कोटकपूरा गोलीकांड: गोली का आदेश किसका? सवाल पर सुखबीर बोले- अफसरों से पूछो, 4 घंटे में सुखबीर से पूछे 80 सवाल

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चंडीगढ़एक घंटा पहले

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  • एसआईटी से कहा- गृहमंत्री नहीं, ड्यूटी मजिस्ट्रेट लेते हैं फैसला

कोटकपूरा गोलीकांड की जांच कर रही एसआईटी ने शनिवार को शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल से पुलिस ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में 4 घंटे में करीब 80 सवाल पूछे। एडीजीपी एलके यादव, आईजी राकेश अग्रवाल और डीआईजी फरीदकोट रेंज सुरजीत सिंह की तीन मेंबरी एसआईटी ने पूछा, बतौर होम मिनिस्टर क्या आपने गोली चलाने का आदेश दिया था?

इस पर सुखबीर बोले, ऐसे आदेश गृहमंत्री नहीं, हालात देख ड्यूटी मजिस्ट्रेट, डीसी और अन्य अफसरों के साथ सलाह के बाद लेते हैं। आप उन्हीं से पूछें। हाईकोर्ट के आदेश पर गठित नई एसआईटी 22 जून को तत्कालीन मुख्यमंत्री परकाश सिंह बादल से ढाई घंटे तक पूछताछ कर चुकी है। एसआईटी की पूछताछ के दौरान सुखबीर बादल का समर्थन करने के लिए शिअद की सीनियर लीडरशिप पुलिस ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट पहुंच गई। पहले सभी बाहर खड़े रहे। बाद में शिअद नेताओं को अंदर ले जाकर एक हाॅल में बैठाया गया। 4 घंटे पूछताछ पर अकाली नेता डॉ. दलजीत चीमा ने कहा कि एसआईटी गांधी परिवार की कठपुतली है। इसे 10 जनपथ से कंट्रोल किया जा रहा है।

छह साल हो गए, ज्यादा कुछ याद नहीं
कोटकपूरा गोलीकांड की सबसे पहले जानकारी किसने दी थी?
– संबंधित अफसरों से पता चला था। बतौर गृहमंत्री इंटेलिजेंस और अन्य अफसरों से जानकारी मिलती थी।
गोली का आदेश किसने दिया? आपसे संपर्क किसने साधा था?
– धरनास्थल से भीड़ हटाने के लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट, डिप्टी कमिश्नर, तहसीलदार और अन्य अफसर माैके पर तैनात रहते हैं। हालात देख ड्यूटी मजिस्ट्रेट अन्य अफसरों के साथ बातचीत कर फैसला लेते हैं कि क्या कार्रवाई करनी है। आप उनसे क्यों नहीं पूछते? वे सही जानकारी देंगे।
क्या गोली चलाने से पूर्व ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने आपसे बात की थी?
– ड्यूटी मजिस्ट्रेट मुझसे क्यों बात करेंगे? वे बात करते हैं संबंधित जिला अफसरों से। डीएम ने डीसी से बात की होगी। मुझे इसकी जानकारी नहीं है। ड्यूटी मजिस्ट्रेट ही सही जवाब दे सकते हैं।
क्या उस वक्त डीजीपी सुमेध सिंह सैनी से आपकी बात हुई थी?
– गृृहमंत्री होने के नाते सभी अफसरों से बात होती थी। याद नहीं कि किस अफसर ने मेरे साथ सीधे बात की।
गोली चलने के वक्त आप कहां थे?
– उस वक्त शायद चंडीगढ़ में था। घटना 2015 की है, इसलिए पक्के तौर पर कुछ भी नहीं कह सकता।
आपने किसी खास अफसर को धरने पर भेजा था? डीजीपी सैनी को कोई निर्देश दिए थे?
– धरनास्थल पर संबंधित जिलों के अधिकारी मौजूद रहते हैं। मैं अफसरों को ड्यूटी ईमानदारी से करने और लोगों की समस्याएं प्राथमिकता के आधार पर हल करने के लिए कहता था। जहां तक मुझे याद है, किसी व्यक्ति विशेष को कुछ नहीं कहा था।

नवजोत सिद्धू बोले- एसआईटी इंसाफ दिलाने के करीब
पूर्व कैबिनेट मंत्री नवजोत सिद्धू ने शनिवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट अपलोड कर कहा, ‘नई एसआईटी पंजाब की आत्मा को इंसाफ दिलाने के करीब है। बेअदबी हुए 6 साल हो गए। आपके शासन के 2 साल में न्याय नहीं हुआ। फिर साढ़े चार साल निकल गए। आप सियासी दखल का रोना रोते हैं। ऐसा तब था जब साढ़े छह साल तक इंसाफ नहीं मिला।’ एक अन्य पोस्ट में सिद्धू ने नशाखोरी पर डीजीपी से पूछा, ‘हाईकोर्ट द्वारा सरकार को सौंपी रिपोर्ट में जिन बड़ी मछलियों का जिक्र है, उनके खिलाफ क्या किया?

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