गुरकीरत, नवजोत, मारिया बने ट्राईसिटी टॉपर्स; साइट क्रैश होने के चलते शाम 5:15 की बजाय रात 9 बजे रिजल्ट चेक कर पाए स्टूडेंट्स

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चंडीगढ़17 मिनट पहले

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मेडिकल के फील्ड में अपना करिअर बनाने के इच्छुक स्टूडेंट्स के लिए शुक्रवार शाम को नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) का रिजल्ट घाेषित हुआ। 

  • नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) का रिजल्ट शुक्रवार को घाेषित हुआ
  • ट्राईसिटी के 8 स्टूडेंट्स छाए, इनमें से तीन ऑल इंडिया टॉप-100 में

मेडिकल के फील्ड में अपना करिअर बनाने के इच्छुक स्टूडेंट्स के लिए शुक्रवार शाम को नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) का रिजल्ट घाेषित हुआ। ट्राईसिटी से सेंट पीटर्स स्कूल सेक्टर 37 से 12वीं कर चुके गुरकीरत सिंह ने 710 मार्क्स लेते हुए ऑल इंडिया रैंक 15 हासिल किया और वह ट्राईसिटी में फर्स्ट पोजिशन पर रहे। ब्रिटिश स्कूल मोहाली के नवजोत सिंह ने 691 मार्क्स लेते हुए ऑल इंडिया 221 रैंक लिया और वह ट्राईसिटी में सेकेंड पोजिशन पर रहे। सेंट पीटर्स स्कूल सेक्टर 37 की मारिया मैथ्यू ने 690 मार्क्स लेते हुए ऑल इंडिया 254 रैंक लिया और वह ट्राईसिटी में थर्ड पोजिशन पर रही।

ट्राईसिटी के इन तीन टॉपर्स के अलावा बाल निकेतन स्कूल सेक्टर 37 की प्रियंका ने 686 मार्क्स लेकर ऑल इंडिया 347 रैंक लिया और वह ट्राईसिटी में फोर्थ पोजिशन पर रही। एसजीजीएस कॉलिजिएट स्कूल सेक्टर 26 की जश्नजीत कौर ने 686 मार्क्स लेते हुए आॅल इंडिया 348 रैंक लिया और ट्राईसिटी में पांचवी पोजिशन पर रही।

शिशु निकेतन स्कूल सेक्टर 22 की कमीक्षा ने 686 मार्क्स लेते हुए ऑल इंडिया 359 रैंक लिया और वह ट्राईसिटी में 6वीं पोजिशन पर रही। डीएवी स्कूल सेक्टर 8 की अहसास के 686 मार्क्स लेते हुए ऑल इंडिया 366 रैंक लिया और ट्राईसिटी में 7वीं पोजिशन पर रही। रिदम जिंदल ने 685 मार्क्स लेते हुए ऑल इंडिया 382 रैंक लिया और वह ट्राईसिटी में 8वीं पोजिशन पर रहे।

रिजल्ट घोषित होते ही साइट हुई क्रैश

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) रिजल्ट शाम को 5:15 पर आया लेकिन स्टूडेंट्स अपना रिजल्ट चेक नहीं कर पाए क्योंकि साइट क्रैश हो गई। रिजल्ट के साथ में ही एनटीए ने फाइनल आंसर-की भी जारी कर दी लेकिन वह भी नहीं खुल रही थी। रात को करीब 9 बजे स्टूडेंट्स यह चेक कर पाए कि आखिर उनके मार्क्स कितने हैं और ऑल इंडिया रैंक क्या आया है।

​​​​​​सोशल मीडिया की बहुत एडीक्शन थी

गुरकीरत सिंह ने बताया कि 10वीं क्लास तक सोशल मीडिया की बहुत एडीक्शन थी। रोज 6 से 7 घंटे मोबाइल में ही बिताता था। मूलरूप से सिरसा के निवासी गुरकीरत 2018 में चंडीगढ़ पढ़ने आए। सेंट पीटर्स स्कूल सेक्टर 37 में एडमिशन ली और हॉस्टल में रहे तो मोबाइल रखने की इजाजत नहीं थी इसलिए धीरे-धीरे आदत बदली और पढ़ाई पर फोकस शुरू हुआ। हैलिक्स इंस्टीट्यूट से कोचिंग ली।

