कार खरीदने का है प्लान लेकिन मैनुअल-ऑटोमैटिक में है कंफ्यूजन, तो एक्सपर्ट से समझिए कौन सा विकल्प आपके लिए है बेहतर

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नई दिल्ली4 घंटे पहलेलेखक: अर्पित सोनी

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  • कम चलना है तो मैनुअल गियरबॉक्स सबसे बेहतर विकल्प है, माइलेज भी ज्यादा मिलेगा।
  • ऑटोमैटिक गियरबॉक्स में AT सबसे भरोसेमंद और DCT सबसे तेज गियरबॉक्स है।

कार खरीदने शोरूम पर जाओ तो एग्जिक्युटिव एक ही मॉडल में कई तरह के गियरबॉक्स ऑप्शन गिना देते हैं, कि इस कार में मैनुअल तो है ही, एएमटी, आईएमटी और डीसीटी का ऑप्शन भी मिल जाएगा। उसके बाद इनकी खूबियां गिना दी जाती हैं और आप कंफ्यूज हो जाते हैं। नतीजतन आप जाते तो कुछ और खरीदने है लेकिन खरीद कुछ और लाते हैं।

अगर आप भी इस फेस्टिव सीजन में कार खरीदने का प्लान कर रहे हैं और यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि आपके लिए कौन सा गियरबॉक्स ऑप्शन सही रहेगा, तो यहां हमने आपको आसान भाषा में समझाने की कोशिश की है कि इन गियरबॉक्स में क्या अंतर होता है और किस काम के लिए कौन सा विकल्प चुनना चाहिए।

सबसे पहले बात करते हैं कितने प्रकार के गियरबॉक्स ऑप्शन बाजार में मौजूद हैं…

आसान भाषा में समझिए ये कैसे काम करते हैं और आखिर इनमें क्या अंतर है…

1. मैनुअल (MT)

  • यह मल्टी स्पीड गियरबॉक्स होता है, जिसमें ड्राइवर खुद तय करता है कि किस स्पीड के हिसाब से गियर को कब शिफ्ट करना है।
  • यानी गियर चेंज करने के लिए ड्राइवर को अपने इनपुट देने होते हैं साथ ही गियर लीवर, क्लच, ब्रेक और एक्सेलरेटर सभी ड्राइवर को ही ऑपरेट करने होते हैं।

2. ऑटोमैटिक (AT या टॉर्क कन्वर्टर)

  • इस गियरबॉक्स में मैनुअल इनपुट नहीं देना होता। इसमें सारा काम सेंसर्स करते हैं। स्पीड और आरपीएम के हिसाब से ये सेंसर्स खुद तय करते हैं कि गियर बदलना है या नहीं।
  • इसमें गियर लीवर तो होता है लेकिन उसे आप गियर बदलने के लिए नहीं बल्कि ड्राइव, रिवर्स, न्यूट्रल और पार्किंग मोड में जाने के लिए इस्तेमाल करते हैं।
  • इस गियरबॉक्स में क्लच पेडल नहीं मिलता है। इसमें टॉर्क कन्वर्टर नाम का एक डिवाइस होता है। गियर बदलते समय क्लच की बजाए यह डिवाइस सारे काम करता है।
  • इसलिए ये काफी तेजी से काम करता है और इसे सबसे विश्वसनीय भी माना जाता है।

3. ऑटोमेटेड मैनुअल ट्रांसमिशन (AMT)

  • टेक्निकली यह मैनुअल गियरबॉक्स ही है लेकिन इसमें क्लच ऑपरेशन एक खास AMT यूनिट की मदद से होता है। जैसे कि हम पहले ही बता चुके हैं ट्रेडिशनल ऑटोमैटिक गियरबॉक्स (AT) में क्लच नहीं होता।
  • इसके विपरीत ऑटोमैटिक मैनुअल गियरबॉक्स में क्लच पेडल तो नहीं होता लेकिन इंजन के अंदर क्लच जरूर होता है, जिसका ऑपरेशन ऑटोमैटिक होता है, यानी जब गियर चेंज होगा तब क्लच AMT यूनिट की मदद से काम करेगा।
  • यह किफायती ऑटोमैटिक तकनीक है, लेकिन क्लच होने की वजह से ये AT की तुलना में थोड़ा स्लो है।

4. इंटेलीजेंट मैनुअल ट्रांसमिशन (iMT)

  • इस गियरबॉक्स में क्लच ऑपरेशन ऑटोमैटिक होते हैं लेकिन गियर ड्राइवर को मैनुअली ही बदलने पड़ते हैं। AMT की तुलना में ये थोड़ा फास्ट है, क्योंकि AMT गियरबॉक्स में सेंसर तय करते हैं कि कब गियर चेंज करना है और फिर क्लच काम करता है।
  • iMT में आप खुद गियर चेंज कर रहे होते हैं तो क्लच भी उसी समय पर काम करने लगता है, जिसकी वजह से यह फास्ट होता है। इसमें भी क्लच पेडल नहीं मिलता।

