खोरी में तोड़फोड़ का मामला: नर्मदा बचाओ आंदोलन की मुखिया मेघा पाटकर पहुंची खोरी कॉलाेनी, बोलीं, हरियाणा सरकार को थोड़ी तो शर्म आनी चाहिए, टीकरी बाॅर्डर पर किसानों का शोषण, यहां गरीबों की छत उजाड़ रही

0
8


फरीदाबाद6 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

मेघा पाटकर ने कहा, महिलाओं को हथियार उठाने की नहीं बल्कि मुठ्ठी बांधकर एकजुट होने की जरूरत है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अरावली वन क्षेत्र में बसी खोरी कॉलोनी को तोड़े जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। शुक्रवार को जानी मानी सामाजिक कार्यकर्ता एवं नर्मदा बचाओ आंदोलन की संस्थापक मेघा पाटकर खोरी कॉलोनी पहुंची और प्रभावित लोगों के समर्थन में तोड़फोड़ का विरोध किया। उन्हाेंने हरियाणा सरकार को कटघरे में खड़ा करते ह़ए जमकर निशाना साधा। पाटकर ने कहा कि हरियाणा सरकार को थोड़ी तो शर्म आनी चाहिए। एक तरफ वह किसानों को परेशान करने में जुटी है तो दूसरी ओर गरीबों का आशियाना उजाड़ने में लगी है। देश में ऐसी एक ही हरियाणा सरकार है जो देश के अन्नदाताओं और गरीबों पर जुल्म करने में पूरी ताकत झोक रही है। यहां की महिलाओं को हथियार उठाने की नहीं बल्कि मुठ्ठी बांधकर एकजुट होने की जरूरत है। वहीं दूसरी ओर एनआईटी के कांग्रेसी विधायक नीरज शर्मा ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने मुख्यमंत्री से भूमाफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और प्रभावित लाेगों के पुनर्वास की मांग की है।

वन क्षेत्र में बसी खोरी कॉलोनी

वन क्षेत्र में बसी खोरी कॉलोनी

खोरी कॉलोनी को उजाड़ना मानवीयता के खिलाफ

शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे खोरी कॉलाेनी पहुंची मेघा पाटकर ने स्थानीय लोगों से मुलाकात की और बस्ती के बारे में जानकारी हासिल की। उन्होंने कहा कि आज हरियाणा सरकार खाेरी कॉलाेनी को उजाड़ने का जाे काम करने जा रही है वह संविधान और मानवीयता दोनों के खिलाफ है। लोगों ने जीवनभर की अपनी कमाई लगाकर किसी तरह छोटा छोटा आशियाना बनाया, अब उसे भी तोड़ा जा रहा है। खोरी कॉलाेनी के लोगों का दर्द एवं बयां यदि न्यायालय नहीं सुन सकती तो न्यायालय नहीं अन्यायालय है।

गरीबों के घर बचाने के लिए कानून बनाने की मांग

एनआईटी से कांग्रेस विधायक नीरज शर्मा ने हरियाणा और दिल्ली सरकार से आपस की राजनीति को दरकिनार कर भूमाफिया के खिलाफ सख्त एक्शन की मांग की है। साथ ही उन्हाेंने गरीबों का घर बचाने के लिए कानून बनाने की भी मांग की है। शर्मा ने कहा कि फरीदाबाद के सांसद और केंद्र सरकार में मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर को इस मामले में संज्ञान लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करनी चाहिए और संसद में या हरियाणा विधानसभा में विधेयक लाकर इस बस्ती को कानूनी मान्यता प्रदान करनी चाहिए। विधायक ने कहा कि खोरी कॉलोनी में रहने वालों में से कुछ हरियाणा के निवासी है। कुछ दिल्ली के रहने वाले है। वहां के वोट धारक है। ऐसे में सरकार को कभी जनता के साथ दोहरे मापदंड नहीं रखना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहरलाल से इनके पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग की।

शहर के और कब्जे प्रशासन को नहीं दिख रहे

विधायक ने ये भी कहा कि सत्ता के संरक्षण में भूमाफिया गौंछी में वक्फ बोर्ड की जमीन पर भी इसी तरह के अवैध कब्जे करा रहे हैं। जिन्हें समय रहते अगर नहीं रोका गया तो बाद में इसी तरह कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन को उन कब्जों को खाली कराना पड़ेगा और आम आदमी का भारी नुकसान होगा। उन्होंने दिल्ली मुम्बई कॉरिडोर को लेकर कहा कि सरकार द्वारा वहां अवैध निर्माणों को बचाने के लिए ग्रीन बेल्ट उजाड़ दी गई। लेकिन इस मामले में जब पूछा गया तो सरकार में कोई भी इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं। उन्होंने कहा कि एक तरफ गरीब उजाड़े जा रहे और दूसरी तरफ हरियाली छीनी जा रही।

खोरी वालों के समर्थन में आए आम आदमी पार्टी के सांसद सुशील गुप्ता

खोरी वालों के समर्थन में आए आम आदमी पार्टी के सांसद सुशील गुप्ता

अवैध फार्म हाउसों को तोड़ने की हिम्मत नहीं सरकार में

आम आदमी पार्टी के सांसद सुशील गुप्ता ने तोड़फोड़ को लेकर सरकार पर निशाना साधा। पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्हाेंने कहा कि प्रभावित लाेगों को उजाड़ने से पहले पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 1970 से बसी कॉलोनी में सरकार ने बिजली, पानी तथा अन्य सुविधाएं भी मुहैया करवाई। अचानक क्या हो गया कि वह इस गांव मंे बसे 50 हजार लोगों को उजाडने में लग गए है। 24 अक्टूबर 2020 में परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा ने बस्ती ना उजाडे जाने का आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार गरीबों की बस्ती तो तोड़ने के लिए उतावले हो रही है। लेकिन वन क्षेत्र की सरकारी जमीन पर अमीरों के फार्म हाउस बने है। उन्हें तोडने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही। खोरी निवासी पिछले कई सालों से सरकार की इस कार्रवाई का विरोध कर रहें है। इसमें बुढे़, पुरूष, महिला और बच्चे भी शामिल है। पिछले दिनों एक व्यक्ति ने तो इसी सदमे से आत्महत्या तक कर ली। यह तो सीधे-सीधे मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है। नगर निगम के अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।

खबरें और भी हैं…



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here