कोटखाई गैगरेप: पुलिस अफसरों ने बड़े नेता के कहने पर सबूतों को खत्म किया: शांता कुमार

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शांता कुमार और सीएम जयराम ठाकुर. (FILE PHOTO)

Shimla-Kotkhai Gang rape and Murder Case: 4 जुलाई 2017 का यह मामला है. शिमला के कोटखाई में दांदी जंगल में 16 साल की नाबालिग स्कूली छात्रा मृत मिली थी. हाईकोर्ट ने मामले में संज्ञान लेते हुए इसकी जांच सीबीआई को दी थी.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    October 16, 2020, 1:24 PM IST

पालमपुर. यूपी के हाथरस में कथित गैंगरेप मामले (Gang rape Case) के बाद फिर से देशभर में महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा गर्मा गया है. हिमाचल में भी बहुचर्चित शिमला (Shimla) के कोटखाई के गुड़िया गैंगरेप (Gudia Gang rape case) मामला भी चर्चा में आ गया है. बुधवार को गुड़िया के परिजनों ने भी हिमाचल हाईकोर्ट में सीबीआई (CBI) की जांच पर सवाल उठाते हुए याचिका दाखिल की है. वहीं, भारतीय जनता पार्टी के नेता एवं हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शान्ता कुमार (Shanta Kumar) ने मामले पर बयान दिया है.

जांच पर शांता कुमार के सवाल
शांता कुमार ने कहा कि दिल्ली में निर्भया और हिमाचल के कोटखाई में गुड़िया कांड के बाद पूरे भारत में बेटियों के साथ बलात्कार का अत्याचार प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है और पूरे देश के लिए इससे अधिक शर्म की और कोई बात नहीं हो सकती है. गुड़िया का पूरा परिवार विवश होकर अदालतों के चक्कर लगा रहा है. उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से विशेष आग्रह किया है कि उस पूरे परिवार के दिल की पीड़ा को समझ कर एक बार न्याय दिलवाने का एक और प्रयत्न सरकार करें, भले ही सीबीआई भी खाली हाथ लौट गई थी, लेकिन अनुमान यह है कि पुलिस के बड़े अधिकारियों ने किसी बड़े नेता के कहने पर सबूतों को इतने वैज्ञानिक तरीके से समाप्त किया कि सीबीआई को भी कुछ हाथ नहीं लगा. हालांकि, अपराध विज्ञान का यह सिद्धान्त है कि हर अपराध अपने पीछे कोई निशानी जरूर छोड़ता है. तलाश करने वाला चाहिये.

अपराधी आज भी खुलेआम घूम रहेशान्ता कुमार ने कहा कि पूरा परिवार और गांव के लोग बड़े विश्वास के साथ यह कह रहे हैं कि गुड़िया के असली अपराधी आज भी खुलेआम घूम रहे हैं. उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि एक बार उन सब कथित अपराधियों को पकड़ कर सभी संभव सच्चाई का पता लगाने की कोशीश करें. उस परिवार को न्याय दिलवाना भी जरूरी है और उतना ही अधिक जरूरी यह भी है कि उन्हें यह भरोसा हो जाए कि उनकी अपनी प्रदेश सरकार ने सभी संभव प्रयत्न कर किए हैं. उन्होंने सुझाव दिया है कि सरकार अत्यन्त योग्य ईमानदार कुछ अवकाश प्राप्त और कुछ वर्तमान पुलिस अधिकारियों की एक विशेष जांच समिति का गठन करके और उस परिवार को न्याय दिलवाये. शान्ता कुमार ने गुड़िया परिवार को विश्वास दिलाया कि पूरे हिमाचल की जनता उनके साथ है.

क्या है मामला और क्यों उठ रहे सवाल
4 जुलाई 2017 का यह मामला है. शिमला के कोटखाई में दांदी जंगल में 16 साल की नाबालिग स्कूली छात्रा मृत मिली थी. हाईकोर्ट ने मामले में संज्ञान लेते हुए इसकी जांच सीबीआई को दी थी. मामले में लॉकअप में पूछताछ के दौरान एक आरोपी को मौत के घाट उतारा गया था. इसमें हिमाचल पुलिस के पूर्व आईजी, एसपी समेत नौ पुलिसकर्मी बनाए गए थे. बाद में सीबीआई ने मामले में एक चिरानी नीलू को गिरफ्तार किया. उसे ही इस हत्या और दुराचार का आरोपी बनाकर मामले में कोर्ट में चालान पेश किया है. अब कोर्ट में मामले की सुनवाई चल रही है. वहीं, मामले के एक आरोपी सूरज कस्टोडियल डेथ केस में चंडीगढ़ में सुनवाई चल रही है. लोगों का सवाल है कि एक आरोपी इस तरह के जघन्य अपराध को अंजाम नहीं दे सकता है, इसलिए सीबीआई की जांच पर सवाल उठ रहे हैं.





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