कोर्ट की सख्ती: गौतम गंभीर मामले में ड्रग कंट्रोलर को दिल्ली हाईकोर्ट की फटकार; ड्रग कंट्रोलर ने गौतम गंभीर और विधायक प्रवीण को दिया क्लीन चिट

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नई दिल्ली7 मिनट पहले

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दिल्ली हाईकोर्ट ने बीजेपी सांसद गौतम गंभीर और विधायक प्रवीण कुमार को क्लीन चिट देने के लिए हाईकोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के दौरान ड्रग कंट्रोलर को फटकार लगाई है। जस्टिस विपिन सांघी की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि आप जांच नहीं कर सकते हैं तो बताएं, हम आपको हटाकर किसी और को यह जिम्मा दे देते हैं।

हाईकोर्ट ने ड्रग कंट्रोलर को ोफटकार लगाते हुए कहा कि हम चाहते थे कि आप बताएं कि किस कानून के तहत इसकी इजाजत है, किसमें नहीं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि वे गौतम गंभीर को मिली दवाइयों पर दोबारा जांच कर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें। कोर्ट ने विधायक प्रवीण कुमार को लेकर भी दोबारा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने प्रीति तोमर को क्लीन चिट देने के ड्रग कंट्रोलर के स्टेटस रिपोर्ट को मंजूर कर लिया है। कोर्ट ने गौतम गंभीर और प्रवीण कुमार के बारे में ड्रग कंट्रोलर ने कानूनी पक्षों को नहीं बताया है। कोर्ट ने कहा कि गौतम गंभीर फाउंडेशन को फैबिफ्लू लाइसेंसी डीलर से मिला या रिटेलर से मिला ये नहीं बताया गया है। कोर्ट ने कहा कि प्रवीण कुमार के बारे में ड्रग कंट्रोलर और पुलिस की रिपोर्ट में तथ्यात्मक विरोधाभास हैं।

ड्रग कंट्रोलर को अपराध प्रक्रिया संहिता का पता नहीं

मामले की सुनवाई के दौरान वकील विराग गुप्ता ने कहा कि लगता है कि ड्रग कंट्रोलर को प्रक्रियाओं की जानकारी नहीं है। इस पर ड्रग कंट्रोलर की ओर से वकील नंदिता राव ने कहा कि उन्हें प्रक्रियाओं का पता है, लेकिन उन्हें अपराध प्रक्रिया संहिता का पता नहीं है। इस पर नंदिता राव ने कहा कि अगर पुलिस ने जांच की होती तो हमने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की होती।

याचिकाकर्ता को ये अधिकार है कि वो क्लोजर रिपोर्ट का विरोध करे। ड्रग कंट्रोलर के पास लॉकअप और न्यायिक हिरासत जैसे साधन नहीं होते हैं। किसी व्यक्ति को दवाईयों की हजारों स्ट्रिप कैसे मिल सकती हैं। नंदिता राव ने कहा कि एक ही किस्म के तीन स्टेटस रिपोर्ट हैं। तब कोर्ट ने पूछा कि क्या कोई डीलर इस तरह दवाइयों की सप्लाई कर सकता है और क्या इसकी अनुमति है।

दवाइयों की हजारों स्ट्रिप की जमाखोरी उसके बाद मरीजों की जांच होनी चाहिए थी। उसके बाद ही डॉक्टर को कहना चाहिए था कि केमिस्ट के पास जाएं, लेकिन महामारी के समय जब मरीजों की मौत हो रही है, एक हफ्ते की देरी काफी भारी हो सकती थी। तब कोर्ट ने कहा कि हम आपसे ये उम्मीद नहीं कर रहे हैं कि आप किसी व्यक्ति के लिए उपस्थित हों।

कोर्ट ने नंदिता राव से कहा कि अगर आप ड्रग कंट्रोलर की ओर से पेश हो रही हैं तो उनके लिए दलीलें रखिए। आप ये मत कहिए कि दवाइयों की कमी थी, हम भी जानते हैं कि दवाइयों की कमी थी। अगर ये जवाब आपकी तरफ से आता तो आप हर सवाल का जवाब देतीं, तब राव ने कहा कि ये गंभीर मसला है, मैं व्यक्तिगत रूप से नहीं जानती हूं। हम आंखें बंद नहीं कर सकते हैं।

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