कौन-कौन से बैंकों का होगा प्राइवेटाइजेशन?: वित्त मंत्रालय, नीति आयोग और RBI की बैठक में इसी हफ्ते लगेगी मुहर, बजट में हुई थी घोषणा

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नई दिल्लीएक घंटा पहले

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  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया था बैंकों के प्राइवेटाइजेशन का ऐलान
  • 14 अप्रैल को होने जा रही बैठक में बैंकों के नाम फाइनल होने की संभावना

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को पेश किए गए केंद्रीय बजट में दो बैंकों के प्राइवेटाइजेशन की घोषणा की थी। हालांकि अब कुल 4 बैंकों का प्राइवेटाइजेशन होना है। लेकिन अभी तक प्राइवेट किए जाने वाले बैंकों के नामों की घोषणा नहीं की गई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्राइवेटाइजेशन के लिए बैंकों के चयन पर इसी सप्ताह मुहर लग सकती है। इसके लिए वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाओं और आर्थिक मामलों के विभाग, नीति आयोग और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक होने जा रही है। यह बैठक 14 अप्रैल बुधवार को हो सकती है।

इन बैंकों के नामों पर होगी चर्चा

फरवरी में कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था प्राइवेटाइजेशन के लिए पब्लिक सेक्टर के 4-5 बैंकों के नामों पर चर्चा हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार मिड साइज के बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के प्राइवेटाइजेशन पर चर्चा कर सकती है। प्राइवेटाइजेशन की प्रक्रिया शुरू होने में 5-6 महीने लगेंगे। 4 में से 2 बैंकों को इसी फाइनेंशियल ईयर में प्राइवेटाइजेशन के लिए चुन लिया जाएगा। सरकार को डर है कि बैंकों को बेचने की स्थिति में बैंक यूनियन विरोध पर उतर सकती हैं, इसलिए वह बारी-बारी से इन्हें बेचने की कोशिश करेगी। बैंक ऑफ महाराष्ट्र में कम कर्मचारी हैं, इसलिए इसे प्राइवेट बनाने में आसानी रहेगी।

चारों बैंकों में से कौनसा बैंक सबसे पुराना है?

  • बैंक ऑफ महाराष्ट्र 1840 में शुरू हुआ था। उस समय इसका नाम बैंक ऑफ बॉम्बे था। यह महाराष्ट्र का पहला कमर्शियल बैंक था। इसकी 1874 शाखाएं और 1.5 करोड़ ग्राहक हैं।
  • बैंक ऑफ इंडिया 7 सितंबर 1906 को बना था। यह एक प्राइवेट बैंक था। 1969 में 13 अन्य बैंकों को इसके साथ मिलाकर इसे सरकारी बैंक बनाया गया। 50 कर्मचारियों के साथ यह बैंक शुरू हुआ था। इसकी कुल 5,089 शाखाएं हैं।
  • सेंट्रल बैंक 1911 में बना था। इसकी कुल 4,969 शाखाएं हैं।
  • इंडियन ओवरसीज बैंक की स्थापना 10 फरवरी 1937 को हुई थी। इसकी कुल 3800 शाखाएं हैं।

4 बैंकों के प्राइवेटाइजेशन के बाद कितने सरकारी बैंक बचेंगे

अभी कुल 12 सरकारी बैंक हैं। इनमें से 4 के प्राइवेट हो जाने के बाद 8 सरकारी बैंक बचेंगे।

मौजूदा सरकारी बैंक ये हैं– 1. बैंक ऑफ बड़ौदा 2. बैंक ऑफ इंडिया 3. बैंक ऑफ महाराष्ट्र 4. केनरा बैंक 5. सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया 6. इंडियन बैंक 7. इंडियन ओवरसीज बैंक 8. पंजाब नेशनल बैंक 9. पंजाब एंड सिंध बैंक 10. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया 11. यूको बैंक 12. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया

बैंकों के प्राइवेटाइजेशन से इसके ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?

अकाउंट होल्डर्स का जो भी पैसा इन 4 बैंकों में जमा है, उस पर कोई खतरा नहीं है। खाता रखने वालों को फायदा ये होगा कि प्राइवेटाइजेशन के बाद उन्हें डिपॉजिट्स, लोन जैसी बैंकिंग सर्विसेज पहले के मुकाबले बेहतर तरीके से मिल सकेंगीं। एक जोखिम यह रहेगा कि कुछ मामलों में उन्हें ज्यादा चार्ज देना होगा। उदाहरण के लिए सरकारी बैंकों के बचत खातों में अभी एक हजार रुपए का मिनिमम बैलेंस रखना होता है। कुछ प्राइवेट बैंकों में मिनिमम बैलेंस की जरूरी रकम बढ़कर 10 हजार रुपए हो जाती है।

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