ग्रामीण क्षेत्र में मजबूत रिकवरी से सितंबर में रिटेल खर्च 12% बढ़ा, ई-कॉमर्स-एफएमसीजी से आया सुधार

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नई दिल्ली20 घंटे पहले

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सीएमएस ने देश भर के 98 फीसदी जिलों से 53 हजार रिटेल फैक्टर और 62 हजार एटीएम से मिली मनी एक्शन इंफॉर्मेशन के आधार पर यह रिपोर्ट जारी की है।

  • प्री-कोविड स्तर के मुकाबले इंश्योरेंस कवरेज पर 99% ज्यादा खर्च
  • सितंबर में 3000 करोड़ रुपए से ज्यादा की निकासी की गई

सितंबर में देश में रिटेल खर्च में बढ़ोतरी रही है। अगस्त के मुकाबले इसमें 12 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है। ग्रामीण क्षेत्र में मजबूत रिकवरी की बदौलत यह सुधार आया है। एटीएम और पैसे की आवाजाही के कारोबार से जुड़ी कंपनी सीएमएस इंफो सिस्टम्स देशभर के आंकड़ों के आधार पर एक रिपोर्ट जारी कर यह बात कही है।

एफएमसीजी और ई-कॉमर्स में खर्च बढ़ा

रिपोर्ट के मुताबिक, ई-कॉमर्स, एफएमसीजी, क्लाइंट ड्यूरेबल्स, इंश्योरेंस कवरेज, यूटीलिटी फंड, हेल्थकेयर, लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन में खर्च में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी रही है। इन सेगमेंट में खर्च जनवरी के स्तर को पार कर गया है। सीएमएस ने कहा है कि उसने देश भर के 98 फीसदी जिलों से 53 हजार रिटेल फैक्टर और 62 हजार एटीएम से मिली मनी एक्शन इंफॉर्मेशन के आधार पर यह रिपोर्ट जारी की है।

ग्रामीण क्षेत्र में प्री-कोविड के पार पहुंचा खर्च

रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्र में रिटेल खर्च प्री-कोविड स्तर के पार पहुंच गया है। वहीं, अर्ध-शहरी क्षेत्रों में यह प्री-कोविड स्तर के मुकाबले 93 फीसदी तक पहुंच गया है। बाजार में रिकवरी 60 फीसदी तक पहुंच गई है। सीएमएस का कहना है कि 70 फीसदी कॉरपोरेट एंटरप्राइजेज ने ग्रामीण बाजारों पर अपना फोकस कर लिया है। इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों में खपत और खर्च अब तक के उच्च स्तर पर पहुंच गया है।

कृषि के कारण ग्रामीण क्षेत्र में लौटी तेजी

सीएमएस इंफो सिस्टम्स की मनी एंटरप्राइजेज यूनिट के हेड अनुश राघवन का कहना है कि ग्रामीण बाजारों पर लॉकडाउन का ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा है। राघवन के मुताबिक, कृषि के कारण ग्रामीण क्षेत्र के बाजारों में तेजी जल्द लौट आई है। ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छे मॉनसून और सरकारी की डायरेक्ट बैनिफिट स्कीम से सकारात्मक असर पड़ा है।

इंश्योरेंस कवरेज में प्री-कोविड स्तर से 99 फीसदी ज्यादा खर्च

रिपोर्ट में कहा गया है कि सितंबर में प्री-कोविड स्तर के मुकाबले एफएमसीजी पर 16 फीसदी ज्यादा खर्च हुआ है। इसी प्रकार से ई-कॉमर्स में 9 फीसदी, क्लाइंट ड्यूरेबल्स में 7 फीसदी और इंश्योरेंस कवरेज में 99 फीसदी ज्यादा खर्च हुआ है। अभी जो सेक्टर महामारी से प्रभावित हैं उनमें मीडिया, लीजर, हॉस्पिटैलिटी, अटायर और रेलवे शामिल हैं। फिनो पेमेंट्स बैंक के सीईओ ऋषि गुप्ता का कहना है कि जनवरी में हम अपने कैश मैनेजमेंट वर्टिकल में 600 करोड़ रुपए का कलेक्शन करते थे। सितंबर में यह बढ़कर 1000 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। इससे स्पष्ट है कि रिटेल खर्च में बढ़ोतरी हुई है।

मनी विड्रॉल में भी आई तेजी

पेनियरबाई के सीईओ आनंद कुमार बजाज का कहना है कि सितंबर में रिटेल खर्च के प्री-कोविड स्तर के पार होने के दूसरे संकेतक रेमिटेंस और मनी विड्रॉल भी हैं। सितंबर में कॉरपोरेट ने 1500 करोड़ रुपए का रेमिटेंस जारी किया है। जनवरी में यह 1000 करोड़ रुपए था। सरकार की डायरेक्ट बैनिफिट स्कीम के कारण सितंबर में मनी विड्रॉल 3000 करोड़ रुपए से ज्यादा रहा है। जनवरी में यह 2000 करोड़ रुपए के आसपास था। जनवरी के 10 मिलियन के मुकाबले सितंबर में कैश ट्रांजेक्शन 16 मिलियन रहे हैं।



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