छत उजड़ने के बाद सरकार करेगी विचार: खोरी में कब्जेदारों काे हटाए जाने का मामला/ केंद्रीय राज्यमंत्री बोले, पहले कोर्ट के आदेश पर इन्हें हटाया जाएगा, फिर सरकार करेगी विचार

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फरीदाबाद5 घंटे पहले

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हटाए जाने वालों के लिए नहीं है बसाने की कोई योजना- केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर

अरावली वन क्षेत्र के करीब सौ एकड़ में बसी लक्कड़पुर खोरी कॉलोनी से सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हटाए जाने वाले दस हजार मकानों और उनमें रहने वाले करीब 50 हजार की आबादी को आश्रय देने के लिए सरकार के पास अभी कोई योजना नहीं है। यानी 50 हजार लोगों को बेघर करने के बाद ही सरकार उन पर कुछ विचार करेगी। ये बात फरीदाबाद के सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने की है।

मुख्यमंत्री मनोहरलाल के विकास कार्यों के उदघाटन मौके पर सेक्टर 12 में दैनिक भास्कर के सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि खोरी से हटाए जाने वाले लोगों को बसाने के विषय में अभी सोचना है। लेकिन हमारी सरकार समय से पहले किसी को हटाती नहीं, बसाती है। चूंकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बड़ा कोई आदेश सरकार और प्रशासन के लिए नहीं हो सकता। इसलिए सरकार और प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ साफ कहा है कि पहले फारेस्ट लैंड से कब्जा हटाया जाए। पुनर्वास नीतिगत फैसला है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि खोरी कॉलोनी से कब्जा हटाने के बाद इनके लिए क्या करना है, राज्य सरकार उस पर विचार करेगी।

खोरी गांव की ड्रोन से ली गई तस्वीर

खोरी गांव की ड्रोन से ली गई तस्वीर

50 हजार की आबादी बसती है कॉलोनी में

नगर निगम सूत्रों की मानें तो अरावली वन क्षेत्र में बसी लक्कड़पुर खोरी कॉलोनी में बने दस हजार मकानों में करीब 50 हजार की आबादी रहती है। यानि एक घर में यदि पांच सदस्य भी मान लिया जाए तो साफ तौर पर आबादी 50 हजार हो जाती है। इतनी बड़ी आबादी के सामने ही कोर्ट के आदेश पर उनका घर उजाड़ने की तैयारी की जा रही है। बड़ा सवाल ये है कि इतनी बड़ी आबादी का आशियाना उजड़ने के बाद यहां के लोग इस भीषण गर्मी और कोरोना काल में कहां जाएंगे। इसका जवाब न तो यहां के अधिकारियों के पास है और न ही राजनेताओं के पास।

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