कोरोना के खिलाफ हर्ड इम्यूनिटी की रणनीति को WHO चीफ ने बताया- ‘बेईमानी’, कहा- इसके बारे में बहुत कम पता

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डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम गेब्रियेसस (तस्वीर- News18.com)

दुनिया भर में कोरोना वायरस के अब तक 38,040,148 मामले सामने चुके हैं जिसमें से 1,085,373 की मौत हो गई है जबकि 28,598,151 लोग ठीक हो चुके हैं वहीं फिलहाल 8,356,624 केस एक्टिव हैं. अमेरिका, भारत और ब्राजील, क्रमशः कोरोना के मामले में दुनिया में तीन बड़े देश हैं.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    October 13, 2020, 9:13 AM IST

लंदन. दुनिया भर में फैले कोरोना वायरस के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) लगातार देशों को उनकी कार्रवाई के प्रति और जागरुक कर रहा है.  अब विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने महामारी को रोकने के लिए हर्ड इम्यूनिटी एक कागर रणनीति होने के विचार पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि  ऐसे प्रस्ताव को ‘मूलतः बेईमानी’ है.सोमवार को प्रेस ब्रीफिंग में, डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम गेब्रियेसस ( Tedros Adhanom Ghebreyesus) ने कहा कि स्वास्थ्य अधिकारियों का लक्ष्य आमतौर पर टीकाकरण द्वारा हर्ड इम्यूनिटी हासिल करना है. टेड्रोस ने कहा कि खसरा जैसी अत्यधिक संक्रामक बीमारी से हर्ड इम्यूनिटी पाने के लिए उदाहरण के लिए, लगभग 95% आबादी का टीकाकरण किया जाना चाहिए.

गेब्रियेसस ने कहा कि हर्ड इम्यूनिटी लोगों को वायरस से बचाने के लिए  हासिल की जाती है, न कि उन्हें एक्सपोज करने के लिए. कुछ शोधकर्ताओं ने तर्क दिया है कि आर्थिक रूप से  विनाशाकरी लॉकडाउन लगाने की जगह हर्ड इम्यूनिटी को तवज्जो दी जानी चाहिए. महामारी को रोकने का यह एक व्यावहारिक तरीका है. टेड्रोस ने कहा कि कभी भी सार्वजनिक स्वास्थ्य के इतिहास में हर्ड इम्यूनिटी का इस्तेमाल महामारी का मुकाबला करने  की रणनीति के रूप में नहीं किया गया है.

गेब्रियेसस ने कहा कि अगर हर्ड इम्यूनिटी हासिल भी हो जाती है तो भी हमें कोविड-19 की इम्यूनिटी के बारे में बहुत कम पता है. उन्होंने कहा हमारे पास कुछ तथ्य हैं, लेकिन हमारे पास पूरी तस्वीर नहीं है.  टेड्रोस ने कहा कि अधिकांश लोग किसी प्रकार की इम्यून रिसपॉन्स विकसित करते दिख रहे हैं, यह स्पष्ट नहीं है कि यह इम्यूनिटी कितने लंबे समय तक चलती है या कितनी मजबूत है. अलग-अलग लोगों पर इसका अलग असर है.

गेब्रियेसस ने कहा कि ‘जिस वायरस के बारे में हम ज्यादा नहीं जानते उसे इस तरह खुले में छोड़ देना अनैतिक है.’ डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि आबादी के 10% से कम के पास कोरोना से किसी किस्म की इम्यूनिटी है. इसका मतलब है कि बाकी दुनिया अब भी संदेहास्पद है.





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