भाई ने किया था ऑल इंडिया टाॅप

मोहाली निवासी नवजोत सिंह ने ब्रिटिश स्कूल से 11वीं और 12वीं की। नवजोत के भाई नवदीप ने वर्ष 2017 में 697 मार्क्स के साथ ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल किया था। ऐसे में नवजोत भी अपने भाई के नक्शे कदम पर चला और नीट को क्रैक करने की तैयारी दो साल से कर रहा था। घरवालों को उम्मीद है कि वह अपने भाई से भी ज्यादा मार्क्स लेकर आएगा। पिता गुरपाल सिंह मुक्तसर के स्कूल में प्रिंसिपल हैं।

पेरेंट्स पीजीआई में डाॅक्टर

सेक्टर 38 निवासी मारिया मैथ्यू के पेरेंट्स डॉक्टर हैं। पिता जोसेफ मैथ्यू और मां प्रीति मैथ्यू दोनों ही पीजीआई में कार्यरत हैं और मां पीजीआई के एनेसथिसिया डिपार्टमेंट मे है। ऐसे में मारिया ने भी अपने पेरेंट्स की लाइन ही चुनी और वह भी अब इस एग्जाम को क्रैक करके डॉक्टर बनना चाहती है। मारिया ने एग्जाम क्रैक करने के लिए एलन इंस्टीट्यूट से कोचिंग ली।

न्यूरोलॉजिस्ट बनना चाहती हूं

सेक्टर-8 पंचकूला की निवासी अहसास ने 9वीं में ही सोच लिया था कि डॉक्टर बनना है, क्योंकि मां नीतू भी फोर्टिस में डेंटल सर्जन हैं। अहसास का सपना न्यूरोलाॅजिस्ट बनने का है। अहसास का मानना है कि कन्सीसटेंटली पढ़ाई करो, बेसिक कॉन्सेप्ट को रिवाइज करते रहो। जब पढ़ाई कर थक जाती तो म्युजिक सुनकर स्ट्रेस दूर करती थीं।

एनसीईआरटी ही बाइबल है

सेक्टर 27 निवासी कमीक्षा ने कहा कि नीट के एग्जाम को क्रैक करना है तो यह समझ लें कि एनसीईआरटी ही बाइबल है। इसे अच्छे से याद कर लें। कुछ स्टूडेंट्स एनसीईआरटी में से फिजिकस नहीं पढ़ते जो कि गलत है। कमीक्षा के पिता राकेश संद्धू कालका के एसडीएम हैं और मां भारती गवर्नमेंट स्कूल मे टीचर हैं।

सोसायटी के लिए करना है काम

मोहाली फेज 4 की निवासी जश्नजीत कौर ने कहा कि उनके परिवार में कोई मेडिकल प्रोफेशन से नहीं है। इसलिए वह इसमें जाना चाहती हैं। उनका सपना है कि वह सोसायटी के लिए कुछ करें। एम्स दिल्ली में एडमिशन लेने की इच्छुक जश्नजीत जब पढ़ाई करके स्ट्रेस में आ जाती तो पेंटिंग करती या बास्केबॉल खेलती।

5वीं में ठाना था डॉक्टर बनना है

सेक्टर 37 निवासी प्रियंका ने 5वीं में तय कर लिया था कि डॉक्टर बनना है। प्रियंका ने कहा कि मैंने सोशल मीडिया को छाेड़ दिया और टीवी का कनेक्शन कटवा दिया, दो साल किसी फंक्शन में नहीं गई ताकि मैं पढ़ाई पर फोकस कर सकूं। अगर कोई स्टूडेंट पढ़ाई पर फोकस करे, सोशल मीडिया से दूर रहें तो एग्जाम क्रैक कर सकता है।

पेरेंट्स से मिली डॉक्टर बनने की प्रेरणा

पंचकूला सेक्टर-20 की सनसिटी परिक्रमा सोसायटी के निवासी रिदम जिंदल ने कहा कि उनके पिता मुकेश जिंदल और मां रुचिका डॉक्टर हैं। बायोलॉजी में इंट्रेस्ट था और बचपन से पेरेंट्स को देखता था और वही मेरे रोल मॉडल हैं इसलिए मेडिकल प्रोफेशन चुना। रिदम को फिल्में देखने और क्रिकेट खेलने का शौक है।



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