5. डुअल क्लच ट्रांसमिशन (DCT)

  • जैसे की नाम से समझ आ रहा है इसमें दो क्लच होते हैं लेकिन दोनों ही अलग-अलग काम करते हैं। एक क्लच ओड नंबर गियर्स का ध्यान रखता है यानी 1,3,5 और दूसरा ईवन नंबर गियर्स का ध्यान रखता यानी 2,4,6, यानी इसमें दो क्लच ऑपरेशन होते हैं।
  • इसी वजह से कि यह काफी तेजी से काम करता है। ऑटोमैटिक की दुनिया में इसे सबसे तेज गियरबॉक्स माना जाता है।

6. कंटीन्यूअसली वेरिएबल ट्रांसमिशन (CVT)

  • टेक्निकली इसमें गियर्स होते ही नहीं है। मैनुअल गियरबॉक्स में जहां गियर रेशो सेट होते हैं और हर गियर रेशो पर तय परफॉर्मेंस मिलती है लेकिन CVT में गियर रेशो होते ही नहीं है।
  • इसके अंदर स्टेप्स सेट होते हैं। इसमें दो पुली लगी होती हैं, जो आपस में बेल्ट या चेन से कनेक्ट होती हैं। यह स्टेप्स के हिसाब से काम करता है और उसी के हिसाब से स्पीड बढ़ाता जाता है। जापानी सबसे ज्यादा सीवीटी ही यूज करते हैं।

ऐसे तय करें आपके लिए कौन सा गियरबॉक्स काम का है…

1. मैनुअल (MT)

  • इस गियरबॉक्स पर तब जाना चाहिए जब आपको सबसे विश्वसनीय सिस्टम चाहिए हो, क्योंकि जब से कारें बनना शुरू हुई हैं तब से हमारे पास यही गियरबॉक्स है। इसमें पूरा सिस्टम ड्राइवर के कंट्रोल में होता है। यह भी कहा जाता है कि जितनी ज्यादा मैकेनिकल चीजें होंगी, वो सिस्टम उतना ही भरोसेमंद होगा क्योंकि उसमें उतने ही कम सेंसर्स और पार्ट्स लगे होंगे।
  • ज्यादा सेंसर्स होंगे तो मेंटनेंस कॉस्ट भी बढ़ेगा। मैनुअल ट्रांसमिशन में सेंसर्स नहीं होते, सारे काम खुद ही करने पड़ते हैं, ऐसे में यह ज्यादा भरोसेमंद है। यह उन लोगों को लेना चाहिए जो सबसे ज्यादा माइलेज और सबसे ज्यादा विश्वसनीय गियरबॉक्स चाहते हों। यह सबसे सस्ता भी है।

2. ऑटोमैटिक (AT या टॉर्क कन्वर्टर)

  • शहर की ट्रैफिक भरी सड़कों पर सफर करना हो या हाईवे पर, अगर आप सुविधा के साथ एक भरोसेमंद गियरबॉक्स चाहते हैं तो आप ऑटोमैटिक (टॉर्क कन्वर्टर) को चुन सकते हैं लेकिन इसके लिए आपको माइलेज से थोड़ा कॉम्प्रोमाइज करने के लिए भी तैयार रहना होगा।
  • यह ऐसे लोगों के लिए बढ़िया विकल्प है, जो गियर और क्लच के झंझट में नहीं पड़ना चाहते बल्कि एक सुविधाजनक ड्राइव करना चाहते हैं। वैसे, ऑटोमैटिक की दुनिया में AT या टॉर्क कन्वर्टर सबसे विश्वसनीय गियरबॉक्स है।

3. ऑटोमेटेड मैनुअल ट्रांसमिशन (AMT)

  • यह उन लोगों के लिए ठीक है, जिन्हें लगता है कि ट्रेडिशनल ऑटोमैटिक (टॉर्क कन्वर्टर) ज्यादा माइलेज नहीं देता है। AMT में आपको थोड़ा ज्यादा माइलेज मिल जाता है। AMT एक्चुअल में मैनुअल गियरबॉक्स ही होता है लेकिन इसके कुछ ऑपरेशन ऑटोमैटिकली करने के लिए इसमें एक किट लगा दी जाती है, इसलिए इसमें माइलेज मैनुअल के आसपास ही मिलता है।
  • ऐसे में यह उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प बन जाता है, जिन्हें माइलेज के साथ-साथ ऑटोमैटिक की सुविधा भी चाहिए, हालांकि इसमें स्मूदनेस नहीं मिलेगी क्योंकि गियर शिफ्ट थोड़े जर्की होते हैं।
  • अगर आपकी गाड़ी में ऑटो होल्ड फंक्शन नहीं है तो चढ़ाई पर चलते समय आपको सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि रोल बैक होने की संभावना बनी रहती है, जिसकी वजह यह है कि क्लच और गियर के बीच तालमेल बैठने में थोड़ा समय लगता है।
  • फुली ऑटोमैटिक में इस तरह की समस्या नहीं आती क्योंकि उसमें क्लच होता ही नहीं है। घाट या पहाड़ी इलाके में रह रहे हैं तो AMT ना ही चुने तो बेहतर है।

