कोरोना का खतरा अभी बरकरार: डेल्टा प्लस वैरिएंट मिलने से जिले में बजी खतरे की घंटी, स्वास्थ्य विभाग ने छह टीम बनाकर शुरू की ट्रैसिंग व सैंपलिंग

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फरीदाबाद3 घंटे पहले

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डॉक्टरों के मुताबिक डेल्टा वैरिएंट डिटेक्ट होने वाला 25 वर्षीय युवक आईटी प्रोफेशनल है।

औद्योगिक नगरी में कोरोना के डेल्टा प्लस वैरिएंट मिलने से खतरे की घंटी एक बार फिर बज गयी है। स्वास्थ्य विभाग ने मरीज की पहचान कर छह टीमें बनाकर मरीज के इलाके में सैंपलिंग, ट्रेसिंग व वैक्सीनेशन का काम शुरू कर दिया है। संक्रमित व्यक्ति की उम्र करीब 25 साल बताई जा रही है। वह केंद्र सरकार के किसी विभाग मेें आईटी प्रोफेशनल है। फिलहाल उसकी हालत सामान्य है और नियमित रूप से ऑफिस भी आ जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि फरीदाबाद मेें डेल्टा प्लस वैरिएंट मिलना चिंता का विषय है। ऐसे में जरा भी लापरवाही लोगों पर भारी पड़ सकती है। क्योंकि ये वायरस तीन से चार गुना तक तेजी से फैलता है। ऐसे में जब तक जरूरी न हो घरों से बाहर न निकलें। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें।

डॉ.एके पांडेय रजिस्टार ईएसआई मेडिकल कॉलेज फरीदाबाद

डॉ.एके पांडेय रजिस्टार ईएसआई मेडिकल कॉलेज फरीदाबाद

ऐसे डिटेक्ट हुआ मरीज

ईएसआई मेडिकल कॉलेज के रजिस्टार डॉ. एके पांडेय ने दैनिक भास्कर को बताया कि डिपार्टमेंट आफ बायोटेक्नोलॉजी के साथ एक रिसर्च प्रोजेक्ट जीनोम सीक्वेंसिंग पर चल रहा है। इस रिसर्च प्रोजेक्ट में ईएसआई मेडिकल कॉलेज एनआईटी तीन, मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज दिल्ली, सफदरजंग हास्पिटल, एनएनजेपी, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, गुड़गांव स्थित सिविल अस्पताल और मेदांता शामिल है। करीब एक साल से इस पर रिसर्च चल रहा है। पिछले महीने 165 संक्रमितों का सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए आईजीआईबी दिल्ली भेजा था। उसमें ये डिटेक्ट हुआ।

अब रिकवर होकर ड्यूटी भी कर रहा व्यक्ति

डॉ. पांडेय ने बताया कि मई के प्रथम सप्ताह में मरीज संक्रमित हुआ था। 15 दिन होम आइसोलेशन में ही रहकर रिकवर हो गया। उसके मामूली सिमटर्म जैसे जुकाम व बुखार की शिकायत थी। मरीज का वैक्सीनेशन नहीं हुआ था। उधर स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो डेल्टा वैरिएंट डिटेक्ट होने वाला 25 वर्षीय युवक आईटी प्रोफेशनल है और केंद्र सरकार के किसी विभाग में कार्यरत है। वह रिकवर होने के बाद नियमित रूप से ड्यूटी भी कर रहा है।

जीनाेम सीक्वेंसिंग की ये है गाइडलाइन

डाॅ. पांडेय ने बताया कि हर माह जितने संक्रमित आते हैं उनकी या फिर जो विदेश यात्रा करके आए हैं या जो वैक्सीनेशन के बाद भी संक्रमित हुए हैं उनमें से 5 फीसदी सैंपल आईजीआईबी दिल्ली में जीनोम क्वेंसिंग के लिए भेजते हैं। लेकिन राहत की बात ये है कि अभी तक उनमें से किसी सैंपल में डेल्टा प्लस वैरिएंट डिटेक्ट नहीं हुआ है।

चार गुना अधिक तेजी से फैलता है संक्रमण

डॉक्टर ने बताया कि डेल्टा प्लस वैरियंट ay.1 के रूप में डिटेक्ट हुआ है। यह करीब चार गुना तेजी से फैलता है। यह वायरस सबसे अधिक लंग्स को प्रभावित करता है। इसके लक्षण भी पहले वायरस जैसे ही हैं। यानि बुखार आना, खांसी, जुकाम आदि। डॉक्टर के मुताबिक ये वायरस वैक्सीन को भी चकमा दे जाता है। लेकिन जिन लाेगों ने वैक्सीनेशन करा रखा है उनकी हालत गंभीर नहीं होने पाती।

छह टीमें ट्रेसिंग व सैंपलिंग में जुटी

सीएमओ डॉ. रणदीप सिंह पुनिया ने बताया कि डेल्टा प्लस वैरिएंट के मरीज की पहचान करने के बाद संबंधित इलाके में छह टीमें लगाई गयी हैं। उस इलाके में सभी घरों से सैंपलिंग ली जा रही है। साथ ही मरीज के संपर्क में आए लाेगाें को भी ट्रेस किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उस इलाके में सभी घरों में वैक्सीनेशन भी जोर है।

बरते सावधानी नहीं तो बढ़ सकता है खतरा

सीएमओ ने कहा कि अभी लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। जब तक जरूरी न हो घर से बाहर न निकलें। खासकर भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें। मास्क लगाना और नियमित रूप से हाथ धोना अनिवार्य है। इसी उपाय से ही डेल्टा वैरिएंट से बचा जा सकता है।

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