं कर पाए। उन्हें रविवार को कार्डिएक अरेस्ट आया और उनकी मौत हो गई।

मानसिक रूप से परेशान समझते थे

किसान बुस्सा कृष्णा के चचेरे भाई विवेक बुक्का ने कहा कि पहले परिवार में हर कोई सोचता था कि वह मानसिक रूप से परेशान है, लेकिन ट्रंप को पूजने के सवाल पर वे अडिग रहे। आखिरकार सब जान गए कि वो अपनी धुन के पक्के हैं। जब ट्रंप ने बताया कि वे कोरोनोवायरस से ग्रसित हो गए हैं, तो इससे कृष्णा स्तब्ध हो गए।

फेसबुक पर वीडियो डाला

किसान ने फेसबुक पर दिल झकझोर देने वाला एक वीडियो पोस्ट किया। इसमें उन्होंने कहा कि मुझे बहुत दुख होता है कि मेरे देवता ट्रंप कोरोना से बीमार हो गए हैं। मैं सभी से उनके स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना करने के लिए कहता हूं। उन्होंने कहा ट्रंप के प्रति एकजुटता दिखाने और उनकी दुआ करने के लिए उन्होंने खाना बंद कर दिया। वह गहरे अवसाद में चले गए। रविवार को कार्डियक अरेस्ट से उनकी मौत हो गई।

शारीरिक रूप से स्वस्थ थे कृष्णा

विवेक ने कहा कि उनका चचेरा भाई शारीरिक रूप से स्वस्थ था। उसे स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या या दिल की बीमारी नहीं थी। कृष्णा की मृत्यु को उनके उपवास से जोड़ने वाला कोई लिंक नहीं है। ऐसा कोई संकेत नहीं है व्हाइट हाउस या ट्रंप जो अब बीमारी से उबर चुके हैं, उन्हें भारत के अपने सबसे बड़े प्रशंसक के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

ट्रंप के भारत में बहुत समर्थक हैं

भारत के कुछ पढ़े लिखे लोग भले ही ट्रंप का मजाक उड़ाते हैं लेकिन भारतीय समाज के अन्य लोगों का ट्रंप को समर्थन प्राप्त है। प्यू रिसर्च सेंटर के एक फरवरी के अध्ययन में पाया गया कि भारत में सर्वेक्षण में शामिल 56% लोगों ने कहा कि जब बात वैश्विक समुदाय की हो तो ट्रंप सही मायने में अच्छा काम करते हैं। भारत के कुछ हिस्सों में ट्रंप की लोकप्रियता बढ़ रही है। क्योंकि उनकी कार्यशैली नरेंद्र मोदी जैसे व्यक्तित्व वाले नेता की है। ट्रंप ने सही मायने में “अमेरिका फर्स्ट” के नारे को आगे बढ़ाया है

तेलंगाना के कोने गांव के थे कृष्णा

तीस की उम्र में किसान कृष्णा तेलंगाना के कोने गाँव में रहते थे। लगभग चार साल से ट्रंप के बहुत बड़े भक्त बन गए थे। वे ट्रंप के प्रशंसक तब बने, जब एक रात सपने में राष्ट्रपति उन्हें दिखाई दिये। उनके रिश्तेदारों ने कहा कि सपने में ट्रंप ने भविष्यवाणी की कि भारत की क्रिकेट टीम अगले दिन एक मैच में पाकिस्तान को हरा देगी और ऐसा ही हुआ। भारत जीता और और उसी दिन से उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप की पूजा करनी शुरू कर दी। उस किसान ने एक नेता के रूप में राष्ट्रपति ट्रम्प की प्रशंसा की। उन्हें अंग्रेजी नहीं आती थी पर वे ट्रंप के स्पीच का अनुवाद सुनते रहते थे।

ट्रंप के भाषण के भक्त थे कृष्णा

कोन गांव के मुखिया वेमुला वेंकट गौड़ ने कहा कि कृष्णा ट्रंप के सीधे-सादे पर बेबाकी वाले भाषण के बड़े भक्त थे। उन्होंने कहा कि कृष्णा के पड़ोसी भी अमेरिकी राजनीति के बारे में ज्यादा नहीं जानते थे और ट्रंप के बारे में कोई राय नहीं रखते थे। लेकिन जब से कृष्णा इतने बड़े फैन बने तब से पड़ोसियों ने भी जानकारी रखनी शुरू कर दी।

हर शुक्रवार को उपवास करते थे

ट्रंप के लिए कृष्णा की भक्ति जैसे-जैसे तेज होती गई, उन्होंने हर शुक्रवार को उपवास करना शुरू कर दिया। उन्होंने अपने आँगन में ट्रंप की एक बड़ी प्रतिमा स्थापित किया। वह कृष्ण, शिव, गणेश या अन्य देवताओं से प्रार्थना करते हुए प्रत्येक सुबह एक या दो घंटे के लिए हिंदू अनुष्ठानों के साथ पूजा करते थे। उन्होंने ट्रंप के कई फोटो अपने पास रखे।

अपने भगवान से मिलने की भी कोशिश की

बीच-बीच में जब भी मौका मिला कृष्णा ने अपने “भगवान” ट्रंप से मिलने का अपने स्तर पर कई बार प्रयास किया। गाँव के मुखिया वेंकट ने बताया कि इस साल फरवरी में ट्रंप की भारत यात्रा से पहले वे नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास गए थे ताकि वे ट्रंप से मिलने की इजाजत पा सकें। परंतु ऐसा ना हो सका और वे बिना अपने भगवान से मिले ही इस दुनिया से चल बसे।

मिलने का सपना पूरा नहीं हुआ

विवेक ने कहा कि यह वास्तव में दुखद है कि उनका सपना कभी पूरा नहीं हुआ। ट्रंप ने बाद में मोदी के साथ अहमदाबाद में 1 लाख लोगों के साथ एक स्टेडियम को संबोधित किया। कृष्णा ने अंत तक विश्वास बनाए रखा कि शायद उन्हें ट्रंप के दर्शन हो जाएं। जब उन्हें पता चला कि ट्रंप कोरोना का शिकार हो गए हैं तो कृष्णा खुद को अपने कमरे में बंद कर लिया।

रविवार को हार्ट अटैक आया

उनके भाई ने बताया कि हमने उसे खाने के लिए मजबूर करने की कोशिश की, लेकिन बड़ी मुश्किल से ही वह कुछ खाते थे। रविवार को कृष्णा गिर पड़े और उसके रिश्तेदार उन्हें अस्पताल ले गए। वहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। कृष्णा अपने माता-पिता और 7 साल के बेटे को अपने पीछे छोड़ गए। वेंकट ने कहा कि गाँव वाले अब ट्रंप के भक्त की यादों को सँजो कर रखने की सोच रहे हैं।



Source link

Advertisement

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here