किशोर कुमार ने जब टेबल पर लेटकर गाया था यह सॉन्ग, आज भी सुपरहिट गाना

0
2


किशोर कुमार के इस गाने को आज भी बेहद पसंद किया जाता है.

70-80 के दशक में जितने लोगों ने संगीतकार मोहम्मद रफी की आवाज को पसंद किया था, उतने ही लोगों नें किशोर कुमार (Kishore Kumar) की आवाज को भी पसंद किया. किशोर दा ने अपनी आवाज से लाखों दिलों को छूकर अपना बनाया था और आज भी किशोर कुमार की आवाज के लोग फैन हैं.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    October 13, 2020, 12:01 PM IST

मुंबई. बॉलीवुड में अपनी आवाज और एक्टिंग के दम पर अपनी पहचान बनाने वाले किशोर कुमार (Kishore Kumar) का निधन आज ही के दिन यानी 13 अक्टूबर 1987 को मुंबई में हुआ था. 70-80 के दशक में जितने लोगों ने संगीतकार मोहम्मद रफी की आवाज को पसंद किया था, उतने ही लोगों नें किशोर दा की आवाज को भी पसंद किया. किशोर दा ने अपनी आवाज से लाखों दिलों को छूकर अपना बनाया था और आज भी किशोर कुमार की आवाज के लोग फैन हैं.

आशा भोसले ने सुनाई कहानी
किशोर दा ने बहुमुखी अंदाज से गाने गाए हैं और उनके सभी गाने बहुत ही हिट रहे. किशोर कुमार और आशा भोसले ने फिल्मी दुनिया को कई सुपरहिट गाने दिए हैं. हाल ही में आशा भोसले (Asha Bhosle) ने किशोर कुमार का गाना ‘इंतहा हो गई’ के पीछे का एक किस्सा अपने यूट्यूब चैनल पर ‘आशा की आशा’ में बताया था. आशा भोसले ने बताया कि साल 1984 में प्रकाश मेहरा के निर्देशन में बनी फिल्म ‘शराबी’ का गाना ‘इंतहा हो गई इंतजार की..’ को किशोर कुमार ने किस तरह से गाया था.

इसलिए टेबल पर लेटकर गाया था गानाआशा ने बताया कि पहले तो किशोर दा ने इसे गाने से मना कर दिया था. फिर बाद में वह गाने के लिए तैयार हो गए. उन्होंने फैसला किया की इस गाने को वह शराबी की तरह लेट कर गाएंगे. उन्होंने आसपास में मौजूद कर्मचारियों से टेबल की व्यवस्था करवाई और फिर उसी पर लेट कर इस गाने को रिकॉर्ड किया. बाद में यह गाना सुपरहिट साबित हुई और आज भी इस गाने को बेहद पसंद किया जाता है.

बता दें, किशोर दा ने 1957 में बनी फिल्म ‘फंटूश’ में ‘दुखी मन मेरे’ गीत से अपनी ऐसी धाक जमाई कि जाने माने संगीतकारों को किशोर कुमार की प्रतिभा का लोहा मानना पड़ा. इसके बाद एसडी बर्मन ने किशोर कुमार को अपने संगीत निर्देशन में कई गीत गाने का मौका दिया. किशोर दा ने हिन्दी के साथ ही तमिल, मराठी, असमी, गुजराती, कन्नड़, भोजपुरी, मलयालम और उड़िया फिल्मों के लिए भी गीत गाए. उनको आठ फिल्म फेयर पुरस्कार मिले. उनको पहला फिल्म फेयर पुरस्कार 1969 में फिल्‍म ‘अराधना’ के गीत ‘रूप तेरा मस्ताना, प्यार मेरा दीवाना’ के लिए दिया गया था.





Source link

Advertisement

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here