क्रिएटिव इनिशिएटिव: पंजाब के लिट्रेचर और आर्ट को संजोया जाएगा इस म्यूजियम में; सेक्टर-28 में पंजाब डिजिटल लाइब्रेरी के कुछ एरिया में बनेगा

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चंडीगढ़5 मिनट पहले

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यह सब हाेगा म्यूजियम में-किताबें,मैन्युस्क्रिप्ट, सिक्के, बर्तन, मिनिएचर पेंटिंग और म्यूरल आर्ट।

विरासत को संजोकर रखने का जो हम काम कर रहे हैं उसके बारे में दूसरों को बताना भी जरूरी है। ताकि वे भी इसके महत्व काे समझें और इतिहास से जुड़ी जानकारी हासिल करें, जो बेहद जरूरी है। यही वजह है कि इस सोच को म्यूजियम का रूप दिया जा रहा है। बता रहे हैं दविंदर पाल सिंह। वे सेक्टर-28 स्थित पंजाबी डिजिटल लाइब्रेरी के फाउंडर हैं। वहीं कुछ एरिया को म्यूजियम का रूप देने जा रहे हैं जिसमें पंजाब के साहित्य और कला को दिखाया जाएगा। यह काम कब तक पूरा हो जाएगा? जवाब में दविंदर बोले – लाइब्रेरी के कुछ एरिया में यह छोटा-सा म्यूजियम बन रहा है जो मई के आखिर तक पूरा होने की उम्मीद है।

साल 2015 से म्यूजियम बनाने के बारे में सोचा था लेकिन अन्य काम में व्यस्त होने के चलते इसे अब पूरा कर पा रहा हूं। यहां पुरानी किताबें और कला से जुड़ी चीजों को डिस्प्ले किया जाएगा। कुछ हाथ से लिखी चीजें भी हैं। छपी हुई पुरानी किताब साल 1782 की है तो अंदाजा लगा सकते हैं कि हाथ से लिखी जानकारी कितनी पुरानी होगी। साथ ही पता चलेगा कि पहले किन- किन विषयों पर लिखा गया है। अपने आप में यह प्रोजेक्ट बहुत दिलचस्प और जानकारी देने वाला रहेगा।

लाइब्रेरी के कुछ एरिया में बन रहा ये छोटा-सा म्यूजियम मई के आखिर तक पूरा होने की उम्मीद है।

लाइब्रेरी के कुछ एरिया में बन रहा ये छोटा-सा म्यूजियम मई के आखिर तक पूरा होने की उम्मीद है।

जानकारी और सोर्स

म्यूजियम के लिए जानकारी कैसे जुटाई? इसके जवाब में दविंदर बोले कि जानकारी किताबों से, दूसरों से मिल जाती है। जो कलेक्शन म्यूजियम में रखी जाएगी उनमें से कुछ मेरे पास थी, कुछ लोगों से लाइब्रेरी को तोहफे में दी। कई चीजें एेसी हैं, जिन्हें हमें खरीदना पड़ता है। अगर किसी के पास पंजाबी लिट्रेचर से जुड़ी कोई भी चीज किसी भी रूप में है वो म्यूजियम में डिसप्ले कर सकता है, कुछ समय के लिए। साथ ही कलेक्शन में देने वाले का नाम भी लिखा जाएगा। इसका एरिया होगा एक हजार स्कवेयर फीट।

साल 2003 में लिया इनिशिएटिव

दविंदर सिंह ने बताया- मैंने पंजाब डिजिटल लाइब्रेरी का इनिशिएटिव साल 2003 में लिया। इससे पहले शुरुआत घर पर बचपन में ही कर दी थी, जब मैं सातवीं में पढ़ता था। पुरानी चीजों को संजोकर रखने का मकसद यही था कि मेरे बच्चे व आने वाले पीढ़ी इन्हें देख सकें, उन्हें इतिहास के बारे में पता चले। आधुनिकता के दौर पर डिजिटल करना शुरू किया। शुरुअात मैन्युस्क्रिप्ट डिजिटाइज करने से हुई और अब किताब, मैगजीन, मैडल, फोटो, टेक्सटाइल आदि को डिजिटाइज कर चुके हैं। सभी के लिए अलग-अलग स्कैनर हैं।

यह सब हाेगा म्यूजियम में-किताबें,मैन्युस्क्रिप्ट, सिक्के, बर्तन, मिनिएचर पेंटिंग और म्यूरल आर्ट

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