4. इंटेलीजेंट मैनुअल ट्रांसमिशन (iMT)

  • यह उन लोगों के लिए बेहतर है जिन्हें गियर चेंज करने में तो नहीं लेकिन क्लच ऑपरेट करने में काफी परेशानी होती है, खासतौर से नए ड्राइवर्स के साथ ऐसा अक्सर होता है। सबसे पहले ये वेन्यू में देखने को मिला था।
  • टेक्निकली यह मैनुअल ट्रांसमिशन ही है लेकिन कंपनी ने इसे इंटेलीजेंट मैनुअल ट्रांसमिशन नाम दिया है हालांकि इसमें सिर्फ क्लच ही ऑटोमैटिकली ऑपरेट होता है। यह एएमटी से ज्यादा स्मूद है, क्योंकि गियर आपके हाथ में है।
  • एएमटी की तुलना में इसे बेहतर माना जा सकता है साथ ही यह लो मेंटनेंस भी है क्योंकि इसमें सिर्फ क्लच ही है, जो सेंसर के जरिए काम करता है।

5. डुअल क्लच ट्रांसमिशन (DCT)

  • यदि आप ऑटोमैटिक गाड़ी चलाना चाहते हैं लेकिन साथ में परफॉर्मेंस भी चाहिए है, तो आपके लिए डीसीटी गियरबॉक्स एक बेहतर विकल्प हो सकता है क्योंकि यह काफी तेजी से काम करता है।
  • उदाहरण से समझें तो ऑटोमैटिक में जैसे ही आप एक्सेलरेटर पेडल दबाते हैं तो क्लच और गियर्स को कमांड देने में सेंसर्स कुछ सेकंड का समय लेते हैं लेकिन डीसीटी में यह समय न के बराबर होता है और इसलिए स्पीड बढ़ाते ही तेजी से गियर बदलते हैं और स्पीड कम करते ही तेजी से गियर डाउन होते हैं।
  • जैसे की हम बता चुके हैं इसमें दो क्लच होते हैं और इसलिए ये सबसे फास्ट ऑटोमैटिक गियरबॉक्स भी है। यह उन लोगों के लिए अच्छा ऑप्शन जो स्पोर्टी परफॉर्मेंस चाहते हैं।

6. कंटीन्यूअसली वेरिएबल ट्रांसमिशन (CVT)

  • एक्सपर्ट के मुताबिक, इसका कंस्ट्रक्शन जितना कॉम्प्लीकेटेड है, चलाने के हिसाब से यह उतना ही आसान है, साथ ही भरोसेमंद भी है। हालांकि, डीसीटी जैसी तेजी तो नहीं मिलेगी लेकिन ऑटोमैटिक की पूरी सुविधा मिल जाएगी।
  • अगर आप सोच रहे हैं कि एक्सेलरेटर पेडल दबाते ही तेजी से स्पीड मिले, तो इस सिस्टम में ऐसा नहीं होगा क्योंकि यह कोई गियर रेशो सेट नहीं है। यह उन लोगों के लिए अच्छा ऑप्शन है, जो परफॉर्मेंस नहीं बल्कि ज्यादा माइलेज चाहते हैं क्योंकि इसमें ऑटोमैटिक (टॉर्क कन्वर्टर) और डीसीटी की तुलना में ज्यादा माइलेज मिल जाता है।

क्या बजट के हिसाब से तय करना ठीक रहेगा कि मैनुअल लें या ऑटोमैटिक?

  • कुछ लोगों के मन में धारणा है कि 15 लाख से ज्यादा का बजट है तो ऑटोमैटिक गाड़ी ही लेना चाहिए। एक्सपर्ट ने बताया, ऐसा बिल्कुल नहीं है। यह अपनी-अपनी प्रायोरिटी है। हालांकि, ग्राहक इस बात से तय कर सकते हैं कि वे क्या काम करते हैं, कहां रहते हैं और कितनी गाड़ी चलाते हैं।
  • मान लीजिए कि आप मुंबई या दिल्ली जैसे बड़े शहरों में रहते हैं, जहां रोजाना ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ता है, तब तो सुविधा के लिए ऑटोमैटिक पर जाने का सेंस बनता है। अब इसमें कौन सी ऑटोमैटिक कार उनके बजट से मैच करती है ये वो डिसाइड कर सकते हैं।
  • हालांकि, अगर कम कार चलाते हैं तो ऑटोमैटिक तकनीक में पैसा लगाने की जरूरत ही नहीं है क्योंकि जितने ज्यादा सेंसर्स उतना ज्यादा मेंटनेंस कॉस्ट। कम चलाना है तो मैनुअल से बेहतर कुछ नहीं है।

नोट- सभी पॉइंट ऑटो एक्सपर्ट विकास योगी से बातचीत के आधार पर।

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